निजी कंपनियों को बैंक खोलने के प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने समझाई 'क्रोनोलॉजी', कहा- सूट बूट की सरकार

(PTI Photo)

वहीं रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा है कि कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की मंजूरी देने की सिफारिश आज के हालात में चौंकाने वाली है.

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    नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा गठित एक समूह ने बैंकिंग नियमनन कानून में जरूरी संशोधन के बाद बड़ी कंपनियों को बैंकों का प्रवर्तक बनने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है. साथ ही निजी क्षेत्र के बैंकों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी की सीमा बढ़ाकर 26 प्रतिशत किये जाने की सिफारिश की है. केंद्रीय बैंक के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार पर निशना साधा है. उन्होंने एक बार फिर 'सूट बूट की सरकार' का नारा उछाला है.

    वायनाड सांसद ने एक ट्वीट में कहा- 'क्रोनोलॉजी समझिए. पहले कुछ बड़ी कंपनियों को कर्जमाफी होगी. फिर कंपनियों को टैक्स में बड़ी छूट मिलेगी. अब इन कंपनियों को सीधा जनता की बचत दे दीजिए ताकि ये बैंक स्थापित कर सकें. सूट बूट की सरकार'



    रिपोर्ट में क्या है?
    बता दें रिजर्व बैंक ने भारतीय निजी क्षेत्र के बैंकों के लिये मौजूदा स्वामित्व दिशानिर्देश और कंपनी ढांचे की समीक्षा को लेकर आंतरिक कार्यकारी समूह का गठन 12 जून, 2020 को किया था. केंद्रीय बैंक ने समूह की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की और इस पर लोगों से 15 जनवरी, 2021 तक राय देने को कहा है.

    प्रवर्तकों की पात्रता के बारे में समूह ने कहा कि प्रवर्तक कार्पोरेट समूह की वित्तीय तथा गैर-वित्तीय इकाइयो के साथ कर्ज के लेन-देन और निवेश संबंध के मामले से निपटने के लिये बैंकिंग नियमन कानून, 1949 में आवश्यक संशोधन के बाद बड़ी कंपनियां/औद्योगिक घरानों को बैंकों का प्रवर्तक बनने की अनुमति दी जा सकती है.

    समूह ने बड़े समूह के लिये निगरानी व्यवस्था मजबूत बनाने की भी सिफारिश की है. रिजर्व बैंक का बड़ी कंपनियों/औद्योगिक घरानों द्वारा बैंकों के स्वामित्व को लेकर रुख सतर्क रहा है. इसका कारण इससे जुड़ा जोखिम, संचालन को लेकर चिंता और हितों का टकराव है. यह स्थिति उस समय उत्पन्न हो सकती है जबकि बैंकों पर बड़ी कंपनियां या औद्योघिक घरानों का स्वामित्व होगा.

    इस प्रस्ताव को अभी छोड़ देना बेहतर-  राजन और आचार्य
    रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा है कि कॉरपोरेट घरानों को बैंक स्थापित करने की मंजूरी देने की सिफारिश आज के हालात में चौंकाने वाली है. दोनों का मानना है कि बैंकिंग क्षेत्र में कारोबारी घरानों की संलिप्तता के बारे में अभी आजमायी गयी सीमाओं पर टिके रहना अधिक महत्वपूर्ण है.

    रिजर्व बैंक के द्वारा गठित एक आंतरिक कार्य समूह (आईडब्ल्यूजी) ने पिछले सप्ताह कई सुझाव दिये थे. इन सुझावों में यह सिफारिश भी शामिल है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम में आवश्यक संशोधन करके बड़े कॉरपोरेट घरानों को बैंक शुरू करने का लाइसेंस दिया जा सकता है. राजन और आचार्य ने एक साझा आलेख में यह भी कहा कि इस प्रस्ताव को अभी छोड़ देना बेहतर है.

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