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मिजोरम में राहुल गांधी: नॉर्थ-ईस्ट का आखिरी किला बचा पाएगी कांग्रेस?

मिजोरम में राहुल गांधी: नॉर्थ-ईस्ट का आखिरी किला बचा पाएगी कांग्रेस?

फाइल फोटो

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अमित शाह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 22 नवंबर को राज्य के दौरे पर होंगे. लेकिन, उसके पहले राहुल गांधी और अमित शाह के प्रचार अभियान ने नॉर्थ-ईस्ट के इस पहाड़ी राज्य में सियासत को गर्मा दिया है.

    (अमितेश)

    नॉर्थ-ईस्ट के राज्य मिजोरम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी चुनावी रैली में बीजेपी पर फिर हमला किया. राहुल गांधी ने बीजेपी पर मिजोरम की संस्कृति को खत्म करने का आरोप बीजेपी और आरएसएस पर लगाया. कांग्रेस अध्यक्ष मिजोरम के विधानसभा चुनाव में पहली बार प्रचार करने पहुंचे थे. चंफई में अपनी रैली में राहुल ने कहा कि बीजेपी को अब पता चल गया है कि अगले साल का लोकसभा चुनाव वो नहीं जीत सकती. राहुल गांधी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार में पहुंचे थे, लेकिन, उनके निशाने पर बीजेपी थी और जिक्र लोकसभा चुनाव का भी था.

    राहुल गांधी की तरफ से बीजेपी और संघ पर लगातार हमला किया जा रहा है. लेकिन, ईसाई बहुल मिजोरम में बीजेपी और संघ पर निशाना साधना और बीजेपी पर राज्य की संस्कृति खत्म करने का आरोप लगाना राहुल गांधी की उस रणनीति को दिखा रहा है जिसके तहत वो नॉर्थ-ईस्ट के अपने आखिरी किले को ध्वस्त होने से बचा लेना चाहते हैं.

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    40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा के लिए 28 नवंबर को वोटिंग है. महज दस लाख की आबादी वाले मिजोरम का महत्व फिर भी बड़ा है, क्योंकि इस छोटे से राज्य में ही कांग्रेस अब नॉर्थ-ईस्ट में सरकार में अबतक है. अगर मिजोरम भी हाथ से फिसल गया तो फिर कांग्रेस का पूरे नॉर्थ-ईस्ट से सफाया हो जाएगा. पिछले दो सालों में असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी सत्ता में आई है जबकि मिजोरम और नगालैंड में भी बीजेपी दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर सत्ता में साझीदार हो गई है.

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    यही वजह है कि कांग्रेस बार-बार मुख्य विपक्षी दल एमएनएफ पर यह आरोप लगाकर इस तरह का माहौल बना रही है कि चुनाव बाद एमएनएफ बीजेपी के साथ जा सकती है. कांग्रेस की तरफ से बीजेपी को ईसाई विरोधी बताने की भी पूरी कोशिश की जा रही है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मिजोरम में पहली चुनावी सभा में बीजेपी के साथ-साथ संघ परिवार को निशाना साधना कांग्रेस की उसी रणनीति को दिखाता है. बीजेपी और संघ को ईसाई बहुल मिजोरम की संस्कृति को खत्म करने वाला बताकर राहुल गांधी ने मिजोरम में बीजेपी को रोकने की पूरी कोशिश की है.

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    उधर, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी मिजोरम के दौरे पर थे. मध्यप्रदेश चुनाव में व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद राहुल गांधी और अमित शाह का मिजोरम पहुंचना इस छोटे से राज्य के राजनीतिक महत्व को भी दिखाने वाला है. मिजोरम में कांग्रेस दस सालों से लगातार सत्ता में है. इस बार बीजेपी वहां सभी 40 सीटों पर चुनाव मैदान में है. लिहाजा बीजेपी मिजोरम में चुनाव को काफी गंभीरता से ले रही है.

    अमित शाह चुनाव प्रचार के सिलसिले में दूसरी बार मिजोरम के दौरे पर थे. उनकी तरफ से कांग्रेस की वंशवाद की राजनीति के साथ-साथ राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जा रहा है. हालांकि मुख्य विपक्षी दल एमएनएफ से भी किसी तरह के गठबंधन की संभावना से बीजेपी इनकार कर रही है. मौजूदा विधानसभा में राज्य की 40 में से 34 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. जबकि पांच सीटों पर एमएनएफ के विधायक हैं.


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    ऐसे में बीजेपी के लिए राज्य में अपने लिए संभावना टटोलना काफी कठिन है. लेकिन, राज्य में बीजेपी के आलानेताओं का जमावड़ा और आक्रामक चुनाव प्रचार करना यह दिखा रहा है कि पार्टी की कोशिश कांग्रेस को मिजोरम की सत्ता से भी बाहर करने की है.



    अभी पिछले ही दिनों मिजोरम के दौरे के वक्त बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में कांग्रेस से इस्तीफा देकर पूर्व मंत्री बुद्ध धन चकमा ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. बीजेपी हर हाल में मिजोरम से इस बार कुछ सीटें जीतना चाह रही है.

    कोशिश है कि अगर किंग नहीं तो राज्य में किंगमेकर की उसकी भूमिका बन जाए जिससे कांग्रेस को रोका जा सके. अमित शाह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 22 नवंबर को राज्य के दौरे पर होंगे. लेकिन, उसके पहले राहुल गांधी और अमित शाह के प्रचार अभियान ने नॉर्थ-ईस्ट के इस पहाड़ी राज्य में सियासत को गर्मा दिया है.

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    Tags: Amit shah, BJP, Congress, Mizoram, Mizoram Assembly Election 2018, Rahul gandhi

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