फारूक अब्दुल्ला बोले- जब तक कश्मीर मसला नहीं सुलझ जाता, पुलवामा जैसे अटैक होते रहेंगे

हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'मीटिंग में मैंने साफ कहा था कि ये हमारी गलती नहीं है कि हमला हुआ. ये सरकार की गलती है कि उसने वक्त रहते कश्मीरियों की आवाज और मांगें नहीं सुनी.'

News18Hindi
Updated: February 17, 2019, 11:36 PM IST
फारूक अब्दुल्ला बोले- जब तक कश्मीर मसला नहीं सुलझ जाता, पुलवामा जैसे अटैक होते रहेंगे
फारूक अब्दुल्ला
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Updated: February 17, 2019, 11:36 PM IST
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पुलवामा हमले और पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवाद पर खुलकर बात की है. उनका कहना है कि पुलवामा जैसे हमले तब तक होते रहेंगे, जब तक कश्मीर का मसला सुलझ नहीं जाता. अब्दुल्ला स्थानीय कश्मीरियों को संबोधित कर रहे थे.

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ फारूक अब्दुला ने कहा, 'घाटी में राज्यपाल शासन लगते ही आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को शह मिल गया. राज्यपाल शासन में अगर पत्थरबाजी रुक गई, तो क्या जैश-ए-मोहम्मद बढ़ गया. क्या वो (जैश-ए-मोहम्मद) बेहतर था या पत्थरबाज बेहतर थे.' पुलवामा हमले के बाद घाटी में बढ़ते तनाव पर अब्दुल्ला ने कहा कि सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में किसी भी कश्मीरी का हाथ नहीं है.



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हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'मैं इस मीटिंग में मौजूद था. मीटिंग में मैंने साफ कहा था कि ये हमारी गलती नहीं है कि हमला हुआ. ये सरकार की गलती है कि उसने वक्त रहते कश्मीरियों की आवाज और मांगें नहीं सुनी.'

अब्दुल्ला ने कहा, 'आप हमारे बच्चों को टारगेट कर रहे हैं और हमारी परेशानियां बढ़ा रहे हैं. हम पहले से ही कई मुसीबतों से घिरे हुए हैं, पुलवामा में जो भी हुआ, उसके लिए हमें (कश्मीरियों को) जिम्मेदार न ठहराइए. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. हम तो अपनी परेशानियों में ही उलझे हुए हैं.'


जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा, 'पुलवामा जैसे हमले होते रहेंगे और तब तक बंद नहीं होंगे, जब तक कि कश्मीर मसले को राजनीतिक रूप से नहीं सुलझा लिया जाता. मैं फिर कहता हूं कि इस हमले में कश्मीरियों का कोई हाथ नहीं हैं. न ही हमलोग आतंकवाद के साथ हैं. हम आत्म सम्मान और स्वाभिमान के साथ रहना जीना चाहते हैं. ईमानदारी और सम्मानपूर्वक दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं और कोई विवाद नहीं चाहते हैं.'
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