गाजीपुर लैंडफिल से छुटकारा दिलाने के लिए अब पीएमओ ने बढ़ाए कदम

गाजीपुर लैंडफिल से छुटकारा दिलाने के लिए अब पीएमओ ने बढ़ाए कदम
70 एकड़ से भी बड़े इलाके में फैला यह लैंडफिल 1984 में शुरू किया गया था.

पीएमओ ने सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार से 65 मीटर ऊंचे कचरे के इस अंबार को हटाने तथा यहां मौजूद कचरे से बिजली बनाने के उपाय मांगे हैं.

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दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल में देश के सबसे ऊंचे कचरे के ढेर से पेश आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने कदम बढ़ाया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीएमओ कचरे की इस विशाल होती समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों से मदद लेने की तैयारी में है.

पीएमओ ने सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार से 65 मीटर ऊंचे कचरे के इस अंबार को हटाने तथा यहां मौजूद कचरे से बिजली बनाने के उपाय मांगे हैं. बता दें कि ये सलाहकार विज्ञान, तकनीक तथा प्रद्योगिकी पर सीधे प्रधानमंत्री को सलाह देते हैं.

अंग्रेजी अखबार ईटी ने प्रस्ताव अनुरोध के हवाले से बताया है कि गाजीपुर लैंडफिल को लेकर प्रमुख सलाहकार को मोटे तौर पर दो चुनौतियों से निपटने का जिम्मा सौंपा है. पहला- इस खुले लैंडफिल से कचरा हटाना और उसे रीसाइकिल करना तथा दूसरा यहां रोजाना आने वाले 2200 टन कचरे की रीसाइकिलिंग करना.



पीएमओ कचरे की इस विशाल होती समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों से मदद लेने की तैयारी में है.
पीएमओ कचरे की इस विशाल होती समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों से मदद लेने की तैयारी में है.




अखबार के मुताबिक, सरकार का मकसद गाजीपुर लैंडफिल से पूरी तरह कचरा साफ करना है और इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट बनाने के लिए 18 महीने की मोहलत दी गई है.

बता दें कि 70 एकड़ से भी बड़े इलाके में फैला यह लैंडफिल 1984 में शुरू किया गया था. यूं तो इस साइट को 25 वर्षों के उपयोग के लिए रखा गया था, लेकिन अब भी यहां दिल्ली और आसपास के इलाके का कचरा फेंका जा रहा है. गाजीपुर के 10 किलोमीटर के दायरे में करीब 30 लाख लोग रहते हैं और यहां से निकलने वाली जहरीली गैस उनके लिए काफी खतरनाक साबित हो रही है.
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