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EXCLUSIVE: क्‍वाड सैन्‍य स्‍तर पर नहीं, भारत को अमेरिकी वैक्‍सीन मिलना कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर- एंटनी ब्लिंकन

एंटनी ब्लिंकन से सीएनएन-न्‍यूज18 की खास बातचीत. (File pic)

एंटनी ब्लिंकन से सीएनएन-न्‍यूज18 की खास बातचीत. (File pic)

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने बुधवार को अपने भारत दौरे के दौरान सीएनएन-न्‍यूज18 से खास बातचीत की.

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नई दिल्‍ली. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने बुधवार को अपना पहला भारत दौरा किया. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मिले. अपने भारत दौरे के दौरान उन्‍होंने सीएनएन-न्‍यूज18 से खास बातचीत की. इसमें उन्‍होंने कहा कि क्‍वाड (QUAD) सैन्‍य स्‍तर पर नहीं है. लेकिन कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine), जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दों पर समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देश एक साथ आ रहे हैं.

भारत दौरे के दौरान उन्‍होंने सीएनएन-न्‍यूज18 से स्‍वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र, फाइजर व मॉडर्ना कोरोना वैक्‍सीन की उपलब्‍धता और अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना के लौटने के बाद उपजे युद्ध के हालात के हल पर बात की.

  • क्‍वाड समूहीकरण का अमेरिकी रूप क्‍या है?

    यह सैन्‍य स्‍तर पर नहीं है. यह समान विचारधारा वाले लोकतंत्रों का समूह है जो लोगों के जीवन से जुड़े अहम मुद्दों पर साथ आ रहे हैं. साथ ही यह समूह दृढ़ संकल्पित है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र को स्‍वतंत्र बने रहने की आवश्‍यकता है. हम विश्‍व को अधिक से अधिक संख्‍या में कोरोना वैक्‍सीन उपलब्‍ध कराने पर काम कर रहे हैं. हम जलवायु परिवर्तन से लेकर समुद्री सुरक्षा तक पर काम कर रहे हैं.
  • चीन की इस आलोचना पर आपका क्या कहना है कि क्‍वाड का मकसद बीजिंग को निशाना बनाना है?

    मुझे नहीं लगता कि अधिक से अधिक टीकों का उत्पादन चीन को टार्गेट कर रहा है. यह इस क्षेत्र और दुनिया को वायरस से निजात दिलाने में मदद करने की अधिक कोशिश कर रहा है. हम एक साथ उसी दिशा में काम कर रहे हैं.
  • अभी तक भारतीयों को दो अमेरिकी वैक्‍सीन फाइजर और मॉडर्ना क्‍यों नहीं मिल पाईं?

    मैं कहना चाहता हूं कि जब हम कोरोना महामारी से जूझ रहे थे, तब भारत सहायता प्रदान करके हमारे बचाव में आया था. जब भारत को जरूरत थी तो हमने भी वही किया. हमारा निजी क्षेत्र लोगों की मदद के लिए एक साथ आया. किसी भी देश के साथ टीके प्राप्त करने के लिए मंजूरी, नियामक प्रक्रिया और कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता होती है. यहीं पर चीजें फंसी हैं.
  • हम 9/11 हमले की 20वीं बरसी की ओर बढ़ रहे हैं. क्‍या आपको लगता है कि अफगानिस्‍तान से सेना बुलाना जल्‍दबाजी है?

    हम पर 9/11 पर हमला हुआ था, हम इसलिए अफगानिस्‍तान गए थे. हम यह सुनिश्चित करने के लिए गए थे कि हम उन लोगों को न्याय के कटघरे में लाएंगे जिन्होंने हम पर हमला किया, जिसका एक बड़ा हिस्सा हमने हासिल किया है. ओसामा बिन लादेन को 10 साल बाद न्याय के कटघरे में लाया गया, अल-कायदा काफी हद तक कम हो गया है. इसलिए, हमने 20 वर्षों में बहुत कुछ हासिल किया है. अफगानिस्तान को खुद अपने पैरों पर खड़े होने के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि हम अपनी सेना वापस ले रहे हैं, लेकिन हम सरकार की मदद करने और पार्टियों को एक साथ लाने और क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए सहायता प्रदान करने में भागीदार हैं.
  • तालिबान के मामले में चीन के शामिल होने के बारे में आपका क्या कहना है? माना जा रहा है अमेरिका के जाते ही चीन वहां पहुंच जाएगा?

    अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों की इस क्षेत्र में रुचि है. पाकिस्तान, ईरान, एशिया और मध्य एशियाई देश, इस क्षेत्र में सभी की रुचि है, लेकिन स्थायी गृह युद्ध या तालिबान के हाथों में पड़ने वाले क्षेत्र में किसी की दिलचस्पी नहीं है. संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान में सभी की रुचि है. अगर चीन और अन्य देश उस हित पर काम कर रहे हैं, तो यह एक सकारात्मक बात है.
  • भारत और इसकी लोकतांत्रिक संस्थाओं के संबंध में चिंता के क्षेत्र पर आपका क्या कहना है?

    हम दोनों के सामने हमारे लोकतंत्र में चुनौतियां हैं. ऐसी ही एक चुनौती साइबर स्पेस और इंटरनेट के क्षेत्र में है, और साइबर स्पेस में गलत सूचना को विनियमित करने के बीच अंतर, बनाम राजनीतिक भाषण; यह एक पतली रेखा है. हमें उन्हें ध्यान से देखना होगा. यह हमारे लिए अच्छा है कि हमें इसके बारे में खुले में बात करने को मिले.
  • आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाइट हाउस में आमंत्रित करेंगे या बाइडेन जल्द ही भारत आएंगे?

    अगर पीएम मोदी वहां आ रहे हैं तो राष्ट्रपति बाइडेन उनका स्‍वागत करेंगे. और अगर बाइडेन यहां आ रहे हैं तो भी ऐसा समान रूप से होगा. हालांकि अभी कोई तारीख तय नहीं है.
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