51 सांसद मिलकर भी नहीं मना पाए, राहुल ने फिर कहा- मुझे जाना है, जल्द रिप्लेसमेंट देखे कांग्रेस

News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 1:17 PM IST

लोकसभा चुनाव की करारी हार को स्वीकार करते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की है. पिछले एक महीने से उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं. इस बीच राहुल गांधी को मनाने के लिए कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता उनके घर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं.

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लंबे समय से कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर लगाए जा रहे अलग-अलग कयासों के बीच राहुल गांधी ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि वह यह जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में बुधवार को कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक हुई. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे. बैठक में कांग्रेस के 51 सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से इस्तीफा वापस लेने की गुजारिश की. सूत्रों के मुताबिक राहुल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है. राहुल गांधी ने पार्टी सांसदों से साफ कहा है कि अब वह कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते. पार्टी को उनका रिप्लेसमेंट जल्द देखना पड़ेगा.

News18 इंडिया से भी बात करते हुए राहुल गांधी ने अपना फैसला दोहराया. राहुल ने कहा कि मैं अब अध्यक्ष पद पर नहीं बने रहना चाहता हूं. मैंने ये बात पार्टी के सांसदों को भी साफ कर दिया है.  बता दें कि राहुल गांधी ये भी चाहते हैं कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष गांधी परिवार से कोई नहीं होना चाहिए.

राहुल के घर के बाहर धरने पर बैठे युवा कार्यकर्ता
इस बीच कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता राहुल गांधी को मनाने के लिए उनके घर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं.  पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने 'राहुल गांधी कांग्रेस की शान हैं' नारेबाजी भी की.

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नया अध्यक्ष तलाशने के लिए पार्टी को दिया एक महीने का वक्त
दरअसल, राहुल गांधी ने नया अध्यक्ष खोजने के लिए कांग्रेस को एक महीने की मोहलत दी है. इस दौरान वह अध्यक्ष बने रहेंगे. इस एक महीने की मियाद कुछ दिन में पूरी हो जाएगी. वैसे कांग्रेस ने नए अध्यक्ष के लिए कई नामों पर विचार किया, मगर कोई नाम फाइनल नहीं हो पा रहा. सोनिया गांधी-प्रियंका गांधी नहीं चाहते हैं कि राहुल पार्टी के अध्यक्ष का पद छोड़े, लिहाजा पार्टी के वरिष्ठ लोग लगातार राहुल को मनाने में लगे हैं, लेकिन राहुल गांधी अपना फैसला बदलने को तैयार नहीं.
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बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर में कांग्रेस सहित विपक्ष का पूरी तरह से सफाया हो गया. बीजेपी 303 सीटों के साथ सत्ता में एक बार फिर वापसी की है, जबकि राहुल गांधी के नेतृत्व में उतरी कांग्रेस को जबरदस्त हार का मुंह देखना पड़ा. कांग्रेस 52 सीटों पर सिमट गई. लोकसभा चुनाव की करारी हार को स्वीकार करते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी.

राहुल गांधी अपनी दोस्त के साथ (PTI)


अध्यक्ष की रेस में हैं ये नाम
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, नए अध्यक्ष की रेस में सुशील कुमार शिंदे, मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, अशोक गहलोत और सचिन पायलट का नाम भी विचार किया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो संगठन के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर पार्टी ने अशोक गहलोत के नाम पर मोहर लगाने का मन बना लिया है. अब औपचारिक ऐलान होना बाकी है.

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हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि अशोक गहलोत अकेले कांग्रेस अध्यक्ष होंगे या उनकी मदद के लिए कई कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए जाएंगे. वैसे कांग्रेस के कई नेताओं ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि अगला अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा.

लोकसभा चुनाव में राहुल ने जी-जान से की थी मेहनत
बता दें कि कांग्रेस की खोई सियासी जमीन को तलाशने के लिए राहुल गांधी ने एड़ी चोटी का जोर लगाया. लोकसभा चुनाव में 2 माह 8 दिन के चुनाव प्रचार में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने 148 रैलियां की थीं. इस दौरान उन्होंने करीब 1.25 किमी की यात्राएं कीं, लेकिन देश भर में कांग्रेस को 52 सीटें आईं.

यूपी में कांग्रेस को मिली सिर्फ एक सीट
राहुल गांधी ने सबसे अधिक 21 रैली उत्तर प्रदेश में की है और पार्टी महज एक सीट जीत सकी है. मध्य प्रदेश में 18 रैली की एक सीट आई, राजस्थान में 13 रैली कोई सीट नहीं मिली. केरल में 12 रैली की 15 सीटें मिलीं. बिहार में 8 रैली की और एक सीट मिली. झारखंड में 4 रैलियां किया और एक सीट ही जीत सके.

कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद मां सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधी (PTI)


एक-डेढ़ साल तक अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे राहुल
सूत्रों के मुताबिक, राहुल अगले एक से डेढ़ साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे, बताया जा रहा है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने ही ये बीच का रास्ता राहुल गांधी के लिए निकाला है. इस दौरान राहुल गांधी बिना किसी पद के देशभर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे.

इस दौरान क्या करेंगे राहुल गांधी?
राहुल की जिद के आगे झुके कांग्रेस नेताओं ने यह बीच का रास्ता निकाला है, जिसमें राहुल गांधी की बात भी रह जाए और कांग्रेस का अध्यक्ष पद भी खाली न रहे. राहुल बिना किसी जवाबदेही के देशभर में घूमकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलकर संवाद कर सकते हैं. वह बिना पद के मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ खुल कर आलोचना कर सकेंगे. पद नहीं रहने पर सत्ता पक्ष के निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष होंगे न कि राहुल गांधी. इस प्रयोग के साथ राहुल गांधी उन राज्यों को ज्यादा समय दे सकेंगे जहां कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपना वर्चस्व खो चुकी है.

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First published: June 26, 2019, 11:25 AM IST
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