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Jammu Kashmir: श्रीनगर एयरबेस पर हो सकती है राफेल फाइटर की तैनाती, जानें वजह

श्रीनगर एयरबेस पर रफाल फाइटर की तैनाती हो सकती है.

श्रीनगर एयरबेस पर रफाल फाइटर की तैनाती हो सकती है.

सूत्रों की मानें तो इस एयरबेस पर रफाल फाइटर की तैनाती हो सकती है. ऑपरेशन कैपेबिलिटी को बदस्तूर जारी रखने के लिए रफाल को ...अधिक पढ़ें

श्रीनगर. जम्मू कश्मीर सामरिक तौर पर देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी हवाई सरहद की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भारतीय वायुसेना की है. दरअसल श्रीनगर एक महत्वपूर्ण एयर बेस है और अभी तक ये मिग 21 बइसन के 51 स्क्वाडर्न का होम बेस था, लेकिन 30 सिंतबर को स्क्वाडर्न रिटायर हो रहा है. दरअसल एयरफोर्स की भी भाषा में कहा जाता है नंबर प्लेटिंग यानी इस 51 स्क्वडर्न का नंबर किसी दूसरे नए एयरक्रफ्ट को दिया जाएगा.

अब सवाल यह उठता है कि अगर श्रीनगर बेस पर मिग 21 की जगह कौन सा एयरक्रफ्ट तैनात किया जाएगा. सूत्रों की मानें तो इस एयरबेस पर राफेलफाइटर की तैनाती हो सकती है. ऑपरेशन कैपेबिलिटी को बदस्तूर जारी रखने के लिए राफेल को डिटैचमेंट के तौर पर तैनात किया जा सकता है. फ़िलहाल भारतीय वायुसेना की तरफ़ से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

बता दें, अभी अंबाला और हाशिमारा में एक-एक रफाल का स्केवडर्न तैनात है. माना जा रहा है कि अंबाला में तैनात रफाल को डिटैचमेंट के तौर पर श्रीनगर भेजा जा सकता है. डिटैचमेंच के तहत एयरक्रफ्ट उस बेस पर तैनात किए जाते लेकिन मदर बेस उसकी स्कवाडर्न का बेस ही रहता है. ये तैनाती टास्क के हिसाब से होती है और समय भी उसी के हिसाब से तय होता है. अंबाला में रफाल की तैनाती टू फ़्रंट वॉर को ध्यान में रखकर किया गया है और रफाल की जो क्षमता है उसके मुताबिक़ तिब्बत में चीन के जीतने भी एयर बेस है वो सब रफाल की जद में है. वहीं पाकिस्तान भी राफेल आसानी से पहुंच सकता है.

ऐसा नहीं है कि राफेल हमेशा के लिए इस बेस पर तैनात होगा. ऑप्रेशन कैपेबिल्टी के हिसाब से डिटैचमेंट में दूसरे एयरक्रफ्ट को भी श्रीनगर बेस में तैनात किया जा सकता है. हालांकि, राफेल अगर अंबाला से भी ऑप्रेट करें तो भी पाकिस्तान के किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है. लेकिन खेल तो सिर्फ टाइम की है यानी अग़र कोई पाकिस्तानी फाइटर भारतीय एयरस्पेस का उलंघन करने की कोशिश करता है तो जितने भी एयरबेस उस इलाक़े में सब एक्टिव हो जाते हैं.

यही नहीं राफेल को श्रीनगर में डिटैचमेंट  तैनात किया जाता है तो  वहां से चीन के महत्वपूर्ण एयरबेस काशघर की दूरी 625 किलोमीटर और होटान 570 किलोमीटर है. मिग 21 की बात करें तो ये  51 स्क्वडर्न 1985 में चंडीगढ़ एयरफ़ोर्स पर स्थापित किया गया था. उस वक्त मिग 21 टाइप 75 इस स्केवडर्न का हिस्सा थी.  लेकिन 2004 में मिग के अपग्रेड विमान मिग 21 बाइसन को  51 स्कवाडर्न में जगह मिली और इस स्कवाडर्न को श्रीनगर बेस पर तैनात कर दिया गया.

श्रीनगर एयरबेस पर तैनात मिग 21 बाइसन का 51 स्कवाडर्न उस दिन और सुर्ख़ियों में आया जब जब 27 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के फाइटर जेट ने एलओसी पारकर भारत के एयर स्पेस का उल्लंघन किया था. उस वक्त इसी स्क्वॉड्रन में तैनात विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान ने मिग-21 उड़ाते हुए पाकिस्तान के एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराया था . सूत्रों के मुताबिक़ 51 स्कवाडर्न के जितने भी मिग 21 हैं उसके असेट बाक़ी बचे तीन स्केवडर्न में बराबर बंट गए हैं. यानी की उनके एयरक्रफ्ट, पायलट , ग्राउंड स्टाफ़ और आर्मामेंट तीनों मिग 21 स्कवाडर्न में बांट दिए गए है.

फाइटर के स्केवडर्न के नंबर भले ही कम हो गए हो लेकिन दुर्घटनाओं के बाद बचे विमानों की संख्या अभी भी उतनी ही है. भारतीय वायुसेना के शब्दों में कहें तो इस नंबर प्लेटिंग कहा जाता है यानी कि 51 स्क्वडर्न का नंबर प्लेट आने वाले दिनों में किसी नए एयरक्रफ्ट के स्केवडर्न को दिया जाएगा जैसे की हाल ही रफाल का पहला स्केवडर्न जब स्थापित किया गया था तो उस स्क्वडर्न को नंबर दिया गया था. 17 स्केवडर्न जो कि इससे पहले मिग 21 टाइप 96 गोल्डन एरो के नाम से जाना जाता था और अब रफाल के पहले स्क्वडर्न का नाम 17 स्केवडर्न गोल्डन एरो है.

अगर मौजूदा फाइटर फ्लीट की बात करे तो मिग 21 बिज़ का एक स्क्वाडर्न, मिग 21 टाइप 96 का एक स्क्वाडर्न और मिग 27 के दो स्क्वाडर्न से फ़ेज़ आउट हो चुके है वही मिग 21 बाइसन के 4 स्क्वाडर्न में अब तीन ही बचे हैं. मौजूदा फाइटर  फ्लीट में मिग 29 के 3 स्क्वाडर्न, मिराज 2000 के 3 स्क्वाडर्न और जेगुआर के 6 स्क्वाडर्न के अपग्रेड हो चुका है. बहरहाल रफाल के आने के बाद फाइटर स्कवाडर्न  में बढ़ोतरी ज़रूरी हुई है, लेकिन मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए सैकशन फाइटर स्कवाडर्न अब भी कम ही है.

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