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आज संसद में रखी जा सकती है राफेल पर CAG की रिपोर्ट, कीमत के खुलासे की संभावना कम

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

ल-मई में आम चुनाव के बाद 17वीं लोक सभा का गठन होगा. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि आज ही राफेल पर CAG की रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जाएगी

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 12, 2019, 1:07 AM IST
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संसद में आज राफेल डील पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट रखी जा सकती है. हालांकि अभी तक लोकसभा के आज के कामकाज़ में CAG की इस रिपोर्ट का कोई ज़िक्र नहीं है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक आखिरी वक्त पर इसे शामिल किया जा सकता है.

मौजूदा 16वीं लोकसभा का वर्तमान सत्र बुधवार को खत्म हो रहा है. अप्रैल-मई में आम चुनाव के बाद 17वीं लोक सभा का गठन होगा. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि आज ही राफेल पर CAG की रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जाएगी.

परंपरा के मुताबिक CAG रिपोर्ट की एक कॉपी राष्ट्रपति के पास और दूसरी कॉपी वित्त मंत्रालय के पास भेजी जाती है. सीएनएन न्यूज़ 18 को मिली जानकारी के मुताबिक CAG की रिपोर्ट दो अलग-अलग खंडों में तैयार की गई है. रिपोर्ट को नाम दिया गया है- 'एयर एक्विजिशन'.



सूत्रों के मुताबिक संसद में रखी जाने वाली CAG रिपोर्ट में राफेल की कीमत का जिक्र नहीं होगा. CAG के एक अधिकारी ने कहा, ''कीमत का जिक्र न करने के पीछे दो वजह हैं. पहला राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरा भारत और फ्रांस सरकार के बीच कीमत न बताने को लेकर समझौता.''
मौजूदा समय में पब्लिक अकाउंट कमेटी के चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि CAG की रिपोर्ट में वहीं बातें होंगी जो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताई थी. खड़गे के मुताबिक ऐसे में कांग्रेस इस रिपोर्ट पर विश्वास नहीं करेगी.

CAG पर कपिल सिब्बल के सवाल

कैग की रिपोर्ट को लेकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस मामले में हितों के टकराव की बात उठायी है. सिब्बल ने कहा है, ''राफेल डील मौजूदा सीएजी राजीव महर्षि के वित्त सचिव रहते हुआ. चूंकि ये एक भ्रष्ट सौदा है तो जांच होनी चाहिए. लेकिन, कैग खुद के खिलाफ जांच कैसे करेगा? पहले वो खुद को बचाएंगे, फिर सरकार को. ये हितों का टकराव है.''

राफेल डील पर क्या है कांग्रेस का आरोप?
बता दें कि कांग्रेस इस मामले में लगातार सत्ताधारी दल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सरकार को क्लीनचिट देते हुए इस पर जांच करने से इनकार कर दिया था. कांग्रेस इस सौदे में भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है. उसका कहना है कि सरकार प्रत्येक विमान 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है, जबकि यूपीए सरकार ने प्रति विमान 526 करोड़ रुपये कीमत तय की थी.

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