टीम प्रियंका के ठप्पे और पिता के कड़वे इतिहास के साथ क्यों जितिन की कठिन है डगर

टीम प्रियंका के ठप्पे और पिता के कड़वे इतिहास के साथ क्यों जितिन की कठिन है डगर
जितिन प्रसाद को लेकर कांग्रेस में विरोध हो रहा है.

पूरी यूपी कांग्रेस (UP Congress) ने एक प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के नेतृत्व पर भरोसा जता दिया है. ऐसे में यूपी की राजनीति में जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) अकेले पड़ गए हैं. अब उनके लिए आगे की राजनीतिक डगर कठिन है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 30, 2020, 11:32 PM IST
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लखनऊ. मार्च 2019 में लोकसभा चुनाव (2019 Lok Sabaha Election 2019) से ठीक पहले प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने लखनऊ सीट से बीजेपी के दिग्गज राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के खिलाफ एक ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने पर चर्चा की थी. इस सीट पर प्रियंका की पसंद के प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद थे. नफासत भरे और शहरी लुक वाले जितिन प्रसाद के नामांकन पर पूरी गंभीरता के साथ विचार चल रहा था. उद्देश्य यह था कि जीत या हार कुछ भी हो लेकिन ब्राह्मण मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश जरूर जाएगा.

खुद जितिन प्रसाद ने नहीं लड़ा था लखनऊ से चुनाव
कहा गया कि तब जितिन प्रसाद खुद लखनऊ की बजाए अपनी परंपरागत सीट धरौरा से चुनाव लड़ना चाहते थे. वहीं पार्टी में उनके विरोधियों का कहना था कि वो दिग्गज राजनाथ सिंह को चुनौती देना नहीं चाहते थे. आखिरकार जितिन प्रसाद ने धरौरा सीट से ही चुनाव लड़ा और लगातार दूसरी बार उन्हें हार मिली. कांग्रेस को भी राज्य में सिर्फ एक ही सीट पर जीत मिली. खुद राहुल गांधी अपना चुनाव अमेठी से हार गए.

जब यूपी में कांग्रेस को फिर खड़ा करने वाली टीम में शामिल किए गए
कुछ समय बाद कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने जितिन प्रसाद को अपनी टीम में ले लिया. प्लान ये था कि तीन दशक से राज्य में पार्टी के खोए हुए जनाधार को वापस लाया जाए. तब भी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इस निर्णय को सही नहीं माना था. अब जब जितिन प्रसाद के खिलाफ उनके संसदीय क्षेत्र में ही विरोध के स्वर उठे हैं तो ये सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर उन्होंने कांग्रेस की लीडरशिप चेंज करने के लिए लिखे गए खत में हस्ताक्षर क्यों किए? गौरतलब है कि बीते सात अगस्त को कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को एक लेटर लिखा था जिसमें संगठनात्मक ढांचे में परिवर्तन की बात कही गई थी.



क्यों जितिन की राजनीतिक डगर मुश्किल है
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के दौरान अंबिका सोनी ने जितिन प्रसाद के पिता का जिक्र कर पुराने घाव ताजा कर दिए हैं. हालांकि खुद सोनिया गांधी की तरफ से कहा जा चुका है कि इस लेटर में कोई भी गलत भावना नहीं थी. लेकिन इसे लेकर स्थानीय नेताओं की तरफ से निशाना साधा जा चुका है.

पूरी यूपी कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जता दिया है. ऐसे में यूपी की राजनीति में जितिन प्रसाद अकेले पड़ गए हैं. अब उनके लिए आगे की राजनीतिक डगर कठिन है.

(प्रांशू मिश्रा की स्टोरी से इनपुट्स के साथ. पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है.)
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