पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह बोले- अगर चीन से जंग हुई तो पाकिस्तान से भी करना होगा युद्ध

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह बोले- अगर चीन से जंग हुई तो पाकिस्तान से भी करना होगा युद्ध
अमरिंदर सिंह

India-China Standoff: कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, 'मेरी बातों को याद रखिएगा, अगर चीन के साथ जंग हुई तो इसमें पाकिस्तान भी शामिल हो जाएगा. चीन के सैनिक कोई पहली बार गलवान नहीं आए हैं. साल 1962 में भी वे यहां आए थे. लेकिन सच्चाई ये है कि उस वक्त हम अभी के मुकाबले काफी ज्यादा अच्छे हालात में थे.'

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  • Last Updated: August 27, 2020, 7:22 AM IST
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नई दिल्ली. लद्दाख की गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुए हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच गतिरोध बरकरार है. इस घटना को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन अभी तक दोनों देशों के बीच बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है. इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह (Punjab Cm Captain Amarinder Singh) ने कहा है कि अगर भारत और चीन के बीच जंग के हालात बनते हैं तो फिर ऐसे में पाकिस्तान (Pakistan) भी इसमें शामिल हो जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि 1962 के युद्ध में जिस तरह से चीन को करारा जवाब मिला था वैसा ही अभी मिलना चाहिए.

'करारा जवाब मिलेगा'
इंडियन एक्सप्रेस से खास बातचीत करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, 'मेरी बातों को याद रखिएगा, अगर चीन के साथ जंग हुई तो इसमें पाकिस्तान भी शामिल हो जाएगा. चीन के सैनिक कोई पहली बार गलवान नहीं आए हैं. साल 1962 में भी वे यहां आए थे. लेकिन सच्चाई ये है कि उस वक्त हम अभी के मुकाबले काफी ज्यादा अच्छे हालात में थे. इस वक्त वहां हमारी सेना की 10 ब्रिगेड वहां तैनात हैं. चीन बड़ा ही बेवकूफ होगा अगर वो ये सोचता है कि हम पर वो चढ़ाई कर देगा. 1967 में खूनी झड़प हुई थी. फिर से ऐसा ही होगा.'

आखिर कब तक...
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ये भी कहा कि चीन तिब्बत के पठार से हिंद महासागर तक, इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत को अपनी सेना को मजबूत करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'चीन हिमाचल प्रदेश के इलाके की मांग कर रहा है. वो सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की डिमांड कर रहा है. आप इसे सेना के दम पर ही रोक सकते हैं. अगर हम मजबूत रहेंगे तो सामने वाले को तीन गुना सोचना होगा.'



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गंभीर हैं हालात
बता दें कि दो दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकरने कहा था कि चीन के साथ सीमा विवाद का समाधान सभी समझौतों और सहमतियों का सम्मान करते हुए निकाला जाना चाहिए. जयशंकर ने लद्दाख की स्थिति को 1962 के संघर्ष के बाद ‘सबसे गंभीर’ बताया और कहा कि दोनों पक्षों की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अभी तैनात सुरक्षा बलों की संख्या भी ‘अभूतपूर्व’ है.
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