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OPINION : क्या कांग्रेस के नेताओं का बड़बोलापन फिर कांग्रेस को ले डूबेगा?

OPINION : क्या कांग्रेस के नेताओं का बड़बोलापन फिर कांग्रेस को ले डूबेगा?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्राकी फाइल फोटो PTI

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्राकी फाइल फोटो PTI

खुर्शीद ने संवाददाताओं से कहा, 'मैंने कहा था कि वह (विंग कमांडर) हमारे कार्यकाल के दौरान भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे. मैंने केवल सच कहा था.'

    राशिद किदवई

    आगामी लोकसभा चुनाव का ऐलान इस हफ्ते होने की संभावना है लेकिन कांग्रेस के साथ-साथ संयुक्त विपक्ष नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनजीए सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने में असफल दिख रहा है. 14 फरवरी तक विपक्ष बहुत ही शानदार नजर आ रहा था लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान पर विपक्ष बैक फुट पर चला गया.

    क्षेत्रीय दल जैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस एयर स्ट्राइक के सबूत मांग कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने में खुश हैं. जबकि जबकि कांग्रेस अलग-अलग अंदाज में बोलने में लगी है. दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद, मनीष तिवारी और अन्य की हालिया टिप्पणी साल 2012-2014 के बड़बोलेपन की याद दिलाती है, जिसमें यूपीए के वरिष्ठ मंत्रियों और कांग्रेस के पदाधिकारियों को औपचारिक आत्महत्या करते हुए देखा जा सकता था.

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    वर्तमान कांग्रेस में, प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस और विचार-विमर्श एक अतीत की बात हो गई है. यह आश्चर्यजनक है कि 28 फरवरी की बैठक स्थगित होने के बाद कांग्रेस कार्य समिति को फिर से क्यों नहीं बुलाया गया. कुछ ऐसा ही प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मामला है, जो 14 फरवरी के लिए निर्धारित की गई थी. इस बात के कोई पुख्ता कारण नहीं है कि नव नियुक्त पार्टी महासचिव, जो अपने बोलने के कौशल के लिए जाना जाती हैं, शांत हो गईं.

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    अहमदाबाद में होने वाली  सीडब्ल्यूसी की बैठक होने वाली थी. इसमें पार्टी नेताओं को वर्तमान भारत-पाक संबंधों, बालाकोट, राफेल और समकालीन मुद्दों की पर क्या कहना और क्या नहीं कहना है, इस पर दिशा निर्देश देना था. यह चौंकाने  वाला है कि राहुल-प्रियंका 'बुद्धिमान परिषद' में अधिक भीड़, फिर भी निष्क्रिय बना हुआ है. यह वास्तव में पुरानी पार्टी के लिए एक दुखद टिप्पणी है, लगातार संस्थानों के पतन के मुद्दे पर विलाप करते हुए,  वह स्वयं के संस्थानों जैसे कि कांग्रेस संसदीय बोर्ड और, कुछ हद तक, सीडब्ल्यूसी से बहुत कम संबंधित है.

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    सर्जिकल स्ट्राइक और विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की रिहाई के बाद, कांग्रेस ने अलग-अलग स्वरों में बोलना शुरू कर दिया है, जिससे बीजेपी को यह पता चल गया है कि मुख्य विपक्षी दल को राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर सवाल उठाने की आदत है.

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    जैसी कि उम्मीद थी, दिग्विजय सिंह चारों ओर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की सराहना की है, जिसे कांग्रेस अपने आंतरिक मूल्यांकन में, पाकिस्तान की सेना के हाथों की कठपुतली मानती है. दिग्वजिय सिंह एयर स्ट्राइक का सबूत मांगते हुए एक कदम आगे बढ़ गए हैं.अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश में, जहां कांग्रेस कम से कम 29 संसदीय सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है, बीजेपी ने ’दिग्गी राजा’ पर मोर्चा हमला किया है क्योंकि दिग्विजय लोकप्रिय रूप से जाने जाते हैं. शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी ने रविवार को राज्य भर में रैलियों का आयोजन किया, जिसमें दिग्विजय को एक 'दाग' बताया गया. चौहान ने दिग्विजय पर 'पाकिस्तान की भाषा' बोलने का आरोप लगाया है.

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    इस सवाल का जवाब है कि क्या दिग्विजय की बातें कांग्रेस के बयान का हिस्सा हैं? यदि कांग्रेस वास्तव में भारतीय वायु सेना के पाकिस्तान क्षेत्र में जाने पर सवाल उठाना चाहती है, तो राहुल गांधी सामने से क्यों नहीं आगे बढ़ रहे हैं? इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या पुरानी पार्टी ने जमीनी स्तर की भावनाओं का संज्ञान लिया है जहां देश भर में सड़कों पर आम नागरिकों को मिठाई बांटते, नाचते और जश्न मनाते देखा गया. यह तर्क दिया जा सकता है कि एक विपक्षी दल के रूप में, कांग्रेस मोदी सरकार पर सवाल उठा सकती है. इसे उचित मानते हुए भी एक राजनीतिक दल को संरचित और सधी प्रतिक्रिया के साथ आने की आवश्यकता है.

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    शांत और समझदार सलमान खुर्शीद का बयान पूरी तरह से समझ के परे है. जैसे कि दिग्विजय सिंह के बयान को ढकने की कोशिश की जा रही थी, पूर्व विदेश मंत्री ने दावा किया था कि IAF पायलट अभिनंदन वर्धमान ने 2004 में फ्लाइंग बैज अर्जित की और UPA शासन के दौरान फाइटर पायलट के रूप में 'परिपक्व' हुए.

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    खुर्शीद ने जोर देकर कहा कि उन्होंने केवल 'सच कहा था'. खुर्शीद ने संवाददाताओं से कहा, 'मैंने कहा था कि वह (विंग कमांडर) हमारे कार्यकाल के दौरान भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे. मैंने केवल सच कहा था.' कांग्रेस पर नजर रखने वाले भी कुछ लोग आश्चर्यचकित हैं कि राहुल-प्रियंका चचेरे भाई फिरोज वरुण गांधी को क्यों नहीं पसंद कर रहे हैं. आखिरकार, गांधीवादी उत्तर प्रदेश में चेहरे की तलाश में हैं और बीजेपी से बहराइच की सांसद सावित्री बाई फुले और फतेहपुर से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद राकेश सचान को पार्टी में शामिल किया. क्या वरुण का योग्य नहीं हैं या फिर कुछ और पहलू कांग्रेस में उनकी एंट्री को रोक रहे हैं?

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    Tags: Air Strike, BJP, Congress, CRPF, Narendra modi, Priyanka gandhi, Pulwama, Pulwama attack, Rahul gandhi, Trending news

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