उसूलों की खातिर पार्टी लाइन के खिलाफ खड़े हो गए थे सोमनाथ चटर्जी

कोलकाता से शुरुआती पढ़ाई करने वाले सोमनाथ ने प्रेसिडेंसी कॉलेज और फिर कोलकाता विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की थी.

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Updated: August 13, 2018, 9:38 AM IST
उसूलों की खातिर पार्टी लाइन के खिलाफ खड़े हो गए थे सोमनाथ चटर्जी
सोमनाथ चटर्जी (फाइल फोटो)
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Updated: August 13, 2018, 9:38 AM IST
भारतीय राजनीति में विरले नाम ही हैं जिनको देश के महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी देने के लिए विभिन्न विचारों के राजनीतिक दलों में आम सहमति बन जाती हो. कुछ ऐसे ही थे सोमनाथ चटर्जी. साल 1968 से राजनीतिक जीवन की पारी शुरु करने वाले सोमनाथ का जन्म 25 जुलाई 1929 को असम स्थित तेजपुर में हुआ था. सोमनाथ का सोमवार सुबह 89 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया.

कोलकाता से शुरुआती पढ़ाई करने वाले सोमनाथ ने प्रेसिडेंसी कॉलेज और फिर कोलकाता विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की. इसके साथ ही कैंब्रिज के जीसस कॉलेज से साल 1952 में ग्रेजुएशन और फिर साल 1957 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. उन्होंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन, दोनों कानून के विषय में की. उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने से पहले कोलकाता हाईकोर्ट में वकालत भी की.

साल 1968 में सोमनाथ ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्स) में शामिल हुए. साल 1971 में वह CPIM के समर्थन से निर्दलीय सांसद बने. सोमनाथ 9 बार सांसद चुने गए. सिर्फ साल 1984 में वह ममता बनर्जी से जाधवपुर सीट से हार गए थे. इसके बाद फिर साल 1989 से साल 2004 तक जीत का सिलसिला जारी रहा. साल 2004 में वह 14वीं लोकसभा में 10वीं बार सांसद चुने गए. सोमनाथ आम सहमति से लोकसभा के अध्यक्ष बने. साल 1996 में सोमनाथ को उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार मिला.

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साल 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु संधि के मुद्दे पर वामदल ने कांग्रेस नीत UPA से समर्थन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की तो पार्टी ने अपनी सूची में सोमनाथ का नाम भी शामिल किया. हालांकि लोकसभा अध्यक्ष के पद पर विराजमान व्यक्ति किसी दल का नहीं होता. वहीं चटर्जी ने भी इस मुद्दे पर पार्टी लाइन के खिलाफ गए. पार्टी के निर्देशों को नदरअंदाज करते हुए वह स्पीकर पद पर बने रहे. इसके बाद CPIM ने पार्टी के अनुशासन का पालन ना करने के आरोप में उन्हें पार्टी से निकाल दिया.

सोमनाथ ने अपने निष्कासन के बाद कहा था कि यह उनके लिए 'सबसे दुखी दिन' था. उन्होंने सलाह दी कि भविष्य के स्पीकर अपने दल से इस्तीफा देकर पद पर आसीन हों. साल 2009 में उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया. अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में सोमनाथ चैटर्जी ने लोकसभा के शून्य काल का लाइव प्रसारण शुरु कराया. साल 2006 में लोकसभा का प्रसारण 24 घंटे के लिए किया जाने लगा.

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