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राफेल डील: खड़गे बोले- सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से झूठ बोला, CAG को तलब करेगी PAC

भाषा
Updated: December 15, 2018, 4:02 PM IST

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कैग रिपोर्ट के तौर पर गलत जानकारी रखी, जिस वजह से राफेल डील पर इस तरह का निर्णय आया है.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने राफेल विमान सौदे से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है. खड़गे ने कहा कि वह पीएसी के सदस्यों से आग्रह करेंगे कि अटॉर्नी जनरल और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को बुलाकर पूछा जाए कि राफेल मामले में कैग की रिपोर्ट कब और कहां आई है. खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कैग रिपोर्ट के तौर पर गलत जानकारी रखी, जिस वजह से राफेल डील पर इस तरह का निर्णय आया है.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने कहा, 'राफेल के बारे में कोर्ट के सामने सरकार को जिन चीजों को ठीक ढंग से रखना चाहिए था, वह नहीं रखा. अटॉर्नी जनरल ने इस तरह से पक्ष रखा कि कोर्ट को यह महसूस हुआ कि कैग रिपोर्ट संसद में पेश हो गई है और पीएसी ने रिपोर्ट ने देख ली है.'

खड़गे ने कहा, 'जब पीएसी जांच करती है तो साक्ष्यों को देखती है. लेकिन न्यायालय को गलत जानकारी दी गई और जिसके आधार पर गलत निर्णय आया.'

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खड़गे ने कहा, 'पीएसी के सदस्यों से आग्रह करने जा रहा हूं कि अटॉर्नी जनरल को बुलाया जाए और कैग को भी बुलाया जाए ताकि यह पूछा जाए कि यह रिपोर्ट कब आई और पीएसी को कब मिली है.' उन्होंने कहा, 'अगर यह रिपोर्ट नहीं आई तो सरकार ने झूठ क्यों बोला? वह माफी मांगे. सरकार को कहां से क्लीन चिट मिलती है? किसी चीज को धोखे में रखकर की जाए तो वो ठीक नहीं है.' उन्होंने कहा, 'इसलिए हम जेपीसी की मांग कर रहे हैं ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके.

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को इस विमान सौदे में भ्रष्टाचार होने का आरोप फिर दोहराया और कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार बताए कि इस मामले पर कैग की रिपोर्ट कहां है जिसका उल्लेख शीर्ष कोर्ट में किया गया है. गांधी ने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर यह जांच हो गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक उद्योगपति का नाम ही सामने आएगा.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार को शुक्रवार को एक तरह से क्लीन चिट दे दी. साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया.
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.

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First published: December 15, 2018, 12:59 PM IST
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