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punjab due to the victory of simranjit singh mann the cult politics got out of the hands of the badals

पंजाब: सिमरनजीत मान की जीत ने खोले पंथिक सियासत के नए रास्ते, घट सकता है बादल का असर

सिमरनजीत मान की जीत से पंथिक सियासत में  घट सकता है बादल का असर (फाइल फोटो)

सिमरनजीत मान की जीत से पंथिक सियासत में घट सकता है बादल का असर (फाइल फोटो)

शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने 2015 में फरीदकोट जिले के बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद सिख मुद्दों पर अपना नियंत्रण खोना शुरू कर दिया था. जब बहबल कलां में पुलिस फायरिंग में दो सिखों की मौत हो गई थी.

(एस. सिंह)

चंडीगढ़. संगरूर लोकसभा उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के सुप्रीमो सिमरनजीत सिंह मान की जीत ने पंथिक राजनीति में नए रास्ते खोल दिए है. उनकी जीत से पंजाब के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं और  पंथिक राजनीति में एकाधिकार रखने वाले शिरोमणि अकाली दल (बादल) के लिए यह जीत एक बड़ी चुनौती बन गई है. जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव हारने के बाद शिअद (बादल) को पहले ही अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की चुनौती थी, लेकिन सिमरनजीत सिंह मान की जीत के बाद अब उसके लिए अपना कैडर बचाना मुश्किल हो जाएगा.

कथित तौर पर शिअद (बादल) द्वारा संचालित एसजीपीसी ने दमदमी टकसाल को 2013 में हरमंदिर साहिब परिसर के अंदर ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए एक स्मारक, गुरुद्वारा यादगर शहीदन बनाने की अनुमति दी थी. जो पंथिक राजनीति से जुड़ा हुआ मसला था. शिअद (बादल) ने 2015 में फरीदकोट जिले के बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद सिख मुद्दों पर अपना नियंत्रण खोना शुरू कर दिया था. जब बहबल कलां में पुलिस फायरिंग में दो सिखों की मौत हो गई थी. डेरा सच्चा सौदा के साथ शिअद की सांठगांठ के आरोपों ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया. शिअद-भाजपा गठबंधन के दौरान भी सिख मामलों में आरएसएस के हस्तक्षेप के आरोप लगे थे.

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सरबत खालसा के बाद कमजोर हुई शिअद (बादल)
नवंबर 2015 में शिअद (ए) सहित बादल विरोधी सिख निकायों और पार्टियों द्वारा आयोजित सरबत खालसा विशाल सभा पंथिक राजनीति पर शिअद (बादल) के एकाधिकार पर पहला हमला था और तब से पार्टी संघर्ष कर रही है. जबकि शिअद ने खालिस्तानियों पर परेशानी पैदा करने का आरोप लगाया और उसकी सरकार ने सिमरनजीत मान सहित सरबत खालसा के आयोजकों पर देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया. यहां तक कि जब 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में आई, तब भी वह बेअदबी और पुलिस फायरिंग के मामलों में न्याय दिलाने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही थी.

Tags: Punjab, Shiromani Akali Dal

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