फेसबुक विवाद: राहुल गांधी और शशि थरूर को विशेषाधिकार हनन का नोटिस

निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी और शशि थरूर को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और शशि थरूर (Shashi Tharoor) को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है. दुबे ने ये जवाबी कार्रवाई शशि थरूर द्वारा विशेषाधिकार हनन नोटिस भेजने के बाद की गई है. उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी और शशि थरूर ने संसदीय मर्यादा और नैतिकता की सारी सीमाएं पार कर दी है.

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    नई दिल्ली. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (Wall Street Journal) की एक रिपोर्ट को लेकर शुरू हुए फेसबुक विवाद (Facebook Row) में अब बीजेपी-कांग्रेस (BJP-Congress) आमने-सामने आ गए हैं. दोनों पार्टियों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. इसी बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और शशि थरूर (Shashi Tharoor) को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है. निशिकांत दुबे ने ये जवाबी कार्रवाई शशि थरूर द्वारा विशेषाधिकार हनन नोटिस भेजने के बाद की है.

    निशिकांत दुबे ने कहा है कि राहुल गांधी और शशि थरूर ने संसदीय मर्यादा और नैतिकता की सारी सीमाएं पार कर दी है. उन्होंने राहुल गांधी को फेक न्यूज फैलाने वाला कहा है. गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस ने फेसबुक जुड़े ताजा विवाद को लेकर सोशल नेटवर्किंग कंपनी के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को लेटर लिखा है. कांग्रेस ने आग्रह किया है कि इस पूरे मामले की फेसबुक मुख्यालय की तरफ से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. उधर, भारतीय जनता पार्टी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष को लगता है कि जो उनके लायक काम नहीं करता, वह आरएसएस और बीजेपी के दबाव में है.

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
    पूरा विवाद अमेरिकी अखबार ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की ओर से शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट के बाद आरंभ हुआ. इस रिपोर्ट में फेसबुक के अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि फेसबुक के वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने कथित तौर पर सांप्रदायिक आरोपों वाली पोस्ट डालने के मामले में तेलंगाना के एक भाजपा विधायक पर स्थायी पाबंदी को रोकने संबंधी आंतरिक पत्र में दखलंदाजी की थी. अब कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जुकरबर्ग को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा गया है.

    फेसबुक ने दी सफाई
    फेसबुक ने इस तरह के आरोपों के बीच सोमवार को सफाई देते हुए कहा कि उसके मंच पर ऐसे भाषणों और सामग्री पर अंकुश लगाया जाता है, जिनसे हिंसा फैलने की आशंका रहती है. इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि उसकी ये नीतियां वैश्विक स्तर पर लागू की जाती हैं और इसमें यह नहीं देखा जाता कि यह किस राजनीतिक दल से संबंधित मामला है.

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