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अमित शाह ने कहा- पूरे देश में लागू करेंगे NRC, वकील भी मुहैया कराएगी सरकार

News18Hindi
Updated: November 20, 2019, 5:52 PM IST
अमित शाह ने कहा- पूरे देश में लागू करेंगे NRC, वकील भी मुहैया कराएगी सरकार
राज्यसभा में बोलते अमित शाह

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा- 'एनआरसी में धर्म के आधार पर भेदभाव करने की बात नहीं है. एनआरसी की प्रक्रिया जब पूरे देश में होगी तो असम में एनआरसी की प्रक्रिया फिर से की जाएगी. किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है.'

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  • Last Updated: November 20, 2019, 5:52 PM IST
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नई दिल्ली. संसद सत्र के तीसरे दिन गृहमंत्री मित शाह (Amit Shah) ने राज्यसभा में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि एनआरसी जल्द पूरे देश में लागू किया जाएगा. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि इस प्रक्रिया में धर्म के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा.

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा- 'एनआरसी में धर्म के आधार पर भेदभाव करने की बात नहीं है. एनआरसी की प्रक्रिया जब पूरे देश में होगी तो असम में एनआरसी की प्रक्रिया फिर से की जाएगी. किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है. सारे लोगों को एनआरसी के अंदर समाहित करने की व्यवस्था है.'

गृहमंत्री ने कहा कि सरकार मानती है कि सारे धर्म के जो शरणार्थी बाहर से आए हैं. उन्हें नागरिकता दी जाएगी.' एक सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सिटीजनशिप अमेडमेंट बिल वापस लाया जाएगा. इसका एनआरसी से कोई संबंध नहीं है.


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गैर मुस्लिम धर्मों के शरणार्थियों को मलेगी नागरिकता
शाह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एनआरसी में छह गैर मुस्लिम धर्मों के शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने से जुड़े एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश में प्रताड़ना के शिकार होकर भारत आये हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन पारसी और इसाई धर्म के शरणार्थियों को नागरिकता दी जाए. इसके लिये सरकार नागरिकता कानून में संशोधन करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली लोकसभा से पारित किये जा चुके नागरिकता संशोधन विधेयक को असम के लिये बनाये गये एनआरसी कानून से भ्रमित न किया जाए.

NRC में सभी धर्मों के लोग शामिल हैं
अमित शाह ने कहा कि एनआरसी में धार्मिक आधार पर नागरिकों की पहचान का कोई प्रावधान नहीं है. इसमें सभी धर्मों के लोगों को शामिल किया जायेगा. शाह ने कहा कि पिछली लोकसभा में पारित नागरिकता संशोधन विधेयक में सभी दलों की सहमति से शरणार्थियों को धार्मिक आधार पर नागरिकता देने के प्रावधान शामिल किये गये थे. उल्लेखनीय है कि 16वीं लोकसभा भंग होने के कारण इससे संबंधित विधेयक निष्प्रभावी हो गया था.

सरकार अब नये सिरे से नागरिकता संशोधन विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त करने के बाद संसद में पेश करेगी. शाह ने कहा कि असम में गैरकानूनी शरणार्थियों की समस्या से निपटने के लिये उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एनआरसी कानून बना कर लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि बाद में एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जायेगा, उस समय भी असम को इसमें स्वाभाविक तौर पर शामिल किया जायेगा.

असम में एनआरसी से बाहर किये गये 19.6 लाख लोगों की अपील पर अभी तक न्यायाधिकरण में सुनवाई नहीं होने के पूरक प्रश्न के जवाब में शाह ने कहा कि ऐसे सभी लोगों को ट्रिब्यूनल में जाने का अधिकार है जिनके नाम एनआरसी में छूट गये हैं. ट्रिब्यूनल में अपील दायर करने की सुविधा असम की हर तहसील में मुहैया करायी जाएगी और राज्य सरकार निर्धन तबके के लोगों को विधिक सहायता भी उपलब्ध करायेगी.

कब जारी हुई असम एनआरसी की पहली लिस्ट
असम की नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) की फाइनल लिस्ट 31 अगस्त को जारी की गई. इस लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोगों को बाहर रखा गया है. असम में एनआरसी में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन किया था. फाइनल लिस्ट से 19,06,657 लोगों को निकाल दिया गया, जबकि 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया था. अपना नाम देखने के लिए nrcassam.nic.in पर क्लिक कर सकते हैं या https://assam.gov.in/ लिंक पर जाकर लिस्ट में नाम देख सकते हैं.

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First published: November 20, 2019, 1:35 PM IST
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