पुरी के शंकराचार्य ने अनुच्छेद 370 हटाने के मोदी सरकार के फ़ैसले को सराहा, देश-विदेश में हिंदू विचारधारा के पुनरुत्थान का किया आह्वान

जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसका विशेष दर्जा समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नेरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रशंसा की.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 11:33 AM IST
पुरी के शंकराचार्य ने अनुच्छेद 370 हटाने के मोदी सरकार के फ़ैसले को सराहा, देश-विदेश में हिंदू विचारधारा के पुनरुत्थान का किया आह्वान
पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती की फाइल फोटो
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Updated: August 6, 2019, 11:33 AM IST
आनंद एसटी दास
पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने से संबंधित अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के मोदी सरकार के फ़ैसले की सराहना की और कहा कि राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करना 'ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के व्यापक षड्यंत्र पर करारा प्रहार' है. उन्होंने इसी तरह के बुद्धिमानी भरे कदम से हिंदू विचारधारा के पुनरुत्थान का आह्वान किया.

हिंदू मठाधीश जिनका पूरा नाम जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती है, ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसका विशेष दर्जा समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नेरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रशंसा की. शंकराचार्य ने कहा, 'अनुच्छेद (370) को देश के पहले प्रधानमंत्री के शासनकाल के दौरान तदर्थ आधार पर लागू किया गया था. उस समय इसे स्थाई नहीं बनाया गया था, लेकिन बाद में सत्ता-लोलुप और अदूरदर्शी नेताओं ने एक भयानक षड्यंत्र कर इसे स्थाई बना दिया ताकि हिंदू विचारधारा के अस्तित्व को मिटाया जा सके.'

जम्मू-कश्मीर में हालात शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं.
जम्मू-कश्मीर में हालात शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं.


भारत के 'अस्तित्व और विचारधारा' को हिंदुओं से जोड़ते हुए शंकराचार्य ने कहा कि ब्रिटिश उपनिवेश काल से ही इसका निरंतर ह्रास हो रहा है और आज़ाद भारत इसको बचाने में नाकाम रहा. गोवर्धन पीठ के प्रमुख ने कहा कि वे इस बात से ख़ुश हैं कि ऐसा कुछ हुआ है जिसका 'लंबे अरसे से उन्हें इंतज़ार था' और अब दैवी आशीर्वाद से यह हो गया है. उन्होंने कहा, 'ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के षड्यंत्र पर यह करारा प्रहार है.'

शंकराचार्य ने कहा, 'यह मेरी इच्छा है कि आदरणीय प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और गृहमंत्री और विभिन्न पार्टियों के सभी देश भक्त मिलकर अब ब्रिटिश शासकों, दुराचारी तत्वों और पश्चिमी दुनिया और मानवता के ख़िलाफ़ काम कर रहे शासकों के प्रभावों को समाप्त कर देंगे जो भारत पर अपने अस्तित्व और विचारधारा को मिटाने का दबाव डाल रहे थे.'

गोकशी को उन्होंने 'आज़ाद भारत के माथे पर लगा कलंक' बताया और कहा कि इसको जारी रखने की अनुमति दी गई है ताकि कुछ ख़ास समुदायों को ख़ुश रखा जा सके. शंकराचार्य ने कहा, 'मेरा मानना है कि इस तरह के बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय (अनुच्छेद 370 को ख़त्म करना) से अब भारत अपने अस्तित्व और विचारधारा को बचाने की दिशा में आगे बढ़ेगा. अंततः इससे दुनिया को यह पता चलेगा कि रॉकेट, कंप्यूटर, ऐटम और मोबाइल फ़ोन के इस युग में सर्वोत्तम सिद्धांत वह है जो सनातन वैदिक आर्य हिंदुओं ने विकसित किया और यह न केवल दार्शनिक स्तर पर है बल्कि इसका प्रायोगिक उपयोग भी है'.
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उन्होंने कहा, 'ब्रिटिश शासकों ने उनके षड्यंत्र में मदद करने को तैयार होने वाले नेताओं के साथ मिलकर देश में एक ऐसे वातावरण को जन्म दिया जिससे हिंदुओं का अस्तित्व और उनकी विचारधारा का ह्रास हो. यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू की गई जिसने हिंदुओं के दिलोदिमाग़ को भ्रष्ट कर दिया है.'

पुरी स्थित गोवर्धन पीठ देश के चार महत्त्वपूर्ण पीठों में एक है, जिसकी स्थापना 8वीं सदी में हुई थी. पुरी पीठ जो कि पुरी स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा हुआ है, का अधिकार क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप का पूरा पूर्वी क्षेत्र है.
First published: August 6, 2019, 11:33 AM IST
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