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आतंकी उमर फारूक के पास से मिली थी PAK की ID, अफगानिस्तान में ली थी ट्रेनिंग

पुलवामा हमले का मुख्य आरोपी उमर फारूक हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए अफगानिस्तान भी जा चुका था.

पुलवामा हमले का मुख्य आरोपी उमर फारूक हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए अफगानिस्तान भी जा चुका था.

पिछले साल दक्षिण कश्मीर (South Kashmir) के पुलवामा (Pulwama) में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर हुए उस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. इसी मामले में एनआईए (NIA) ने मंगलवार को चार्जशीट दाखिल की है.

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    श्रीनगर. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने पुलवामा आतंकवादी हमले (Pulwama Terrorist Attack) की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के मामले में मंगलवार को यहां एक विशेष अदालत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-E-Mohammad) के सरगना मसूद अजहर (Masood Azhar) समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. इस चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी उमर फारूक (Umar Farooq) का भी नाम है. फारूक को सुरक्षाबलों ने इसी साल मार्च में एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था. उमर फारूक की पुलवामा हमले में उसकी मुख्य भूमिका बताई गई है. सुरक्षाबलों को फारूक के पास से पाकिस्तान (Pakistan) का पहचान पत्र भी मिला था. उमर फारूक हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए अफगानिस्तान भी जा चुका था.

    गौरतलब है कि पिछले साल दक्षिण कश्मीर (South Kashmir) के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर हुए उस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. अधिकारियों ने बताया कि एनआईए (NIA) इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. आरोप पत्र में अजहर के अलावा अलग-अलग मुठभेड़ में मारे गए सात आतंकवादियों, चार भगोड़ों का नाम शामिल है. इनमें से दो भगोड़े अब भी जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में छिपे हुए हैं, जिनमें एक स्थानीय निवासी और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है. आरोप पत्र में मसूद अजहर के दो संबंधियों अब्दुल रऊफ और अम्मार अल्वी के नाम मुख्य षड्यंत्रकारी के रूप में दर्ज हैं. मृतकों में जैश के आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक का करीबी संबंधी भी शामिल है, जो 2018 के अंत में सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्राकृतिक गुफाओं के जरिये भारत में दाखिल हुआ था.

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    इस तरह सुलझ सकी मामले की गुत्थी
    अधिकारियों ने कहा कि एनआईए ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार आतंकवादियों तथा उनसे सहानुभूति रखने वालों के बयानों की मदद से इस 'पेचीदा मामले' की गुत्थी सुलझाई है. जांच एजेंसी द्वारा दायर 13,500 पन्नों के इस आरोप पत्र में आत्मघाती बम हमलावर आदिल डार को शरण देने और उसका अंतिम वीडियो बनाने के लिये पुलवामा से गिरफ्तार किये गए लोगों को नामजद किया गया है. डार ने पिछले साल 14 फरवरी को दक्षिण कश्मीर के लेथपुरा के निकट लगभग 200 किलो विस्फोटक से भरे वाहन से सीआरपीएफ के काफिले को टक्कर मार दी थी.



    आरोप पत्र में कहा गया है कि आदिल अहमद डार विस्फोटक से लदी वह कार चला रहा था. उसने बिलाल अहमद कूचे द्वारा खरीदे गए हाइटेक फोन से पुलवामा में शाकिर बशीर के घर पर अपना आखिरी वीडियो बनाया था.

    डार मर चुका है जबकि बशीर और कूचे को गिरफ्तार कर लिया गया था.

    आरोप पत्र में कहा गया है कि पहले वह कार बशीर चला रहा था. बाद में उसने कार डार को दे दी, जिसने उसे सीआरपीएफ के काफिले में घुसा दिया. (नीतीश कुमार के इनपुट सहित)

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