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हाथरस पीड़िता की तस्वीर छापने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम कानून पर कानून नहीं बना सकते

सुप्रीम कोर्ट में  याचिका दायर की गई थी(फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी(फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मीडिया द्वारा हाथरस पीड़िता (Hathras News) की तस्वीर के प्रकाशन पर सवाल उठाने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस पर कानून नहीं बना सकते हैं और याचिकाकर्ता सरकार के पास जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 12:45 PM IST
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नई दिल्ली/हाथरस. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में कथित गैंगरेप पीड़िता (Hathras News) की तस्वीर प्रकाशित करने के मामले पर कहा है कि हम कानून पर कानून नहीं बना सकते हैं. अदालत ने इससे संबंधित एक याचिका को खारिज कर दिया. हालांकि कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की तस्वीर छपना दुर्भाग्यपूर्ण है.

बता दें इस साल 19 सितंबर को हाथरस में चार लोगों द्वारा एक 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था. उपचार के दौरान 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई. अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर उसके माता-पिता की सहमति के बिना रात में उसका दाह संस्कार किया गया, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तस्वीर प्रकाशित करने के साथ ही यौन हिंसा के मामलों की सुनवाई में देरी का मुद्दा भी उठाया गया था.

इन मुद्दों का कानून से कोई लेना-देना नहीं- बेंच
जस्टिस एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि इन मुद्दों का कानून से कोई लेना-देना नहीं है. इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं. बेंच ने कहा- 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है. इसके लिए पर्याप्त कानून है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाएं होती हैं.' शीर्ष अदालत ने आगे कहा- 'हम कानून पर कानून नहीं बना सकते. कहा गया कि याचिकाकर्ता सरकार के पास जा सकता है.'





गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने कहा था कि हाथरस मामले की सीबीआई जांच की इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा निगरानी की जानी है और सीआरपीएफ पीड़ित के परिवार और मामले के गवाहों को सुरक्षा देगी.
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