अपना शहर चुनें

States

पंजाब में भी केंद्र जैसा कृषि कानून लाने के पक्ष में थे विशेषज्ञ, CM अमरिंदर ने ठुकरा दी थी सिफारिश- रिपोर्ट

मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने खारिज की थी सिफारिश. (File Pic)
मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने खारिज की थी सिफारिश. (File Pic)

Farm Laws: लोकसभा में तीनों कृषि कानूनों को पारित किए जाने से 45 दिन पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) की ओर से गठित किए गए विशेषज्ञों के समूह ने कृषि क्षेत्र के लिए कई सिफारिशें की थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2021, 3:01 PM IST
  • Share this:
चंडीगढ़. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) का विरोध पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी समेत अन्‍य जगह के किसान लगातार कर रहे हैं. इस बीच पंजाब (Punjab) में कृषि कानूनों को लेकर नई जानकारी सामने आई है. इसके अनुसार लोकसभा में तीनों कृषि कानूनों को पारित किए जाने से 45 दिन पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) की ओर से गठित किए गए विशेषज्ञों के समूह ने कृषि क्षेत्र के लिए कई सिफारिशें की थीं, जिसमें केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों जैसे ही प्रावधानों की सिफारिश थी.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिफारिशें पिछले साल अगस्त में कोविड 19 महामारी के बाद पंजाब की स्थिति को फिर से ठीक करने के लिए बनी रणनीति पर तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट का हिस्सा थीं. हालांकि मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने इन सिफारिशों को पेश होने के कुछ दिनों बाद ही खार‍िज कर दिया था. इस समूह की अध्‍यक्षता योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया कर रहे थे. कृषि पर विशेषज्ञों के उप-समूह में अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी भी शामिल थे. जो कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य भी हैं.





समूह की ओर से दी गई रिपोर्ट का शीर्षक 'ट्रांसफॉर्मिंग पंजाब एग्रीकल्‍चर' था. इसमें मार्केटिंग सुधारों और एपीएमसी के अलावा कृषि मार्केटिंग को खोलने संबंधी सुझाव दिया गया था. रिपोर्ट में कहा गया, 'पंजाब सरकार ने पंजाब APMC अधिनियम में संशोधन के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन नियमों और विनियमों में अभी भी उच्च लाइसेंस शुल्क के संदर्भ में बहुत अधिक प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं, लाइसेंस की वैधता की अवधि का अनिश्चितकाल और लाइसेंसिंग प्राधिकारी के रूप में मंडी बोर्ड का होना भी शामिल है. इसमें हितों का संभावित टकराव भी शामिल है.'
विशेषज्ञों के समूह ने यह प्रस्‍ताव भी रखा कि पंजाब सरकार को प्रावधानों को लेकर अन्‍य राज्‍यों से तुलनात्‍मक आकलन भी करना चाहिए. अगर हरियाणा और उत्तर प्रदेश अधिक उदार व्यवस्था की ओर बढ़ते हैं, तो पंजाब प्रोसेसर, निर्यातकों, संगठित खुदरा विक्रेताओं द्वारा संभावित निवेश खोने का जोखिम उठाएगा. इससे रोजगार और कर राजस्व का नुकसान भी होता है.' रिपोर्ट में आगे कहा गया, 'इसलिए राज्य सरकार को जल्दी से नियमों को लागू करना चाहिए और बाजार शुल्क, कमीशन शुल्क, लाइसेंसिंग आदि से संबंधित संशोधनों को अधिसूचित करना चाहिए, जो पंजाब को अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धी बनाते हैं.'

वहीं राज्‍य के एक सरकारी प्रवक्‍ता ने इस मामले में ट्वीट किया और कहा, 'कृषि क्षेत्र में मोंटेक समिति की प्रारंभिक सिफारिशों को अस्वीकार करके मैंने अपना और सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है. जो कुछ भी किसानों के हित में नहीं है या जिससे उनके बोझ में कमी नहीं होगी, वह पंजाब में तब तक लागू नहीं होगा जब तक मैं वहां हूं.'

एक अन्य ट्वीट में कहा गया, 'मोंटेक समिति एक विशेषज्ञ समूह है, जिसका कार्य सिफारिशें करना है. लेकिन उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करना मेरी सरकार का काम है. मुझे जमीनी हकीकत पता है और मुझे पता है कि मेरे किसानों के लिए क्या अच्छा है. मैं किसी भी कीमत पर उनके हितों से समझौता नहीं होने दूंगा.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज