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सुलगता पंजाब! कहीं आतंकवाद को फिर जिंदा करने की साजिश तो नहीं?

मुकेश तिवारी | News18India.com
Updated: October 21, 2015, 3:49 PM IST
सुलगता पंजाब! कहीं आतंकवाद को फिर जिंदा करने की साजिश तो नहीं?
देश के उत्तर पश्चिम में स्थित पंजाब राज्य बीते एक हफ्ते से जल रहा है। हड़ताल, प्रदर्शन, नारेबाजी, चक्काजाम... कृषि में अग्रणी इस राज्य की कहानी बन चुके हैं।

देश के उत्तर पश्चिम में स्थित पंजाब राज्य बीते एक हफ्ते से जल रहा है। हड़ताल, प्रदर्शन, नारेबाजी, चक्काजाम... कृषि में अग्रणी इस राज्य की कहानी बन चुके हैं।

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नई दिल्ली। देश के उत्तर पश्चिम में स्थित पंजाब राज्य बीते एक हफ्ते से जल रहा है। हड़ताल, प्रदर्शन, नारेबाजी, चक्काजाम... कृषि में अग्रणी इस राज्य की कहानी बन चुके हैं। आखिर क्या वजह है कि देश के एक संपन्न राज्य में सिखों का गुस्सा भड़का हुआ है? आइए एक नजर डालते हैं इससे जुड़े अहम बिंदुओं पर...

ऐसा क्यों ?

विरोध की यह चिंगारी बरगारी गांव में 12 अक्टूबर को हुई घटना के बाद उठी। फरीदकोट जिले में कोट कपूरा के पास के इस गांव में 12 अक्टूबर को गुरुद्वारे के पास के इलाके में पवित्र पुस्तक 'बीर' के 100 से अधिक पन्ने फटे और बिखरे हुए पाए गए थे। जून में गुरुद्वारे से इस पुस्तक की चोरी की गई थी।



पवित्र पुस्तक के साथ इस बेअदबी ने सिखों को गुस्से से भर दिया। बुधवार को सबसे पहले पड़ोस के गांव बेहबल कला में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई।



इधर, सिखों का गुस्सा बढ़ता दिखाई दिया। उधर, फरीदकोट के कोटकपूरा में पुलिस ने भीड़ पर फायरिंग कर दी। इस हवाई फायरिंग में दो सिख संगतों की मौत हो गई जबकि दर्जनों घायल हो गए।

इस मौत ने सिख समुदाय के गुस्से की आग को और भड़का दिया। इसके बाद हाईवे-पुलों को जाम करने, दुकाने बंद कराने का सिलसिला चल पड़ा। प्रदर्शनकारी पवित्र पुस्तक की बेअदबी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियो ने कहा कि वह अगले एक हफ्ते तक हर दिन तीन घंटे की नाकेबंदी करते रहेंगे।

क्या सभी प्रदर्शन एक ही घटना को लेकर हैं?

नहीं, इससे पिछले हफ्ते में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अपवित्र करने की पांच रिपोर्ट्स आई थीं। पवित्र धार्मिक ग्रंथ की फटी हुए पन्ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पाए गए थे। ऐसा जालंधर के जंडियाला गांव में, लुधियाना में, अमृतसर के पास तरन तारन में, कोट कपूरा में और बठिंडा के पास गुरुसर जलाल गांव में हुआ था।

श्री गुरु ग्रंथ के साथ हुई बेअदबी मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने खुलासा किया कि विदेश में बैठी पंजाब विरोधी ताकतें धार्मिक भावना भड़का कर माहौल खराब करने की साजिश रच रही है। पाकिस्तान के साथ लगे राज्य से ऐसी खबरें हैरान कर देने वाली थीं।

इस मामले में दर्जनों लोगों से पूछताछ की गई है जबकि कम से कम 2 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस ने बताया कि 19 अक्टूबर को ऐहतियात के तौर पर 52 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने ये रिकार्डिंग सार्वजिनक की है जिसमें फरीदकोट से पकड़े गए दोनो भाईयो जसविंदर और रूपिंदर की आवाज है। 14-15 की इस रिकॉर्डिंग में एक में रुपिन्दर की आवाज है जो एक अनजान शख्स से बात कर रहा है। पुलिस के मुताबिक ये ऑस्ट्रेलिया से कॉल है जिसमें शख्स रूपिन्दर से पैसों के लेन-देन की बात कर रहा है।।

प्रदर्शनकारी हैं कौन?

बीते हफ्ते से हो रहे इन प्रदर्शनों ने आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर दिया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि सैंकड़ों की संख्या में ज्यादातर प्रदर्शनकारी असंगठित संगठनों से हैं जबकि कुछ उग्र सिख संगठनों (दमदमी तकसाल और अजनाला गुट) से भी हैं।

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि ग्रंथ को अपवित्र करने के आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और पुलिस फायरिंग में मारे गए दो लोगों के परिजनों को उचित राहतराशि दी जाए।

राज्य के कई हिस्सों में, आम सिखों द्वारा भी कई प्रदर्शन किए जा रहे हैं जिसे लेकर वह साढ़े आठ साल की अकाली-बीजेपी सरकार पर हमला कर रहे हैं।

राज्य के कुछ जिलों में, वह किसान भी प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं जिन्होंने इस महीने के शुरुआत में सरकार को किसान विरोधी बताते हुए आंदोलन किया था। किसानों ने राज्य की ट्रेनों को रोककर सरकार के लिए मुसीबत पैदा कर दी थी।

ग्रंथ अपवित्र करने के पीछे कौन?

हालांकि कुछ सिख संगठन और प्रदर्शनकारी एक खास धार्मिक गुट को इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं लेकिन प्रशासन का कहना है कि वह पुष्टि नहीं कर सकते कि इसके पीछे कौन है?

पवित्र पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब के अनादर की वजह से पंजाब में व्याप्त तनाव के बीच मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि वह ‘कुछ ऐसी शक्तिशाली ताकतों द्वारा की जा रही गहरी साजिश को’ देख रहे हैं जिनकी कोशिश राज्य में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने की है।

बादल ने कहा, 'राज्य की दुश्मन कुछ ताकतें पंजाब में बेहद मेहनत से हासिल की गई शांति को नेस्तनाबूद करने पर तुली हुई हैं।' उन्होंने कहा, '(पवित्र ग्रंथ के) अपमान का घृणित काम करने वालों को कानून के शिकंजे तक लाने के लिए राज्य सरकार हर संभव उपाय कर रही है। गुरु ग्रंथ साहिब के अनादर से हर सिख की आत्मा आहत हुई है, लेकिन संकट के इस समय में हमें धैर्य से काम लेना होगा और राज्य को विकास और प्रगति के पथ से हटाने के विघटनकारी ताकतों के मंसूबों को नाकाम करना होगा।'

क्या हुआ नुकसान?

पंजाब में सिखों के धार्मिक ग्रंथ गुरू ग्रंथ साहिब जी के पन्नों को फाड़ने की घटनाओं से बिगड़ते माहौल को देख कर पंजाब सरकार ने 14 से 28 नवंबर को होने वाले वर्ल्ड कबड्डी चैंपियंनशिप को रद्द करने का ऐलान किया है।

पहले किसान का आंदोलन और फिर धार्मिक ग्रंथ अपवित्र किए जाने का मामला... पिछले एक माह से लगातार हो रहे प्रदर्शनों से राज्य को 18 अक्टूबर तक ही 1325 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका था। सबसे ज्यादा नुकसान व्यापारी वर्ग को उठाना पड़ा।

वहीं, रेलवे और रोडवेज ने भी करोड़ों का नुकसान झेला। 17 दिन किसानों ने सड़क जाम रखी तो 7 दिन रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। डेरा प्रेमी भी तीन दिन तक रेल ट्रैक पर डटे रहे।

क्या कर रहा है प्रशासन?

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। अकाल तख्त, विपक्षी कांग्रेस और सिख गुरुओं ने सभी से शांति की अपील की है।

राज्य में प्रदर्शन शांत होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की चुनौती बनी हुई है क्योंकि यह पहले भी आतंकवाद से पीड़ित रहा है।

हालांकि, पंजाब में दो दशक तक शांति रही है लेकिन 1980 और 1990 में स्वतंत्र राष्ट्र की मांग पर राज्य में विद्रोह उबाल पर आ चुका है।

1984 में, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना की कार्रवाई में कई सिखों की मौत हुई थी। खालिस्तान की मांग कर रहे भिंडरावाले की मौत भी इसी कार्रवाई में हुई थी।

इसके बदले में, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सिख सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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First published: October 21, 2015, 11:34 AM IST
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