मनगढ़ंत साबित हुए कार्यकर्ताओं के खिलाफ सबूत तो खुद ही खारिज हो जाएंगे आरोपः SC

भीमा-कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता अरुण फरेरा
भीमा-कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता अरुण फरेरा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि भीमा-कोरेगांव मामले में अगर महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार पांचों लोगों के खिलाफ साक्ष्य मनगढ़ंत पाया जाएगा तो उनके खिलाफ केस को खारिज कर दिया जाएगा.

  • News18.com
  • Last Updated: September 17, 2018, 3:09 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि भीमा-कोरेगांव मामले में अगर महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार पांचों लोगों के खिलाफ साक्ष्य मनगढ़ंत पाये जाते हैं तो उनके खिलाफ केस को खारिज कर दिया जाएगा. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने कहा कि इस बात की पूरी जांच होनी चाहिए कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ केस में कोई दम है या नहीं. कोर्ट ने कहा कि मामले में जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश भी दिया जा सकता है ताकि एफआईआर दर्ज किए जाने की परिस्थितियों के बारे में पता लग सके.

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जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, 'अगर मामले में कोई दम नहीं होगा तो इसे खत्म किया जाएगा. लेकिन इसके पहले हमें पूरे मामले की ठीक से जांच करनी होगी. पहले महाराष्ट्र पुलिस को एक रिपोर्ट दाखिल करने दो फिर इस पर विचार किया जाएगा. हम उनकी स्वतंत्रता का पूरा ख्याल रखेंगे लेकिन हमें ये भी देखना होगा कि उनके खिलाफ साक्ष्यों को भी देखना होगा.' सुप्रीम कोर्ट का पहले मानना था कि एक्टिविस्ट्स को बॉम्बे हाईकोर्ट की शरण में जाना चाहिए.



हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिकाकर्ता की तरफ से दलील देते हुए एसआईटी बनाने की मांग की. सोमवार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह और तुषार मेहता ने क्रमशः केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश होते हुए याचिका को खारिज किए जाने की मांग की. उनका कहना था कि एक्टिविस्ट्स को राहत के लिए पहले निचली अदालत में जाना चाहिए.
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हालांकि कोर्ट इस मामले की विस्तार से सुनवाई बुधवार को करेगा तब तक के लिए एक्टिविस्ट्स को नज़रबंद किए जाने की सीमा को बढ़ा दिया गया है.
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