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सिर्फ 3 साल में ही किसी राज्य को कैसे हारें...कांग्रेस ने बताया! पढ़िए, पंजाब में कांग्रेस की हार की कहानी, 5-प्वाइंट में

पंजाब में कांग्रेस की सरकार लगातार हिचकोले खाती रही... वजह अंदरूनी राजनीति. फाइल फोटो

पंजाब में कांग्रेस की सरकार लगातार हिचकोले खाती रही... वजह अंदरूनी राजनीति. फाइल फोटो

Punjab Assembly Elections 2022 : बेअदबी, फरीदकोट गोलीबारी और नशे के कारोबार को रोकने जैसे मामलों में कार्रवाई न करने का मसला पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने बुलंद किया. उन्होंने लगातार इन मसलों पर कैप्टन अमरिंदर को घेरा. कांग्रेस नेतृत्व पर भी दबाव बनाया. नतीजे में कांग्रेस नेतृत्व ने आखिरकार अमरिंदर को हटाने का फैसला किया. लेकिन उनकी जगह आपसी गुटबाजी थामने की गरज से सही, पंजाब की कमान सौंपी चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को. वह भी चुनाव से 5 महीने पहले.

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नई दिल्ली. ज्यादा पुरानी नहीं, 2019 की ही बात है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की लहर पर सवार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections) में बड़ी जीत हासिल की थी. पर इस लहर में भी पंजाब का किला कांग्रेस (Punjab Congress) ने जीता था. वहां तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) के नेतृत्व में कांग्रेस ने 13 में से 8 लोकसभा सीटें जीती थीं. लेकिन वही कांग्रेस 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections-2022) में 20 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई. यही नहीं, मुख्यमंत्री पद के उसके प्रत्याशी चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) अपनी दोनों सीटें- चमकौर साहिब और भदौड़ से हार गए. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Punjab Congress President Navjot Singh Siddhu) भी अमृतसर-पूर्व सीट पर चित हो गए. फिर अन्य नेताओं की तो बात ही क्या. कांग्रेस का मत-प्रतिशत भी सिकुड़कर 23% पर पहुंच गया. इसीलिए सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी गलतियां हुईं, जिनसे 3 साल के भीतर ही कांग्रेस को पंजाब में ऐसी हालत का सामना करना पड़ा? इसे 5-प्वाइंट में समझते हैं.

अपने वादे और शपथ पूरी नहीं की कांग्रेस ने
पंजाब में कांग्रेस की शिकस्त से जुड़े सवालों का पहला जवाब 2017 के विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly Elections-2017) से निकलता है. उस वक्त कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव में कांग्रेस की अगुआई कर रहे थे. उस वक्त उन्होंने गुटका-साहिब (सिखों की पवित्र पुस्तक) पर हाथ रखकर शपथ ली थी कि राज्य में उनकी सरकार बनी तो वे नशे के कारोबार को जड़ से खत्म कर देंगे. साथ ही वादा किया था कि 2015 में गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी और फरीदकोट गोलीबारी मामले में न्याय दिलाएंगे. लोगों ने कैप्टन के इस वादे और शपथ पर भरोसा किया. लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद कैप्टन ने ऐसा कुछ नहीं किया. उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) बनाया, लेकिन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे भंग कर दिया, उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए. इसके बाद जब कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को मुख्यमंत्री का पद सौंपा तो वे भी इन मामलों में कुछ खास नहीं कर सके.  

 

मुख्यमंत्री बदलने में देर की, अनजान चेहरे को कमान सौंपी

Tags: Assembly Election Results 2022, Congress, Hindi news, Punjab Assembly Election Result

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