राहुल गांधी ने चिराग पासवान को लिखी चिट्ठी, कहा- गरीबों और कमजोरों की आवाज थे राम विलास पासवान

राम विलास पासवान को श्रद्धांजलि देते राहुल गांधी (ANI)
राम विलास पासवान को श्रद्धांजलि देते राहुल गांधी (ANI)

देश के प्रमुख दलित नेताओं में से एक केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram vilas Paswan) का गुरुवार को निधन हो गया. वह 74 वर्ष के थे. उनके सम्मान में शुक्रवार को राजकीय शोक की घोषणा की गई है और इस दौरान तिरंगा आधा झुका रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 4:18 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान (Ram vilas paswan) के निधन पर दुख जताते हुए शुक्रवार को कहा कि उन्होंने सबसे वंचित तबकों को आवाज दी और गरीबों एवं कमजोरों के अधिकारों की रक्षा की. पासवान के पुत्र चिराग पासवान को शोक संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि देश ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसने बिहार एवं देश में राजनीति और जनसेवा पर स्थायी छाप छोड़ी.

गांधी ने कहा, ‘पांच दशकों से अधिक के अपने उत्कृष्ट सार्वजनिक जीवन में उन्होंने सबसे वंचित तबकों को आवाज दी और गरीबों एवं कमजोरों के अधिकारों की रक्षा की. सांसद और मंत्री के तौर पर उन्होंने इन तबकों के हितों एवं चिंताओं को पुरजोर आवाज प्रदान की.’

परिवार के प्रति गहरी संवेदना- राहुल
राहुल गांधी कहा, ‘मैं इस मुश्किल घड़ी में आपके और परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता हूं.’ रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया. वह 74 वर्ष के थे. लोजपा के संस्थापक और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान कई सप्ताह से यहां के एक अस्पताल में भर्ती थे. हाल ही में उनके हृदय की सर्जरी हुई थी.
बता दें उनके सम्मान में शुक्रवार को राजकीय शोक की घोषणा की गयी है और इस दौरान तिरंगा आधा झुका हुआ है. गौरतलब है कि समाजवादी आंदोलन के स्तंभों में से एक पासवान बाद के दिनों में बिहार के प्रमुख दलित नेता के रूप में उभरे और जल्दी ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशेष जगह बना ली. 1990 के दशक में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने में पासवान की भूमिका महत्वपूर्ण रही.





सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड
खगड़िया में 1946 में जन्में पासवान का चयन पुलिस सेवा में हो गया था लेकिन उन्होंने अपने मन की सुनी और राजनीति में चले आए. पहली बार 1969 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए. वह आठ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और कई बार हाजीपुर संसदीय सीट से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया.

समाज के वंचित तबके से जुड़े लोगों के मुद्दे उठाने में सबसे आगे रहने वाले पासवान जीमीनी स्तर के मंझे हुए नेता थे जिनके संबंध सभी राजनीतिक दलों और गठबंधनों के साथ हमेशा मधुर बने रहे. अपने राज्य के प्रति उनके समर्थन के कारण पांच दशक लंबे राजनीतिक करियर में वह हमेशा केंद्र की सभी सरकारों में शामिल रहे.

वह 1989 से अपने अंतिम समय तक जनता दल से लेकर, कांग्रेस और भाजपा नीत राजग जैसी भिन्न और विपरीत विचाराधाओं वाली सरकारों का हिस्सा रहे हैं. पासवान का गठबंधन सहयोग चाहे कोई भी रहा हो, उन्होंने हमेशा गर्व के साथ स्वयं को समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष बताया. वह वीपी सिंह, एचडी देवे गौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और वर्तमान में नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज