लोगों से जुड़ने और‍ विपक्ष की आवाज उठाने को राहुल गांधी ने शुरू किया अपना चैनल

लोगों से जुड़ने और‍ विपक्ष की आवाज उठाने को राहुल गांधी ने शुरू किया अपना चैनल
राहुल गांधी ने टेलीग्राम पर शुरू किया अपना चैनल.

मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) पर मौजूद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के इस चैनल के जरिये उनका मकसद लोगों से सीधे तौर पर जुड़ना है.

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नई दिल्‍ली. कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को फिर से पार्टी अध्‍यक्ष बनाए जाने की मांग हाल ही में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में उठी. इन सबके बीच राहुल गांधी ने अपना खुद का ऑनलाइन चैनल खोला है. मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) में मौजूद उनके इस चैनल (Rahul Gandhi Channel) के जरिये उनका मकसद लोगों से सीधे तौर पर जुड़ना है. इस चैनल के जरिये वह अपने विचार लोगों तक पहुंचाएंगे. साथ ही इसका मकसद लोगों से बातचीत करना भी होगा. टेलीग्राम में उनके इस चैनल को जल्‍द ही वेरीफाई भी कर दिया जाएगा.

इस कदम को कांग्रेस की आम शिकायत के समाधान के रूप में देखा जाता है कि ज्यादातर मीडिया उसकी बात को ब्लैक आउट करती है और विपक्षी राजनेताओं को बहुत कम या कोई महत्‍व नहीं देती है. राहुल गांधी सोशल मीडिया पर देर से आए हैं. लेकिन यह जानकर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने यही किया है और सफल हुए, उन्होंने भी इसे अपना लिया. मौजूदा समय में ट्विटर पर राहुल गांधी के 1.4 करोड़ फॉलोअर्स हैं. राहुल गांधी ट्विटर का इस्‍तेमाल सरकार पर और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए करते हैं. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब अकाउंट भी हैं. अब क्या एक चैनल अच्छा विचार है और अब राजनेताओं के लिए न्‍यू नॉर्मल है?

राजनीतिक रणनीतिकार दिलीप चेरियन कहते हैं, 'हमें पता चला है कि दो प्रमुख सार्वजनिक समस्याएं थीं. एक यह निश्चित नहीं है कि डिजिटल पर जो उपलब्ध है वह सत्य है. इसके अलावा इस तरह की जानकारी भी थी कि कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि उन्हें वह नहीं मिल रहा था, जिसकी उन्हें तलाश थी. हम स्वामित्व वाली मीडिया के समर्थक रहे हैं. इसके कुछ फॉलोअर्स हैं. जैसे कि अगर आप ट्विटर पर हैं, तो आपके पास आपकी स्वामित्व वाली मीडिया पर अपनी खुद की फीड है.'



उनका कहना है, 'इसी तरह अगर आप इंस्टाग्राम पर हैं, तो इसे अपनी स्वामित्व वाली मीडिया पर डाला जा सकता है. आपका स्वामित्व वाला मीडिया जिम्मेदार हो जाता है और आप जो कुछ भी कह रहे हैं उसका भंडार होता है. यह विश्वसनीय है, यह तात्कालिक है. तीसरा, यह वितरण चैनलों पर निर्भर नहीं करता है. हमारे पास NaMo ऐप है लेकिन इसे आक्रामकता के रूप में देखा जाता है. इस लिहाज से राहुल गांधी का यह विचार बहुत अच्छा है.'
ऐप और सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता को पहली बार बीजेपी, खासकर पीएम मोदी ने अपने पहले लोकसभा अभियान के दौरान पहचाना था. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी ताकत का इस्तेमाल अपने 'मन की बात' या NaMo ऐप के माध्यम से लोगों से जुड़ने के लिए किया और संचार के तरीकों को फिर से परिभाषित किया. परंपरागत टेलीविजन चैनल और रेडियो उतना आकर्षित नहीं कर सकते हैं, जितना सोशल मीडिया कर सकता है. इसका लक्ष्य युवा लोग हैं, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया ऐप के आदी हैं.

लगभग सभी नेता अब सोशल मीडिया पर हैं. यहां तक कि मायावती भी ट्विटर पर छाई हुई हैं. लेकिन अगर राहुल गांधी को पीएम मोदी का विकल्प बनना है, तो हर जगह युद्ध का एक मैदान है. इसलिए, सोशल मीडिया पर ध्‍यान देने की जरूरत है.
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