कैसे 60 बार अमेठी का दौरा कर स्मृति ईरानी ने पलट दी बाज़ी?

बीजेपी ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया. मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह भी मिली. फिर भी वह लगातार अमेठी से जुड़ी रहीं.

News18Hindi
Updated: May 26, 2019, 5:41 PM IST
कैसे 60 बार अमेठी का दौरा कर स्मृति ईरानी ने पलट दी बाज़ी?
साल 2014 में हारने के बावजूद वो मैदान में डटी रहीं
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Updated: May 26, 2019, 5:41 PM IST
(प्रांशु मिश्रा)

देश भर में हर तरफ बीजेपी की जीत की धूम है. इस जीत की चमक को स्मृति ईरानी ने और बढ़ा दिया है. अमेठी में राहुल के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रही है. ये जीत 1977 के उस दौर को भी याद दिला रही है, जब इंदिरा गांधी को राज नारायण ने हराया था. लेकिन, ईरानी की जीत की अहमियत आज ज्यादा है, क्योंकि अमेठी का किला ढहाने के लिए उन्होंने कई साल मेहनत की.



दूसरी तरफ, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी को अक्षम लोगों के भरोसे छोड़ दिया. नतीजा आपके सामने है. आम जनता इन इलाकों में राहुल का प्रतिनिधित्व करने वालोंं के खिलाफ गुस्से में है. बड़े नाम और परिवार की कोई अहिमियत नहीं होती. नेताओं को जनता की परेशानियों को सुलझाना पड़ता है.

साल 1977 में राज नारायण ने इमजेंसी के बाद इंदिरा गांधी को रायबरेली में हराया था. उस वक्त देश में अलग माहौल था. लोग इंदिरा के खिलाफ थे. राज नारायण का रायबरेली से कोई जुड़ाव नहीं था. वावजूद इसके उन्हें जीत मिल गई. वहीं, ईरानी ने मेहनत के बल पर अमेठी में जीत दर्ज की है. साल 2014 में हारने के बावजूद वह मैदान में डटी रहीं.



इसमें कोई शक नहीं कि बीजेपी ने स्मृति ईरानी का पूरा सपोर्ट किया. मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह भी मिली. फिर भी वह लगातार अमेठी से जुड़ी रहीं. उन्होंने न्यूज़ 18 से जीत के बाद कहा, ''2014 में ही मुझे अहसास हो गया था कि अमेठी को जीता जा सकता है. संगठन ने ज़िम्मेदारी दी और मैंने पूरा कर दिया.''

पार्टी, संघ परिवार और सरकार हर किसी ने ईरानी को अमेठी में मदद की. बावजूद इसके वह खुद भी दिन-रात मेहनत करती रही. अमेठी में बीजेपी के प्रवक्ता गोविंद सिंह ने बताया कि साल 2014 से 2019 के बीच उन्होंने करीब 60 बार अमेठी का दौरा किया.
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कार्यकर्ताओं और वोटरों से जुड़ी रहीं स्मृति 

इस दौरान बीजेपी ने यहां संगठन को मजबूत किया. खासकर कांग्रेस के दलित और पिछड़ी जातियों के वोट बैंक में सेंध लगाई. इस बीच स्मृति ईरानी लगातार कार्यकर्ताओं और वोटरों से जुड़ी रहीं. उनकी कम्युनिकेशन स्किल ने भी उन्हें लोगों से जुड़ने में बहुत मदद की. सरकारी मशनरी ने इस बात का ख्याल रखा कि सारी कल्याणकारी योजनाओं का अमेठी के लोगों को फायदा मिल सके. इस दौरान कांग्रेस ने कुछ नहीं किया. पार्टी गांधी परिवार के नाम के भरोसे बैठे रही.

बीजेपी ने राहुल के खिलाफ 'गुमशुदा सांसद' का नारा दिया 

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की मेहनत यहां रंग लाई. यहां बीजेपी को पांच में 4 सीट पर जीत मिल गई. इस बीच बीजेपी ने यहां राहुल गांधी के खिलाफ 'गुमशुदा सांसद' का नारा दिया. कांग्रेस ने इसका कोई जवाब नहीं दिया.

राहुल के प्रतिनिधि के खिलाफ लोगों में है जबरदस्त गुस्सा 

हार के बाद अब कांग्रेस के कार्यकर्ता चंद्रकांत दुबे के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. दुबे अमेठी में राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व करते थे. चुनाव के नतीजे आने के बाद लोग आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं की बातें नहीं सुनींं. राहुल गांधी को किसी भी विधानसभा सीट पर बढ़त नहीं मिली. एक बार भी वह ईरानी से वोटों की गिनती में आगे नहीं निकल पाए. आखिर में स्मृति को 55 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिल गई.

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