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पुडुचेरी की तुलना दिल्ली से नहीं की जा सकती: राज्यों के स्टेटस पर सुप्रीम कोर्ट

पुडुचेरी की तुलना दिल्ली से नहीं की जा सकती: राज्यों के स्टेटस पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

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शीर्ष अदालत ने कहा कि पुडुचेरी का मामला केंद्र शासित प्रदेशों अंडमान निकोबार द्वीप समूह, दमन और दीव, दादर नागर हवेली, लक्षद्वीप और चंडीगढ़ से भी अलग है. बेंच ने कहा कि पुडुचेरी का शासन संविधान के अनुच्छेद 239 ए के अनुसार चलता है, जबकि दिल्ली के शासन के लिए अलग अनुच्छेद 239 एए उपलब्ध है.

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    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साफ किया कि पुडुचेरी की तुलना दिल्ली के मामले से नहीं की जा सकती, क्योंकि पुडुचेरी के शासन का प्रावधान राष्ट्रीय राजधानी से संबंधित प्रावधान से अलग है.

    शीर्ष अदालत ने कहा कि पुडुचेरी का मामला केंद्र शासित प्रदेशों अंडमान निकोबार द्वीप समूह, दमन और दीव, दादर नागर हवेली, लक्षद्वीप और चंडीगढ़ से भी अलग है. बेंच ने कहा कि पुडुचेरी का शासन संविधान के अनुच्छेद 239 ए के अनुसार चलता है, जबकि दिल्ली के शासन के लिए अलग अनुच्छेद 239 एए उपलब्ध है.

    खास बात यह है कि उपराज्यपाल किरन बेदी के साथ टकराव में उलझे पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने शीर्ष अदालत के फैसले की प्रशंसा करते हुए कहा है कि यह पुडुचेरी पर भी 'पूरी तरह से लागू' होता है.

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    शीर्ष अदालत ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का "मूल तत्व" है, क्योंकि यह जनता में जुड़ाव की भावना पैदा करता है यह पूरी तरह से जरूरी है कि जनता की इच्छा लागू हो.

    जस्टिस ने साथ ही कहा कि निर्वाचित सरकार को इस 'संवैधानिक स्थिति' को स्वीकार करना चाहिए कि दिल्ली राज्य नहीं है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह द्वारा बाध्य हैं और उनके पास निर्णय करने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है.

    इस बीच, कानूनी विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की प्रशंसा की है. पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबाजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अच्छा फैसला सुनाया है. उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार को सौहार्दपूर्ण माहौल में काम करना होगा. वे हमेशा टकराव की स्थिति में नहीं रह सकते. रोज की खटपट लोकतंत्र के लिये अच्छी नहीं है. मैं फैसले का स्वागत करता हूं.

    उधर, वरिष्ठ वकील और कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य केटीएस तुलसी ने आशा जताई कि अब उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच ‘‘गतिरोध का दुखद अध्याय’’ बंद होगा. सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि इस फैसले ने केंद्र शासित प्रदेशों में भी लोकतंत्र के दायरे को बढ़ाया है. (एजेंसी इनपुट)

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