चीन के साथ भारत का गतिरोध लंबा खिंचा तो चुकानी होगी बड़ी कीमत: पूर्व विदेश सचिव

चीन के साथ भारत का गतिरोध लंबा खिंचा तो चुकानी होगी बड़ी कीमत: पूर्व विदेश सचिव
पूर्व विदेश सचिव श्याम शरम ने एक इंटरव्यू के दौरान सीमा विवाद को लेकर कई बातें कही हैं. (फाइल फोटो)

श्याम शरण ने कहा है, 'मेरी समझ में अगर यह विवाद सर्दियों में जारी रहता है तो काफी निवेश की आवश्यकता होगी. यह क्षेत्र सर्दियों के दौरान बहुत ही प्रतिकूल है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 4, 2020, 12:01 AM IST
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नई दिल्ली. भारत को चीन के साथ लंबे सीमा विवाद (India-China Border Dispute) में बड़ा आर्थिक नुकसान (Economic Cost) झेलना पड़ सकता है. पूर्व विदेश सचिव श्याम शरण (Shyam Saran) ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत-चीन सीमा के दोनों ओर दोनों देशों के सैनिकों की भारी तैनाती है और सर्दियों के मौसम में गतिरोध जारी रहने पर इसकी उच्च आर्थिक कीमत हो सकती है.

चीन के इरादों पर बोले श्याम शरण
विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में पिछले चार महीने में सीमा पर पैदा हुए हालात इस क्षेत्र में एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने की चीनी कार्रवाई का ‘प्रत्यक्ष परिणाम’ है. समाचार वेबसाइट ‘द वायर’ के लिए करण थापर के साथ एक साक्षात्कार में शरण ने कहा, ‘चीनी पक्ष का कहना है कि सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई है. उनके कहने के मुताबिक अब और कुछ करने की आवश्यकता नहीं है. उनका कोई इरादा नहीं लगता है, उदाहरण के लिए कुछ अतिरिक्त क्षेत्रों को खाली करना है जो उन्होंने पैंगोंग झील क्षेत्र में कब्जा कर लिया है.'

सर्दियों में सेनाओं को बनाए रखना में काफी निवेश करना होगा
शरण ने यह भी कहा, 'मेरी समझ में अगर यह विवाद सर्दियों में जारी रहता है तो काफी निवेश की आवश्यकता होगी. यह क्षेत्र सर्दियों के दौरान बहुत ही प्रतिकूल है. गर्म रहने वाली इकाइयों व सर्दियों के दौरान उपयोग के लिए पर्याप्त उपकरण की सुनिश्चिता के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा. ’ उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा होने जा रहा है, तो मुझे लगता है कि उनके बीच काफी लंबे समय तक गतिरोध रहेगा.'



आर्थिक नुकसान पहुंचाने से नहीं होने वाला कोई खास फायदा
श्याम शरण का यह भी मानना है चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने से भी बहुत फायदा नहीं होने वाला. उन्होंने कहा कि कई चीनी कंपनियों के लिए भारत तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है. यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि इन चीनी कंपनियों की संपत्ति इतनी महत्वपूर्ण है कि वो सीमा विवाद में अपनी सरकार के स्टैंड को प्रभावित कर पाएंगी.
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