राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, कहा- मोदी सरकार ने देश के अन्नदाता के साथ किया विश्वासघात

कृषि कानून को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला.  
.  (File pic)

कृषि कानून को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. . (File pic)

कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्वीट करते हुए कहा, 'मोदी सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों के फ़ायदे के लिए देश के अन्नदाता के साथ विश्वासघात किया है. आंदोलन के माध्यम से किसान अपनी बात कह चुके हैं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 6:06 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार के कृषि कानूनों (Agricultural Laws) के खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन (Kisan Andolan) का आज 44वां दिन है. अब से कुछ ही देर में दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान संगठनों और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत होनी है. किसानों के साथ होने वाली बातचीत से पहले कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है.

राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'मोदी सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों के फ़ायदे के लिए देश के अन्नदाता के साथ विश्वासघात किया है. आंदोलन के माध्यम से किसान अपनी बात कह चुके हैं. अन्नदाताओं की आवाज़ उठाना और उनकी मांगों का समर्थन करना हम सब का कर्तव्य है.' इससे पहले राहुल गांधी ने एक ट्वीट करते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा होता है. हमारे किसान बहन-भाई जो आंदोलन कर रहे हैं, उसे देश भर से समर्थन मिल रहा है. आप भी उनके समर्थन में अपनी आवाज़ जोड़कर इस संघर्ष को बुलंद कीजिए ताकि कृषि-विरोधी क़ानून ख़त्म हों.



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बता दें कि सरकार से 2 बजे किसानों की आठवीं बार बातचीत होनी है. इसके लिए किसानों का प्रतिनिधिमंडल विज्ञान भवन पहुंच चुका है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी अपने घर से विज्ञान भवन के लिए निकल चुके हैं. इस बीच तोमर ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि हम सकारात्मक वातावरण में बात करेंगे और समाधान तक पहुंचेंगे. हालांकि, गतिरोध खत्म करने के लिए दोनों तरफ से कदम बढ़ाना होगा.

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इससे पहले 4 जनवरी को हुई बैठक के बेनतीजा रहने के बाद यह बैठक अहम है. सरकार ने 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में किसानों की बिजली सब्सिडी और पराली जलाने संबंधी दो मांगों को मान लिया था. इससे पहले की किसी वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली थी.
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