Teacher's Day: प्रोफेसर हरारी ने कहा, तेज तकनीकी बदलाव के कारण दो साल भी एक नौकरी में टिकना होगा मुश्किल

News18Hindi
Updated: September 5, 2019, 12:39 PM IST
Teacher's Day: प्रोफेसर हरारी ने कहा, तेज तकनीकी बदलाव के कारण दो साल भी एक नौकरी में टिकना होगा मुश्किल
प्रोफेसर हरारी ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और बायो-इंजीनियरिंग वैश्विक व्यवस्था, जॉब मार्केट समेत हमारे मन-मस्तिष्क तक को झकझोर देंगी.

इजराइल के हिब्रू विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर युवाल नोआ हरारी (Professor Yuval Noah Harari) ने दुनिया को भविष्य की तस्वीर दिखाई. फेसबुक (Facebook) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark zuckerberg), अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड (Christine Lagarde) तक प्रो. हरारी का साक्षात्‍कार ले चुकी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2019, 12:39 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. दुनिया के सबसे लोकप्रिय शिक्षक और इजरायल के हिब्रू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर युवाल नोआ हरारी (Professor Yuval Noah Harari) के मुताबिक, तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि जो नौकरी आज है वो दो साल रहेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है. उन्‍होंने कहा कि परमाणु युद्ध, पर्यावरण का कमजोर पड़ना और तकनीक इंसान के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियां हैं. दुनिया पहली दो चुनौतियों का सामना तो कर सकती है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और बायो-इंजीनियरिंग वैश्विक व्यवस्था, जॉब मार्केट समेत हमारे मन-मस्तिष्क तक को झकझोर देंगी.

प्रो. हरारी ने कहा कि अमेरिका, चीन, भारत जैसे देशों को मिलकर रोबोट और जेनेटिकली इंजीनियर्ड सुपर ह्यूमन्स के उत्पादन को नियंत्रित करना होगा. बता दें कि प्रो. हरारी ऐसे शिक्षक हैं, जिनका साक्षात्‍कार फेसबुक (Facebook) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark zuckerberg), अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व प्रमुख क्रिस्‍टीन लेगार्ड (Christine Lagarde) और एक्‍ट्रेस नेटली पोर्टमेन (Natalie Portman) तक ले चुकी हैं.

तकनीक को आतंकियों के हाथ में जाने से बचाना के लिए करना होगा काम
1976 में जन्मे हरारी की सैपियंस, होमो डायस और 21 लेसंस फॉर 21 सेंचुरी जैसी किताबों की दो करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं. उन्‍होंने कहा कि नई तकनीक के मजहबी उग्रवादियों और आतंकियों के हाथ में जाने का खतरा हमेशा बना रहता है. उनके मुताबिक, आतंकियों ने हमेशा औरतों और कमजोरों पर अत्याचार किए हैं. अगर जेनेटिक इंजीनियरिंग से मनुष्य को फैक्ट्री में पैदा करना शुरू कर दिया जाए, तो औरतों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी. ऐसे में तकनीकी को मजहबी उग्रवादियों और आतंकियों से बचाना बहुत जरूरी है, जो वैश्विक सहयोग के बिना आसान नहीं है.

ऑटोमेशन तकनीक के कारण नौकि‍रियां तेजी से उभरेंगी तो खत्‍म भी होंगी
प्रो. हरारी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने इंसान के दिमाग को पीछे छोड़ दिया है. भविष्य में पुराने रोजगार अपना वजूद खो देंगे. ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी के कारण जितनी तेजी से नौकरियां उभरेंगी, उतनी ही तेजी से खत्म भी होंगी. दैनिक भास्कर के साथ तकनीक, रोजगार और इंसान के भविष्य पर बातचीत करते हुए उन्‍होंने कहा, सबसे बड़ी चिंता होगी कि पेशेवर हर तीन से पांच साल में पुरानी नौकरी में रहते हुए खुद को नई नौकरी के लिए कैसे तैयार करें? आज की शिक्षा व्यवस्था भी इसके लिए तैयार नहीं है. हर व्‍यक्ति को लगातार नई चीजें सीखनी होंगी. ऐसा नहीं हुआ तो बड़ी आबादी किसी काम की नहीं रहेगी.

प्राे. नोओ के मुताबिक, यह कहना बहुत मुश्किल है कि इंटरनेट के तेज प्रसार के कारण स्कूलों में भी शिक्षकों की आवश्यकता बचेगी या नहीं.

Loading...

भावनात्मक शक्ति, बदलाव से जूझने का मनोबल होना जरूरी होगा
प्राे. नोओ के मुताबिक, यह कहना बहुत मुश्किल है कि इंटरनेट के तेज प्रसार के कारण स्कूलों में भी शिक्षकों की आवश्यकता बचेगी या नहीं. अगर बच्चे अपने स्मार्टफोन पर विश्व के बेस्ट टीचर से पढ़ लें और स्मार्टफोन पर ही परीक्षा देकर रिजल्ट पा लें तो क्या आने वाले समय में स्कूल या टीचर का अस्तित्व बचेगा? अभी भी समाज की इस पर नजर नहीं जा रही है. एक बात तय है कि आने वाले समय में हर पेशेवर में भावनात्मक शक्ति और बदलाव से जूझने का मनोबल होना बहुत जरूरी होगा. इनकी कमी पर कामकाजी बने रहना किसी के लिए भी मुश्किल हो जाएगा.

अब युद्ध से ज्‍यादा मौतें ज्‍यादा खाने और मोटापे के कारण हो रही हैं
प्रो. हरारी के मुताबिक, तकनीक लोकतंत्र, समाजवाद और पूंजीवाद जैसी तमाम राजनीतिक परंपराओं को निष्क्रिय कर सकती है. अब कंप्यूटर अपने यूजर को उससे बेहतर समझने लगा है. नतीजतन सरकार या कोई कंपनी हमसे अपने फायदे के फैसले करा सकती है. वहीं, उन्‍होंने कहा कि इस समय दुनिया के किसी न किसी कोने में छिटपुट युद्ध हो रहे हैं, लेकिन बड़ा हिस्सा युद्ध से मुक्त है. प्राचीन समय में 15% मौतें मानवीय हिंसा के कारण होती थीं. आज यह संख्या 1.5% पर सिमट गई है. अब हिंसा से कई गुना ज्यादा मौतें ज्यादा खाने और मोटापे के कारण हो रही हैं.

अब युद्ध का कारण मानवीय बेवकूफी के अलावा कुछ नहीं होगा
प्रोफेसर युवाल ने कहा कि हमें मानवीय बेवकूफियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर युद्ध होता है तो उसका कारण बेवकूफी होगा. अगर आज कुछ ताकतवर बेवकूफों को यह महसूस हो जाए कि युद्ध व्यापार से ज्यादा फज्ञयदेमंद हो सकता है, तो कई समझदार मिलकर भी युद्ध नहीं रोक पाएंगे. इसका उपाय मुश्किल और लंबा है. अब सिर्फ पढ़ने से काम नहीं चलेगा, मेडिटेशन जैसी क्रियाओं का भी भरपूर लाभ लेना होगा, ताकि हम अपने दिमाग और शरीर को हैक होने से बचा सकें. हमें बहुत सतर्क रहने की जरूरत है. आज हम खुलेआम सोशल मीडिया पर अपनी पसंद और नापसंद बता रहे हैं. हमें अपने डेटा को बचाने की जरूरत है.

ये भी पढ़ें: 

Teacher's Day: भाई की किताबें पढ़कर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बने थे महान दार्शनिक

स्तालिन भारत को पसंद नहीं करते थे..राधाकृष्णन ने कैसे बदली उनकी राय

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 5, 2019, 12:34 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...