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Punjab Election 2022: पंजाब में चुनावी कैंपेन के लिए PM ने फिरोजपुर को ही क्यों चुना? जानें इसका सियासी इतिहास

Punjab Election 2022: पंजाब में चुनावी कैंपेन के लिए PM ने फिरोजपुर को ही क्यों चुना? जानें इसका सियासी इतिहास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister, Narendra Modi) बुधवार, 5 जनवरी को फिरोजपुर से पंजाब चुनाव (Punjab Election) के लिए प्रचार अभियान शुरू करने वाले हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister, Narendra Modi) बुधवार, 5 जनवरी को फिरोजपुर से पंजाब चुनाव (Punjab Election) के लिए प्रचार अभियान शुरू करने वाले हैं.

Punjab Election 2022: यहां 1952 का पहला लोकसभा चुनाव ही शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बहादुरलाल सिंह ने जीता था. तब से अब तक हुए 18 लोकसभा चुनावों में से 8 बार यहां से शिरोमणि अकाली दल ने ही जीत हासिल की है. पिछला 2019 का चुनाव इसी पार्टी सुखबीर सिंह बादल ने जीता था. ऐसा नहीं है कि कांग्रेस बिल्कुल भी नहीं जीती. चार चुनाव (1957, 1962, 1980, 1984) उसने जीते. लेकिन बढ़त गैरकांग्रेसियों को ही यहां ज्यादा रही. इनमें दो बार (1992, 1996 में) बहुजन समाज पार्टी और एक बार निर्दलीय (1989) को भी जीत हासिल हो चुकी है.

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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) बुधवार, 5 जनवरी को फिरोजपुर (Firozpur) से पंजाब चुनाव (Punjab Election) के लिए प्रचार अभियान शुरू करने वाले हैं. हालांकि दौरा सरकारी है और इसमें उन्हें 42,750 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, लोकार्पण करना है. इसमें दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेस वे (Delhi-Amritsar-Katra ExpressWay) का शिलान्यास भी शामिल है. लेकिन जाहिर तौर पर नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के दौरे के मंतव्य चुनावी हैं. और फिरोजपुर (Firozpur) से इस चुनावी अभियान की शुरुआत के पीछे भी खास वजह है. एक नजर डालते हैं, इस पर…

    फिरोजपुर : शहीदों की धरती….
    अभिनेता अक्षय कुमार की ‘केसरी’ (Kesari) फिल्म जब से लोगों ने देखी तो लोग इतिहास के एक अनछुए, कमछुए पहलू से वाकिफ हुए. उन्हें पता चला कि अंग्रेजी सेना और हजारों की अफगान कबीलाई फौज के बीच किस तरह 21 सिख सैनिकों ने अपनी आखिरी सांस तक सारागढ़ी (Saragarhi) जैसे अहम सामरिक ठिकाने की रक्षा की थी, लेकिन यह अब भी शायद कम लोग जानते होंगे कि सारागढ़ी की लड़ाई के 21 बहादुर सिखों का स्मारक दरअसल, फिरोजपुर में है. वर्तमान की बात करें तो भारत-पाकिस्तान पर सारागढ़ी के जैसा ही सामरिक तौर पर अहम सीमाई इलाका ‘हुसैनीवाला’ (Hussainiwala) भी फिरोजपुर (Firozpur) में ही है.

    अमृतसर के नजदीक वाघा बॉर्डर की तरह भारत और पाकिस्तान के झंडे चढ़ाने-उतारने का देखने लायक समारोह रोज यहां भी होता है. हुसैनीवाला (Hussainiwala Border) बॉर्डर का इलाका है. इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के स्मारक फिरोजपुर में हैं. इस जगह को राष्ट्रीय शहीद स्मारक (The National Martyrs Memorial) कहते हैं. साथ ही, प्राकृतिक स्थल में घूमने के शौकीनों के लिए हरिके वन्यजीव अभयारण्य (Harike WildLife Sanctuary) चक सरकार (Chak Sarkar) के जंगल भी हैं.

    …जो कांग्रेस को बहुत फली नहीं
    अब आ जाते हैं, फिरोजपुर के राजनीतिक इतिहास (Political History of Firozpur) और वर्तमान पर, जो बताता है कि शहीदों की धरती (Land of Martyrs) कांग्रेस को अब तक ज्यादा फली नहीं. यहां 1952 का पहला लोकसभा चुनाव ही शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बहादुरलाल सिंह ने जीता था. तब से अब तक हुए 18 लोकसभा चुनावों में से 8 बार यहां से शिरोमणि अकाली दल ने ही जीत हासिल की है. पिछला 2019 का चुनाव इसी पार्टी के सुखबीर सिंह बादल ने जीता था. ऐसा नहीं है कि कांग्रेस बिल्कुल भी नहीं जीती. चार चुनाव (1957, 1962, 1980, 1984) उसने जीते. लेकिन बढ़त गैरकांग्रेसियों को ही यहां ज्यादा रही. इनमें दो बार (1992, 1996 में) बहुजन समाज पार्टी और एक बार निर्दलीय (1989) को भी जीत हासिल हो चुकी है.

    अब वर्तमान के समीकरण देखिए
    फिरोजपुर (Firozpur) से मौजूदा सांसद सुखबीर सिंह बादल केंद्रीय कृषि कानूनों के मसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ ढाई दशक से ज्यादा पुराना गठबंधन तोड़ चुके हैं. वहीं, शिरोमणि अकाली दल (SAD) से सुखदेव सिंह ढींढसा का गुट सुखबीर बादल का साथ छोड़ चुका है. यह गुट पंजाब में (Punjab Election) भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है. जाहिर है, सुखबीर को पटखनी देने के लिए ही भाजपा के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में पुराने कांग्रेसी और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) भी हैं.

    कैप्टन राज्य में कांग्रेस के खेवैया बने नवजोत सिंह सिद्धू (Naavjot Singh Siddhu) को सबक सिखाना चाहते हैं. इसलिए वे सिद्धू के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान (Pakistan’s Prime Minister Imaran Khan) के साथ दोस्ताना संबंधों का मसला जोर-शोर से बार-बार उठा रहे हैं.

    इतिहास और वर्तमान की इस पृष्ठभूमि में आम आदमी पार्टी (AAP) भी यहां से अपनी संभावनाएं देख सकती है. जो बेमानी भी नहीं हैं, क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Election-2019) में फिरोजपुर (Firozpur) में ‘आप’ के प्रत्याशी हरजिंदर सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे.

    Tags: Narendra modi, Punjab Election 2022

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