पुणे: साधु वासवानी मिशन के दादा वासवानी का निधन

jp vaswani

दादा वासवानी को शाकाहार और पशु अाहार को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है. इसके अलावा गैर सांप्रदायिक आध्‍यात्मिक गुरु के रूप में भी वह विश्‍व भर में विख्‍यात थे.

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संत और शाकाहार का प्रचार-प्रसार करने वाले आध्यात्मिक गुरू दादा जे.पी. वासवानी का 99 साल की उम्र में निधन हो गया. साधु वासवानी मिशन के आध्यात्मिक प्रमुख जे.पी. वासवानी अगले महीने ही 100 वर्ष पूरे करने वाले थे. उन्होंने 150 किताबें भी लिखी थीं.

हैदराबाद में दो अगस्त 1918 को जन्मे दादा वासवानी के गुरु साधु टी एल वासवानी थे. वो अभी  द्वारा पुणे में स्थापित साधु वासवानी मिशन में वर्तमान आध्यात्मिक प्रमुख थे. साधु वासवानी मिशन एन नॉन-प्रॉफिट संस्था है जिसकी दुनिया भर में इसकी शाखाएं हैं. दादा वासवानी का मानना था कि जीवन में परेशानियों का मूल कारण इच्छाएं हैं. हमें प्रभु की रजा में राजी रहना चाहिए, नम्रता धारण कर मानव सेवा करना चाहिए.

दादा के संपर्क में आने वाले प्रत्येक शख्स को उनके प्रेम, संतोष और विनम्रता की शक्ति का अनुभव होता था. वो हमेशा कहते कि हम दूसरों को जितना दे सकते हैं उतना हमें देना चाहिए. जितनी मदद कर सकते है उतनी मदद करनी चाहिए. दादा के इन्हीं विचारों से गरीब और पीड़ितों की मदद के लिए बड़ी संख्या में लोग सामने आए, जिनसे उनकी जिंदगी में सुखद बदलाव आए. उन्होंने दूसरों के लिए अपना सबकुछ समर्पित करने में जिंदगी गुजार दी.

उन्होंने सेल्फ हेल्प पर 150 किताबें लिखी थीं. उनकी सभी किताबें बेहद सरल शब्दों में लिखी गई हैं. उनमें किसी भी समस्या के निदान की बेहद आसान शब्दों में व्याख्या की गई हैं. किताबों को ऐसे लिखा गया था कि इसे पढ़ने वाले खुद की किसी समस्या का खुद ही समाधान कर सकें. उन्होंने शिकागो में विश्व धर्म संसद और न्यूयॉर्क में विश्व शांति परिषद के सम्मेलनों में भी शिरकत की थीं.

दो अगस्त 1918 को जन्मे दादा वासवानी के जिंदगी में 100वें वर्ष में प्रवेश करने पर पिछले साल दो अगस्त को शताब्दी समारोह शुरू हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर में इन कार्यक्रमों की शुरुआत की थी. दादा वासवानी को उनके जन्मदिन के मौके पर शुभकामना देते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि उनके आशीर्वाद से नए भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.

पीएम मोदी भी बड़े प्रशसंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उनसे जुड़े निजी संस्मकरणों को शेयर किया था. मोदी ने कहा था, '27 वर्ष पूर्व एक कार्यक्रम में दादा से मिलने और वक्त गुजारने का मौका मिला था. उस वक्त अच्दे समाज और देश के भविष्य को लेकर उनसे चर्चा हुई थी. उनसे सीखने के लायक बात यह है कि दूसरों के लिए जितना अच्छा किया जा सकता है उतना किया जाना चाहिए.'