वायुसेना में हुआ राफेल विमानों का गृहप्रवेश, 10 पॉइंट्स में जानें फाइटर जेट की खूबियां

वायुसेना में हुआ राफेल विमानों का गृहप्रवेश, 10 पॉइंट्स में जानें फाइटर जेट की खूबियां
राफेल विमानों का निर्माण फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने किया है.

भारतीय वायुसेना में पांच राफेल लड़ाकू विमानों (Rafale) को अंबाला वायुसैनिक अड्डे (Ambala Aifrorce Station) पर औपचारिक रूप से शामिल किया गया. राफेल लड़ाकू विमान का कॉम्बैट रेडियस 3700 किलोमीटर है, साथ ही ये दो इंजन वाला विमान है जिसकी भारतीय वायुसेना को दरकार थी. यहां पढ़ें राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से जुड़ी 10 खास बातें

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 11:58 AM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच पांच राफेल लड़ाकू विमानों  (Rafale fighter jets) की पहली खेप को गुरुवार को अंबाला एयरबेस (Ambala Airbase) पर औपचारिक रूप से वायुसेना में शामिल किया गया. वॉटर कैनेन से सलामी के बाद राफेल विमानों को वायुसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है. इस ऐतिहासिक लम्हे के गवाह रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांसिसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली बनीं. (राफेल विमानों से जुड़ी खबर के लिए यहां क्लिक करें)


यहां पढ़ें राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से जुड़ी 10 खास बातें

राफेल चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट है. ये कई रोल निभाने में सक्षम कॉम्बैट फाइटर जेट है. ग्राउंड सपोर्ट, डेप्थ स्ट्राइक और एंटी शिप अटैक में सक्षम है. इसकी ताकत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ये छोटे न्यूक्लियर हथियारों को ले जाने में सक्षम है. राफेल एयरक्राफ्ट 9500 किलोग्राम भार उठाने में सक्षम है.
राफेल विमानों का निर्माण फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने किया है. वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर इंद्रनील नंदी ने कहा कि राफेल विमानों को बल के 17वें स्क्वॉड्रन में शामिल किया गया. ये अधिकतम 24500 किलोग्राम वजन के साथ उड़ान भर सकता है.
29 जुलाई को पहली खेप के तहत पांच राफेल विमान भारत लाए गए थे. भारत ने लगभग चार साल पहले फ्रांस से 59,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल विमान खरीदने का सौदा किया था.
इस फाइटर जेट की अधिकतम रफ्तार 1389 किमी/घंटा है. एक बार में ये जेट 3700 किमी तक का सफर तय कर सकता है. ये हवा से हवा और जमीन दोनों पर हमला करने वाली मिसाइलों से लैस है.
राफेल में तीन तरह की मिसाइल लगाई जा सकती हैं. हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर मिसाइल, हवा से जमीन में मार करने वाल स्कैल्प मिसाइल और हैमर मिसाइल.
लद्दाख सीमा के हिसाब से देखें तो राफेल लड़ाकू विमान फिट बैठता है. राफेल ओमनी रोल लड़ाकू विमान है. यह पहाड़ों पर कम जगह में उतर सकता है. इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं.
एक बार फ्यूल भरने पर यह लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है. ये हवा में ही फ्यूल को भर सकता है, जैसा इसने फ्रांस से भारत आते हुए किया भी था.
राफेल लड़ाकू विमान स्टार्ट होते ही ऊंचाई तक पहुंचने में अन्य विमानों से काफी आगे है. राफेल का रेट ऑफ क्लाइंब 300 मीटर प्रति सेकंड है, जो चीन-पाकिस्तान के विमानों को भी मात देता है. यानी राफेल एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है.
रूस से सुखोई विमानों की खरीद के बाद अपनी सटीक मारक क्षमता और वायु श्रेष्ठता के लिए चर्चित राफेल विमानों की करीब 23 साल बाद खरीद हुई है.
राफेल में अभी जो मिसाइलें लगी हैं, वो सीरिया, लीबिया जैसी जगहों में इस्तेमाल हो चुकी हैं. इसके अलावा जल्द ही SPICE 2000 को भी इसमें जोड़ा जाएगा.
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