Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    राहुल गांधी ने कोविड-19 महामारी से निपटने और लॉकडाउन को लेकर केन्द्र सरकार पर साधा निशाना

    भारत में फिलहाल पांच टीके क्लीनिकल ट्रायल के विभिन्न चरणों में हैं. फाइल फोटो
    भारत में फिलहाल पांच टीके क्लीनिकल ट्रायल के विभिन्न चरणों में हैं. फाइल फोटो

    स्वास्थ्य संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोविड-19 (Covid-19) के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी और महामारी के विशिष्ट निर्देशों के अभाव में निजी अस्पतालों ने काफी बढ़ा-चढ़ाकर पैसे लिए.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 23, 2020, 11:06 PM IST
    • Share this:
    नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कोविड-19 (Covid-19) महामारी से निपटने और लॉकडाउन (Lockdown) को लेकर केन्द्र सरकार पर रविवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि इसने लाखों लोगों को गरीबी में धकेल दिया, उनके स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया और छात्रों के भविष्य से समझौता किया गया.

    उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर संसदीय समिति के निष्कर्षों पर एक समाचार रिपोर्ट को भी टैग किया. गांधी ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया, ‘‘मोदी सरकार के अनियोजित लॉकडाउन ने लाखों लोगों को गरीबी में धकेल दिया, नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया और छात्रों के भविष्य के साथ समझौता किया गया.’’

    उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह कड़वी सच्चाई है कि जिसे भारत सरकार अपने झूठ के जरिए छिपाने की कोशिश करती है.’’ राहुल ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए एक अन्य ट्वीट में एक समाचार रिपोर्ट के हवाले से कहा कि हाथरस बलात्कार पीड़िता का परिवार राज्य में सुरक्षित नहीं है.



    गांधी ने ट्वीट में आरोप लगाया, ‘‘उत्तर प्रदेश में सरकार के हाथों पीड़ितों का लगातार शोषण असहनीय है. हाथरस बलात्कार-हत्या के मामले में पूरा देश सरकार से जवाब मांग रहा है और पीड़ित परिवार के साथ है. गुंडाराज में वर्दी की गुंडागर्दी का एक और उदाहरण.’’


    बता दें कि संसदीय समिति ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी और इस महामारी के इलाज के लिए विशिष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में निजी अस्पतालों ने काफी बढ़ा-चढ़ाकर पैसे लिए. इसके साथ ही समिति ने जोर दिया कि स्थायी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया से कई मौतों को टाला जा सकता था.

    स्वास्थ्य संबंधी स्थायी संसदीय समिति के अध्यक्ष राम गोपाल यादव ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को ‘कोविड-19 महामारी का प्रकोप और इसका प्रबंधन' की रिपोर्ट सौंपी. सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने के संबंध में यह किसी भी संसदीय समिति की पहली रिपोर्ट है.

    समिति ने कहा कि 1.3 अरब की आबादी वाले देश में स्वास्थ्य पर खर्च "बेहद कम है" और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की नाजुकता के कारण महामारी से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने में एक बड़ी बाधा आयी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसलिए समिति सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अपने निवेश को बढ़ाने की अनुशंसा करती है.

    समिति ने सरकार से कहा कि दो साल के भीतर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.5 प्रतिशत तक के खर्च के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें, क्योंकि वर्ष 2025 के निर्धारित समय अभी दूर हैं और उस समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं रखा जा सकता है.

    पढ़ेंः महाराष्ट्र में फिर लग सकता है लॉकडाउन, अजित पवार बोले- समीक्षा के बाद करेंगे फैसला

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में 2025 तक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च का लक्ष्य रखा गया है जो 2017 में 1.15 प्रतिशत था. समिति ने कहा कि यह महसूस किया गया कि देश के सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या कोविड और गैर-कोविड मरीजों की बढ़ती संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं थी.

    पढ़ेंः 57 ट्रेनी IAS अधिकारी कोरोना पॉजिटिव, 3 दिसंबर तक संस्थान बंद; ऑनलाइन होगी ट्रेनिंग

    रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज के लिए विशिष्ट दिशानिर्देशों के अभाव के कारण मरीजों को अत्यधिक शुल्क देना पड़ा. समिति ने जोर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महामारी के मद्देनजर सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर साझेदारी की जरूरत है.

    समिति ने कहा कि जिन डॉक्टरों ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दे दी, उन्हें शहीद के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए और उनके परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज