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रेडक्रॉस के जरिए क्यों सौंपे जाते हैं युद्धबंदी, पायलट अभिनंदन को भी ऐसे ही रिहा करेगा पाक!

News18Hindi
Updated: March 1, 2019, 10:06 AM IST
रेडक्रॉस के जरिए क्यों सौंपे जाते हैं युद्धबंदी, पायलट अभिनंदन को भी ऐसे ही रिहा करेगा पाक!
रेड क्रास

विशेषज्ञों का कहना है कि जिनेवा कन्वेंशन के तहत पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनंदन को सीधे भारत को नहीं सौंपेगा. इसमें रेडक्रॉस थर्ड पार्टी की भूमिका निभाएगा.

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  • Last Updated: March 1, 2019, 10:06 AM IST
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विंग कमांडर अभिनंदन की पाकिस्तान से सकुशल वापसी के लिए पूरा देश दुआ कर रहा है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार का कहना है कि जिनेवा समझौते के तहत दुश्मन देश न तो अभिनंदन को तंग कर सकता है न डराने धमकाने का काम कर सकता है. न तो अपमानित कर सकता. इसलिए विंग कमांडर अभिनंदन को वापस करना ही होगा. हालांकि, पाकिस्तान उनकी वापसी सीधे नहीं करेगा. उन्हें रेडक्रॉस को सौंपेगा. रेडक्रॉस के प्रतिनिधि उन्हें भारत ले आएंगे. मतलब इस मामले में थर्ड पार्टी शामिल होगी. (ये भी पढ़ें: अभिनंदन के पिता बोले, दुश्मन देश में भी बहादुरी से बात कर रहा मेरा बेटा, मुझे उस पर गर्व!)

 Air Marshal retired S Varthaman's emotional message for his son wing commander abhinandan who is in custody of pakistan army indian-pilot-dlop           पाकिस्तान की कैद में हैं विंग कमांडर अभिनंदन (प्रतीकात्मक फोटो)

रेडक्रॉस एक स्वतंत्र संस्था है, जो किसी देश की सरकार के दबाव में काम नहीं करती. इसका सिद्धांत मानवता की सेवा है. दुनिया में कहीं भी युद्ध चल रहा हो, वहां रेडक्रॉस घायल सिपाहियों, सैनिकों की निस्वार्थ भाव से सेवा करती है. इसकी स्थापना हेनरी डयूनेन्ट ने 9 फरवरी 1863 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में की थी. उस वक्त पांच लोगों की कमेटी थी. उसी साल जिनेवा में ही एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ जिसमें 18 देशों ने शिरकत की. वहीं, रेडक्रास सोसायटी को कानूनी रूप मिला. हेनरी डयूनेन्ट को 1901 में शांति का पहला नोबेल पुरस्कार मिला.

कारगिल युद्ध के दौरान भी जब भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट नचिकेता पाकिस्तान के कब्जे में चले गए थे. उनकी रिहाई के लिए भारत सरकार ने कोशिश की. तब भी पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रॉस के हवाले कर दिया था, जो उन्हें भारत वापस लेकर आया था.



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सुबोध कुमार का कहना है कि जैसे ही दूसरे देश में पकड़ा जाता है उस पर जिनेवा समझौता लागू होता है. अगर पाकिस्तान इस समझौते का पालन नहीं करता है तो उसे इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मुंह की खानी पड़ेगी.

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First published: February 28, 2019, 4:36 PM IST
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