आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- किसानों को अफवाह से बचाना भाजपा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी

BJP कार्यकर्ताओं को संबोधित करते पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने किसानों के आंदोलन (Kisaan Aandolan) के बीच कहा कि किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया, जिसके कारण वो अपनी ही उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था.

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    नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) द्वारा संसद में तीन किसान बिलों के पास कराए जाने के बाद शुरू हुए किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा है कि कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों को भ्रमित कर रहे हैं. पीएम ने कहा कि किसानों से हमेशा झूठ बोलने वाले कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों को भ्रमित करने में लगे हैं. ये लोग अफवाहें फैला रहे हैं. किसानों को ऐसी किसी भी अफवाह से बचाना भाजपा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है. हमें किसान के भविष्य को उज्ज्वल बनाना है.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को कर्ज लेने की मजबूरी से बाहर निकालने के लिए हमने एक अहम काम पूरी ताकत से शुरू किया है. अब दशकों बाद किसान को अपनी उपज का सही हक मिल पाया है. कृषि में जो सुधार किए हैं उसका सबसे ज्यादा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा.

    मोदी ने दावा किया कि UPA सरकार के पिछले 6 साल में किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा किसानों को करीब 20 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था. भाजपा सरकार के 5 वर्ष में किसानों को लगभग 35 लाख करोड़ रुपये KCC के माध्यम से दिए गए हैं. सरकार ने इस बात का भी प्रयास किया है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड हो, उन्हें खेती के लिए आसानी से कर्ज उपलब्ध हो. पहले सिर्फ उसी किसान को KCC का लाभ मिलता था जिसके पास 2 हेक्टेयर जमीन हो. हमारी सरकार इसके दायरे में देश के हर किसान को ले आई है.

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    किसान को बैंकों से सीधे जोड़ने का प्रयास- PM
    दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी कार्यकर्ताओं से पीएम ने कहा कि बीते सालों में ये निरंतर प्रयास किया गया है कि किसान को बैंकों से सीधे जोड़ा जाए.पीएम किसान सम्मान निधि के तहत देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में कुल एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए जा चुके हैं.



    प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया, जिसके कारण वो अपनी ही  उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था. नतीजा ये हुआ कि उपज बढ़ने के बावजूद किसानों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी. हां, उन पर कर्ज जरूर बढ़ता गया.

    हाल ही में बदले गए श्रम कानूनों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि किसान और श्रमिक के नाम पर देश में, राज्यों में अनेकों बार सरकारें बनीं लेकिन उन्हें मिला क्या? सिर्फ वादों और कानूनों का एक उलझा हुआ जाल. एक ऐसा जाल, जिसको ना तो किसान समझ पाता था और ना ही श्रमिक.

    बड़े-बड़े घोषणापत्र लिखे गए लेकिन..
    पीएम ने कहा कि आजादी के अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणापत्र लिखे गए, लेकिन समय की कसौटी ने सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थीं. देश इन बातों को भली-भांति जानता है.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक-एक देशवासी अथक परिश्रम कर रहा है, तब गरीबों को, दलितों, वंचितों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, आदिवासी, मजदूरों को उनका हक देने का बहुत ऐतिहासिक काम हुआ है. हमारे देश के किसान, श्रमिक भाई-बहन, युवाओं, मध्यम वर्ग के हित में अनेक अच्छे और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं. जहां-जहां राज्यों में हमें सेवा करने का मौका मिला है वहां-वहां इन्हीं आदर्शों को परिपूर्ण करने के लिए उतने ही जी जान से लगे हुए हैं.

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