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अहमद पटेल के निधन साथ खत्म हो जाएगी कांग्रेस में 'युवा बनाम बुजुर्ग' की लड़ाई!

सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ अहमद पटेल. (Pic- PTI)
सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ अहमद पटेल. (Pic- PTI)

कांग्रेस में कई नेता अहमद पटेल (Ahmed Patel) का बेहतर विकल्‍प तलाशने की बात कर रहे हैं. सवाल यह है कि क्‍या 'राहुल गांधी की कांग्रेस' ऐसा चाहती है'?

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 1:13 PM IST
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पल्‍लवी घोष

नई दिल्‍ली. कांग्रेस की वर्किंग कमेटी (CWC) ने पिछले सप्‍ताह पार्टी के दो दिग्‍गज नेताओं को श्रद्धांजलि दी. पार्टी के दिग्‍गज नेताओं तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) और अहमद पटेल (Ahmed Patel) का निधन पिछले दिनों कोरोना संक्रमण के कारण हुआ. अहमद पटेल को दी गई श्रद्धांजलि स्‍पष्‍ट रूप से पार्टी की राजनीति के भविष्‍य पर पड़ने वाले महत्‍व को भी दर्शाती है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने कहा, 'श्री पटेल की एक अनोखी क्षमता थी कि वह पार्टी नेताओं के बीच सामंजस्‍य और एकता बनाए रखने में सक्षम थे. अहमद भाई की कोई भी निजी आकांक्षा नहीं रही. कांग्रेस का हित ही उनका हित रहा.'

यही वो चीज है जो कांग्रेस की भविष्‍य की राजनीति में बदलाव की शुरुआत कर सकती है. अहमद पटेल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्‍यक्ष भी थे. उनके निधन के बाद पार्टी ने त्‍वरित निर्णय लेते हुए पूर्व मंत्री रहे पवन कुमार बंसल को इस पद पर नियुक्‍त किया. यह चुनाव चौंकाने वाला था, लेकिन एक कोषाध्‍यक्ष के रूप में पार्टी फंड को जुटाना और उसका प्रयोग सुचारू रूप से चलता रहे यह सुनिश्चित करना होता है. कई नेताओं में कांग्रेस के मुख्‍यमंत्रियों से बात करने और उनसे योगदान करने के लिए कहने का हौसला नहीं होता. कई नेता यह भी नहीं तय कर पाते हैं कि कितने फंड को कहां खर्च किया जाए.



पवन बंसल बेशक लो प्रोफाइल नेता हैं लेकिन पैसे को लेकर उन पर गांधी परिवार का भरोसा है. लेकिन पवन बंसल की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्‍या मुख्‍यमंत्री फंड देने को तैयार होंगे. जैसा कि उन्‍होंने अहमद पटेल के साथ किया. अहमद पटेल का जाना पार्टी के भीतर कई और अधिक महत्‍वपूर्ण जटिलताएं लाने वाला है. कई नेता अहमद पटेल का बेहतर विकल्‍प तलाशने की बात कर रहे हैं. सवाल यह है कि क्‍या 'राहुल गांधी की कांग्रेस ऐसा कोई चाहती है'? यह जगजाहिर बात है कि पिछले कुछ साल से कांग्रेस के भीतर एक तरह की जंग चल रही है. इसे अहमद पटेल की ओर से संरक्षण प्राप्‍त पार्टी के पुराने नेताओं और टीम राहुल गांधी के युवा सदस्‍यों के बीच नूरा कुश्‍ती कहा जा सकता है. राहुल गांधी टीम के युवा सदस्‍य मानते हैं कि पार्टी के दिग्‍गज नेता उन्‍हें आगे नहीं बढ़ने देना चाहते हैं.
इसका सबसे सटीक उदाहरण राजस्‍थान है. वहां अशोक गहलोत को अहमद पटेल का समर्थन प्राप्‍त था. सचिन पायलट से चले उनके विवाद को पुराने नेताओं और युवा नेताओं के बीच की जंग के रूप में देखने को मिला. यह भी जगजाहिर है कि टीम राहुल के कई नेता सहज नहीं थे.

राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस के भीतर किया गया संघर्ष अहमद पटेल के साथ भी किया गया उनका संघर्ष था. एक समय उनके बीच संबंध काफी ठंडे थे. अहमद पटेल ने जितने बेहतर तरह से सोनिया गांधी के साथ राजनीति चलाई, उस तरह से उनके बेटे (राहुल गांधी) के साथ वह नहीं चला पाए. ऐसा अधिकांश बार देखने को भी मिला.

2019 लोकसभा चुनाव के बाद हुई सीडब्‍ल्‍यूसी की बैठक में राहुल गांधी ने खुले तौर पर वरिष्‍ठ नेताओं पर आरोप लगाया था कि वे उनके 'चौकीदार चोर है' के स्‍लोगन पर उनका समर्थन नहीं करते. राहुल गांधी ने उस बैठक में पूछा था, 'आप लोगों में से कितने लोग है तो मेरे साथ हैं, वे हाथ उठाएं.' उस दौरान कई हाथ नहीं उठे थे. कुछ वरिष्‍ठ नेताओं ने अपने हाथ अपने-अपने सीने पर रख लिए थे. बाहर निकले कुछ नेताओं ने यहां तक कहा कि इस स्‍लोगन को बनाने से पहले उन लोगों से राय तक नहीं ली गई थी.

राहुल गांधी के करीबी कुछ युवा नेताओं ने कहा था, 'जब आपके सीनियर आपका समर्थन नहीं करते तो आप कैसे इस स्‍लोगन के जरिये मतदाताओं को लुभा सकते हैं?' अहमद पटेल का घर असंतुष्‍ट पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग की जगह बन गया था. लेकिन हर बार अहमद पटेल यही दर्शाते थे कि उनके निजी रिश्‍तों से अधिक पार्टी अधिक महत्‍व रखती है. यह बात साबित है कि 23 पार्टी नेताओं की ओर से कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष को लिखे गए पत्र के कारण ही सीडब्‍ल्‍यूसी बैठक बुलाई गई थी.



जितने लंबे समय कांग्रेस पर संकट छाया रहा या महाराष्‍ट्र और राजस्‍थान में सरकार गठन एक गंभीर मुद्दा रहा तब तक अहमद पटेल को रिप्‍लेस नहीं किया जा सकता था. सोनिया गांधी उन पर निर्भर थीं. ऐसे में उनके बच्‍चों को भी यह स्‍वीकार करना पड़ा कि अहमद भाई का ज्ञान व समझ अद्वितीय है. इसके बाद भी राहुल गांधी और अहमद पटेल के बीच की दूरियां इतनी बढ़ गईं कि उसे पाटा नहीं जा सकता. तो अब पटेल के बाद क्‍या होगा? अगर राहुल गांधी पार्टी अध्‍यक्ष बनते हैं तो एक अहमद पटेल का होना असंभव है.
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