पाकिस्तान, अफगान के लोगों को नागरिकता देने का विरोध, आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची IUML

याचिका में IUML ने कहा है कि यह आर्टिकल 14,15 और 21 का उल्लंघन है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

याचिका में IUML ने कहा है कि यह आर्टिकल 14,15 और 21 का उल्लंघन है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Citizenship Notification: केंद्र सरकार ने 28 मई को एक अधिसूचना जारी कर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान (Pakistan) में अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित भारत के 13 जिलों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना संभव बना दिया है.

  • Share this:

नई दिल्ली. इंडियन यूनियम मुस्लिम लीग ने केंद्र सरकार की अधिसूचना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. बीते हफ्ते सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, और पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता संभव कर दी थी. इसके खिलाफ IUML शीर्ष अदालत पहुंचा है. लीग ने सरकार की नोटिफिकेशन पर रोक लगाए जाने की मांग की है.

केंद्र सरकार ने 28 मई को एक अधिसूचना जारी कर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित भारत के 13 जिलों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना संभव बना दिया है. इसके खिलाफ दायर याचिका में IUML ने कहा है कि यह आर्टिकल 14,15 और 21 का उल्लंघन है.

IUML ने याचिका के जरिए सवाल उठाया है कि नागरिकता संशोधन कानून के मामले सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है, तो यह नोटिफिकेशन कैसे जारी हो गया. याचिका में अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है. साथ ही अदालत से उचित आदेश जारी करने की अपील की गई है. IUML की तरफ से एड्वोकेट हरीश बीरन और पल्लवी प्रताप ने याचिका दाखिल की है.


भाषा के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम, 1955 के 2009 के नियमों के तहत एक अधिसूचना जारी करके अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के उन गैर-मुसलमानों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए कहा था, जो गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पंजाब के 13 जिलों में रह रहे हैं. यह नया आदेश किसी भी तरह से 2019 में पारित संशोधित नागरिकता अधिनियम से जुड़ा नहीं है क्योंकि सरकार ने इसके तहत नियम अभी तैयार नहीं किए हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज