केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ पंजाब ने विधेयक पास तो किए लेकिन वैधानिकता कितनी?

पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के विधेयकों के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है. (फाइल फोटो)
पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के विधेयकों के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है. (फाइल फोटो)

ये चार विधेयक (Four Bills) पांच घंटे से अधिक समय की चर्चा के बाद पारित किये गए जिसमें बीजेपी के विधायकों (BJP MLA) ने हिस्सा नहीं लिया. विपक्षी शिरोमणि अकाली दल, आप और लोक इंसाफ के विधायकों ने विधेयकों का समर्थन किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 6:59 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा (Punjab Legislative Assembly) ने मंगलवार को चार विधेयक (Four Bills) सर्वसम्मति से पारित करने के साथ ही केंद्र के कृषि संबंधी कानूनों के खिलाफ एक प्रस्ताव (Resolution) भी पारित किया. ये विधेयक पांच घंटे से अधिक समय की चर्चा के बाद पारित किये गए जिसमें बीजेपी के विधायकों ने हिस्सा नहीं लिया. बीजेपी के विधानसभा में दो विधायक हैं. विपक्षी शिरोमणि अकाली दल, आप और लोक इंसाफ के विधायकों ने विधेयकों का समर्थन किया.

फंस सकता है कानूनी पेच
पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के विधेयकों के खिलाफ प्रस्ताव के लिए आर्टिकल 254 (2) का सहारा लिया है. लेकिन आर्टिकल 254 (2) के इतिहास की समीक्षा करने पर पता चलता है कि इसके जरिए केंद्रीय कानून को किनारे करने का स्कोप बहुत कम है. एक और ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आर्टिकल 254 (2) तहत बनाए गए किसी भी कानून को राष्ट्रपति से अनुमति की आवश्यकता होती है. हालांकि अनुमति न मिलने की स्थिति में सरकार कोर्ट का रास्ता भी अख्तियार कर सकती है. क्योंकि संविधान के अनुसार कृषि संबंधी मामलों को विधानसभा के अधिकारों में शामिल किया गया है. इसके अलावा भी मामले में कई पेच हैं.

पंजाब सरकार ने किया है सजा का प्रावधान
राज्य सरकार के इन विधेयकों में किसी कृषि समझौते के तहत गेहूं या धान की बिक्री या खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर करने सजा और जुर्माने का प्रावधान करता है. इसमें कम से तीन वर्ष की कैद का प्रावधान है. इन प्रावधानों के तहत किसानों को 2.5 एकड़ तक की जमीन की कुर्की से छूट दी गयी है और कृषि उपज की जमाखोरी और कालाबाजारी की रोकथाम के उपाय किए गये हैं.



इससे पहले, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सभी दलों से आग्रह किया था कि वे विधानसभा में उनकी सरकार के ‘ऐतिहासिक विधेयकों’ को सर्वसम्मति से पारित करें.

(उत्कर्ष आनंद की स्टोरी से इनपुट्स के साथ. पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है.)
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