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रामविलास पासवान का दिया इशारा, NPR फॉर्म से हटाए जा सकते हैं माता-पिता पर सवाल

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 11:44 AM IST
रामविलास पासवान का दिया इशारा, NPR फॉर्म से हटाए जा सकते हैं माता-पिता पर सवाल
रामविलास ने कहा, एनपीआर में माता-पिता के जन्म तारीख और स्थान के सवाल पर लोगों में हो रहा है कन्फूजन

रामविलास पासवान ने सीएए (CAA) और एनपीआर (NPR) का विरोध करने वालों के बारे में कहा कि संविधान ने सभी को अपनी बात रखने का अधिकार दिया है. पासवान ने कहा चाहे कोई भी सरकार हो, किसी सरकार की हिम्मत नहीं है कि भारतीय नागरिक चाहे, हिंदू, मुसलमान, सिख या इसाई हो उसकी नागरिकता खत्म कर दे.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 11:44 AM IST
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पटना. केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से प्रतिवादी के माता-पिता के जन्म तारीख और स्थान के प्रश्नों को हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि इससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है. उन्होंने कहा, 'यहां तक कि मैं भी अपनी जन्मतिथि नहीं जानता. ऐसे में परिजन जन्मतिथि का सबूत कहां से देंगे.' पासवान ने कहा कि इस बारे में मैंने गृह मंत्रालय से पहले ही कहा था कि इन सवालों से भ्रम पैदा होगा.

वहीं सीएए और एनपीआर का विरोध करने वालों के बारे में उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी को अपनी बात रखने का अधिकार दिया है. पासवान ने कहा चाहे कोई भी सरकार हो, किसी सरकार की हिम्मत नहीं है कि भारतीय नागरिक चाहे, हिंदू, मुसलमान, सिख या इसाई हो उसकी नागरिकता खत्म कर दे. उन्होंने सीएए को लेकर दलित वर्ग के बीच भ्रांति पैदा किए जाने की बात करते हुए कहा कि उन्हें स्वयं का भी असली जन्मतिथि मालूम नहीं है तो क्या हम हिंदुस्तान के नागरिक नहीं हुए.

‘मैंने छात्र आंदोलन से शुरू की राजनीति’
रामविलास ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था और उसमें संशोधन कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वे स्वयं 1974 के छात्र आंदोलन से राजनीति में आए हैं. छात्रों की अपनी भावना है. उन्हें रोक भी नहीं सकते. हम उनके बारे में धर्म के आधार पर सोचते भी नहीं हैं कि वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जेएनयू के हैं.

‘NPR  का CAA से कोई तालुख नहीं’
रामविलास ने कहा कि हमलोग बचपन से यह पढते आए हैं कि वाणी में स्वतंत्रता और कर्म पर नियंत्रण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एनपीआर का सीएए से कोई संबंध नहीं है और एनआरसी केवल असम के लिए है जो 1971 से चला आ रहा है. रामविलास ने कहा कि सरकार का मानना है कि पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के इस्लामी राष्ट्र होते हुए भी वहां उसी धर्म के लोग हैं तो कैसे उन्हें अल्पसंख्यक और सताया हुआ माना जाए लेकिन 1955 के अधिनियम के तहत किसी को भी नागरिकता देने से रोका नहीं जा सकता है.

‘NRC में कोई समस्या नहीं’राजग में शामिल जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूरे देश में एनआरसी की मुखालफत किए जाने के बारे में पूछे जाने पर रामविलास ने कहा कि एनआरसी का प्रश्न उठता ही नहीं है. जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्थिति स्पष्ट कर दी है तो हम तीन कदम आगे क्यों जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर एनपीआर से इतनी अधिक समस्या है तो कांग्रेस ने 2010 में अपने शासनकाल के दौरान इसे क्यों नहीं उठाया. लोकसभा में राजग को बहुमत है पर राज्यसभा में हमें बहुमत नहीं है ऐसे में वहां सीएए और एनपीआर सभी के समर्थन से पारित हो पाया.

(भाषा इनपुट के साथ)

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First published: January 22, 2020, 11:00 AM IST
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