Coronavirus: आखिर मुंबई में मास्क के खिलाफ क्यों छिड़ी मुहिम, प्रदर्शनकारियों ने बताई वजह

मुंबई में पहले भी फेस मास्‍क के खिलाफ प्रदर्शन हुए.
मुंबई में पहले भी फेस मास्‍क के खिलाफ प्रदर्शन हुए.

मुंबई में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने अनिवार्य मास्क के उपयोग और टीकाकरण (Vaccination) पर विरोध जताया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 2:56 PM IST
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मुंबई. कोरोना वायरस (Coronavirus) के मद्देनजर कई वैश्विक स्वास्थ्य संगठन, अध्ययन और शोध ने सुरक्षा की दृष्टि से फेस मास्क (Face Mask) को वायरस से बचाव में प्रभावी बताया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) भी भारत समेत कई देशों में सार्वजनिक तौर पर मास्क के उपयोग को अनिवार्य कर चुका है. इधर, मुंबई में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने अनिवार्य मास्क के उपयोग और टीकाकरण (Vaccination) पर विरोध जताया है. गौरतलब है कि महामारी रोग अधिनियम (Epidemic Diseases Act) की धारा 3 के अनुसार इस नियम का उल्लंघन एक 'दंडनीय अपराध' की श्रेणी में आता है.

बता दें कि मुंबई के मरीन ड्राइव पर प्रदर्शनकारी मास्क को वायरस के बचाव में अप्रभावी बताकर इसका विरोध कर रहे हैं. इसमें से एक अकाउंट और फाइनेंस स्नातक और पुणे स्थित फंक्शनल न्यूट्रिशन क्‍लीनिक में अनुसंधान सलाहकार और प्रदर्शनकारी योहन टेंगरा ने बताया, 'वायरस के लिहाज से केवल मास्क प्रभावी नहीं है और हमारे पास कई मास्क के नकारात्मक परिणाम भी हैं. हालांकि अगर कोई अपनी मर्जी से मास्क पहनना चाहता है तो कई विरोध नहीं है.'

योहन ने आगे कहा कि यहां ऐसा कोई सबूत नहीं पेश किया गया है जिससे यह साबित होता है कि मास्क पहनने से कोरोना से बचाव संभव है. ग्लोबल हेल्थ में बायोएथिक्स एंड हेल्थ पॉलिसी के शोधकर्ता अनंत भान ने योहन के तर्कों पर कहा कि जोखिम की स्थिति में यादृच्छिक परीक्षण नहीं किया जा सकता है. अगर आप मास्क के प्रभावीपन को समझने के लिए एक नियंत्रण करना चाहते हैं, तो फिर भी आपको एक मास्क नियंत्रण समूह की आवश्यकता होगी. उन्होंने मास्क के पक्ष में आगे बोलते हुए कहा कि मास्क सुरक्षा के लिहाज से प्रभावी है इस बात का भी सबूत है. हालांकि मास्क शत-प्रतिशत प्रभावी नहीं हैं, लेकिन जब कोविड-19 की बात आती है तो कई के लिए मास्क कोरोना से लड़ने का बड़ा हथियार बना है. इसे आप एक हेल्मेट की तरह समझकर पहनिए.



प्रदर्शनकारी योहन टेंगरा ने आगे कोरोना वैक्सीन को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि लोगों की सुरक्षित यात्रा के लिहाज से टीकाकरण जरूरी है. योहन ने कहा कि मंत्रालय टीकाकरण को प्रतिरक्षा पासपोर्ट (Immunity Passport) के रूप में देख रहा है, इसका मतलब यह है कि अगर किसी ने टीकाकरण नहीं करवाया है तो वह अपनी मर्जी से कहीं भी नहीं आ-जा सकता है.'
योहन के इस तर्क पर अनंत भान ने समझाया कि फिलहाल स्थिति चिंताजनक है. भविष्य को ध्यान में रखकर ऐसा किया जाना जरूरी है और टीकाकरण को लेकर सुरक्षा के लिहाज से कई चिंताए हैं, बजाय इनके विरोध के हमे यह पूछने की जरूरत है कि वैक्सीन कब तक उपलब्ध होगी.

वहीं, मास्क पर नकारात्मक पक्ष रखने वाले दिल्ली स्थित इंडो-अमेरिकन हेल्थ केयर के निदेशक और स्व-प्रकाशित पुस्तक, 'कोरोना पेंडेमिक स्कैंडल: मैनकाइंड के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला' के लेखक और किताब में एंटी-मास्क और एंटी-वैक्सीन के बारे में तरुण कोठारी ने बताया कि मास्क क्यों अनावश्यक हैं. उन्होंने बताया 'मास्क में मौजूद छिद्रों से हवा संचारित होती है. एन-95 मास्क के छिद्रों का आकार 300 से 800 नैनोमीटर के बीच होता है, वहीं, सामान्य और कपड़े से बने मास्क का यह आकार एक हजार नैनोमीटर होता है, लेकिन कोरोवायरस के कणों का आकार 100 नैनोमीटर है, इसलिए वायरस के बचाव में मास्क पूरी तरह से अप्रभावी हैं.
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