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RCEP को खारिज कर हमवतन लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 4:17 AM IST
RCEP को खारिज कर हमवतन लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
भारत के बाहर निकलने पर RCEP देशों ने कहा कि के कई मुद्दे थे, जिनका समाधान नहीं हो पाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा,‘जब मैं RCEP करार को सभी भारतीयों के हितों से जोड़कर देखता हूं, तो मुझे सकारात्मक जवाब नहीं मिलता.'

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  • Last Updated: November 5, 2019, 4:17 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात थाईलैंड (Thailand) की तीन दिवसीय यात्रा पूरी कर स्वदेश पहुंचे. थाईलैंड में पीएम मोदी  ने 16 वें आसियान-भारत (Asean India Summit) शिखर सम्मेलन, 14 वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, तीसरे आरसीईपी (RCEP) शिखर सम्मेलन समेत अन्य कार्यक्रमों में भाग लिया था.

इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने  कहा कि भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते में शामिल नहीं होगा. भारत द्वारा उठाये गये मुद्दों और चिंताओं का संतोषजनक ढंग से समाधान नहीं होने पर उसने 16 देशों के बीच होने वाले इस समझौते से बाहर रहने का फैसला किया है.

मोदी ने कहा कि प्रस्तावित समझौते से सभी भारतीयों के जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि भारत द्वारा उठाये गये मुद्दों और चिंताओं का संतोषजनक ढंग से समाधान नहीं होने की वजह से उसने समझौते से बाहर रहने का फैसला किया है. शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के नेता उपस्थित थे.


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मोदी ने कहा, ‘आरसीईपी करार का मौजूदा स्वरूप पूरी तरह इसकी मूल भावना और इसके मार्गदर्शी सिद्धान्तों को परिलक्षित नहीं करता है. इसमें भारत द्वारा उठाए गए शेष मुद्दों और चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं किया जा सका है. ऐसे में भारत के लिए आरसीईपी समझौते में शामिल होना संभव नहीं है.’

कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
विपक्षी दल कांग्रेस आरसीईपी को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर था. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सरकार पर यह कहते हुए कटाक्ष किया कि ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘बाय फ्राम चाइना’ (चीन से खरीदो) हो गया है.

राहुल ने आरईसीपी से जुड़ी एक खबर का हवाला देते हुए यह दावा भी किया कि आरईसीपी से भारत में सस्ते सामान की बाढ़ आ जाएगी जिससे लाखों नौकरियां जाएंगी और अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचेगा.

चीन बना रहा था काफी दबाव
सूत्रों ने बताया कि चीन की ओर से शिखर बैठक के दौरान आरसीईपी समझौते को पूरा करने को लेकर काफी दबाव बनाया जा रहा था. चीन के लिये यह उसके अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध के प्रभाव के बीच व्यापार में संतुलन बैठाने में मददगार साबित होता. साथ ही वह पश्चिमी देशों को क्षेत्र की आर्थिक ताकत का भी अंदाजा करा पाता.

भारत इस बातचीत में अपने उत्पादों के लिये बाजार पहुंच का मुद्दा काफी जोरशोर से उठा रहा था. भारत मुख्यतौर पर अपने घरेलू बाजार को बचाने के लिये कुछ वस्तुओं की संरक्षित सूची को लेकर भी मजबूत रुख अपनाये हुये था. देश के कई उद्योगों को ऐसी आशंका है कि भारत यदि इस समझौते पर हस्ताक्षर करता है तो घरेलू बाजार में चीन के सस्ते कृषि और औद्योगिक उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी.

भारत मुक्त व्यापार का पक्षधर लेकिन....
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत व्यापक क्षेत्रीय एकीकरण के साथ मुक्त व्यापार और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पक्षधर है. आरसीईपी वार्ताओं की शुरुआत के साथ ही भारत इसके साथ रचनात्मक और अर्थपूर्ण तरीके से जुड़ा रहा है. भारत ने आपसी समझबूझ के साथ ‘लो और दो’ की भावना के साथ इसमें संतुलन बैठाने के लिए कार्य किया है.’

मोदी ने कहा, ‘जब हम अपने चारों तरफ देखते हैं तो सात साल की आरसीईपी वार्ताओं के दौरान वैश्विक आर्थिक और व्यापार परिदृश्य सहित कई चीजों ... में बदलाव आया है. हम इन बदलावों की अनदेखी नहीं कर सकते.’

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First published: November 5, 2019, 4:08 AM IST
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