तेलगी स्टांप से लेकर 26/11 की छानबीन तक, यहां जानें नए सीबीआई चीफ के बारे में सब कुछ

सुबोध जायसवाल बने सीबीआई के निदेशक (फाइल फोटो)

सुबोध जायसवाल बने सीबीआई के निदेशक (फाइल फोटो)

3 फरवरी को ऋषि कुमार शुक्ला का दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो तीन महीने से अधिक समय तक बिना नियमित चीफ के काम कर रहा था.

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नई दिल्ली. महाराष्ट्र के आईपीएस अधिकारी सुबोध कुमार जायसवाल ( IPS officer Subodh Kumar Jaiswal) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठकों की के बाद मंगलवार को नया सीबीआई निदेशक नामित किया गया. फिलहाल CISF के महानिदेशक जायसवाल 1985 बैच के अधिकारी हैं. इनको कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा शॉर्टलिस्ट किया गया था.

इस समिति में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं. एसीसी के मंगलवार के आदेश में कहा गया है 'मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने समिति द्वारा अनुशंसित पैनल के आधार पर सुबोध कुमार जायसवाल, आईपीएस (MH: 1985) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक के रूप में दो साल की अवधि के लिए मंजूरी दी.'

3 फरवरी को ऋषि कुमार शुक्ला का दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो तीन महीने से अधिक समय तक बिना नियमित चीफ के काम कर रहा था. शुक्ला का कार्यकाल पूरा होने के बाद गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा को कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया गया था.

 'खुफिया जानकारी जुटाने का अनुभव'
बता दें आलोक वर्मा और शुक्ला की नियुक्ति तक सीबीआई या सतर्कता विभाग में अनुभव सीबीआई प्रमुख के पद के लिए एक मानदंड हुआ करता था. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जायसवाल को राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर आतंकी जांच और खुफिया जानकारी जुटाने का अनुभव है.

महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभालने से पहले जायसवाल ने अपने गृह कैडर में कई हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की. सीबीआई में आने से पहले उन्होंने तेलगी स्टांप पेपर घोटाले की जांच की. वह राज्य रिजर्व पुलिस बल और राज्य खुफिया ब्यूरो के भी चीफ थे. इसके साथ ही साल 2006 के सिलसिलेवार धमाकों से लेकर 26 नवंबर, 2008 को हुए घातक आतंकी हमले तक, जायसवाल मुंबई में कुछ सबसे बड़ी आपराधिक और आतंकी जांच का हिस्सा रहे हैं.

जायसवाल ने इससे पहले रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) में काम किया है. नक्सल के मोर्चे पर, कई अभियानों का नेतृत्व करने के अलावा, उन्होंने एल्गार परिषद और भीमा कोरेगांव हिंसा मामलों की जांच की निगरानी की. जायसवाल ने पुणे में एक अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में भी काम किया है और महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) का भी हिस्सा रहे हैं.




महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार को उजागर करने में उनकी भूमिका हाल ही में तब सामने आई जब भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने जायसवाल द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कथित रूप से लिखे गए एक पत्र को सार्वजनिक किया जिसमें मुंबई पुलिस में ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर किया गया था.

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