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पंजाब ने सरकारी कर्मचारियों के डोप टेस्ट के लिए कसी कमर, नया प्रोफॉर्मा तैयार

पंजाब ने सरकारी कर्मचारियों के डोप टेस्ट के लिए कसी कमर, नया प्रोफॉर्मा तैयार

पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)

पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)

इसका मकसद है कि डोप टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए कर्मचारियों को काउंसलिंग और इलाज के लिए भेजा जाए. पॉज़िटिव पाए जाने वाले कर्मचरियों के टेस्ट के नतीजे भी गुप्त रखे जाएंगे.

    अनुराधा शुक्ला

    तमाम अटकलों को किनारे करते हुए, पंजाब सरकार ने पुलिसकर्मियों समेत सभी सरकारी कर्मचारियों के डोप टेस्ट की तैयारी में कमर कस ली है. स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों के डोप टेस्ट के लिए विधिवत एक प्रोफॉर्मा भी बनवा लिया. बस इस पर औपचारिक मुहर लगाई जानी बाकी है.

    बताया जा रहा है कि इसका मकसद है कि डोप टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए कर्मचारियों को काउंसलिंग और इलाज के लिए भेजा जाए. पॉज़िटिव पाए जाने वाले कर्मचरियों के टेस्ट के नतीजे भी गुप्त रखे जाएंगे.

    सरकारी विभाग सिविल सर्जन और मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिन्टेन्डेन्ट को अपने कर्मचारियों को भेजेंगे जिसके बाद उनका डोप टेस्ट करवाने के लिए समय और तारीख दी जाएगी.

    मेडिकल ऑफिसर कर्मचारी की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर इस बात का फैसला करेगा कि वे डोप टेस्ट के लिए तैयार है या नहीं. अगर ऐसा नहीं पाया गया तो उसे वापस भेज दिए जाएगा. दोबारा उसे एक सप्ताह या मेडिकल अफसर की ओर से दी गई तारीख पर आना होगा. इस टेस्ट के लिए 1,500 रुपये बतौर फीस ली जाएगी.

    ड्रग्स टेस्ट में अगर नतीजे नेगेटिव पाए गए तो उसे अगले ही दिन उनके दफ्तर में भेज दिया जाएगा. लेकिन अगर टेस्ट में पॉज़िटिव पाया जाता है तो फिर से उसे कन्फर्म करने के लिए CFSL लेबोरटरी या PGI चंडीगढ़ भेजा जाएगा.

    टेस्ट में पॉज़िटिव पाए जाने वाले कर्मचारियों पर नरम रुख अपनाते हुए सरकार ने फैसला किया है कि उसे सही सलाह और इलाज के लिए मनोचिकित्‍सक के पास भेजा जाएगा. ऐसे कर्मचारियों का नाम गुप्त रखा जाएगा और उनके विभाग द्वारा मांगे जाने पर ही बताया जाएगा. अगर कर्मचारी स्वयं ही यह मान ले कि वह ड्रग इस्तेमाल करता है तो उसे किसी डोप टेस्ट करवाने की ज़रूरत नहीं होगी. उसे सलाह और इलाज के लिए साइकेट्रिस्ट के पास सीधा ही भेज दिया जाएगा. हर स्तर पर इस जांच की गोपनीयता बनाई रखी जाएगी.

    आम आदमी पार्टी और अकाली दल के नेताओं ने मुख्यामंत्री अमरिंदर सिंह को कहा था कि उन्हें सबसे पहले अपना डोप टेस्ट करवाना चाहिए. उसके बाद अपने विधायकों के भी कराने चाहिए. इस पर अमरिंदर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा था कि वो किसी भी जांच के लिए तैयार हैं. इसके बाद डोप टेस्ट करवाने वाले विधायकों की झड़ी लग गई थी.

    पंजाब DGP सुरेश अरोरा ने गुरुवार को बयान जारी करके कहा कि मुख्यमंत्री की नशे के खिलाफ रणनीति से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

    Tags: Punjab, नशा

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