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राहुल की टीम ने कुछ इस तरह ढहा दिया मोदी का किला

News18Hindi
Updated: December 11, 2018, 1:36 PM IST
राहुल की टीम ने कुछ इस तरह ढहा दिया मोदी का किला
राजस्‍थान का कौन बनेगा सीएम.

अशोक गहलोत को मई 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी भी दी गई है इसकी भी अग्नि परीक्षा अगले साल होगी.

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  • Last Updated: December 11, 2018, 1:36 PM IST
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पांच राज्‍यों की विधानसभा चुनावों के परिणाम राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए काफी महत्‍वपूर्ण हैं. पिछले साल 11 दिसंबर के ही दिन राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्‍यक्ष की कमान संभाली थी. राहुल गांधी ने अब एक साल पूरे कर लिए हैं. राजस्‍थान और मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस की सफलता के पीछे संगठनात्‍मक नेटवर्क की मजबूती को बताया जा रहा है.

राहुल गांधी को इस जीत के लिए राजस्‍थान में सचिन पायलट और मध्‍यप्रदेश में कमलनाथ का शुक्रिया अदा करना चाहिए. दोनों ही नेताओं की कड़ी मेहनत का नतीजा है, जिसके कारण कांग्रेस दोनों ही राज्‍यों में बेहतर प्रदर्शन कर पाई है. सचिन पायलट और कमलनाथ दोनों ही मुख्‍यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे हैं. लेकिन इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि अशोक गहलोत को हाल ही में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया था. खास बात ये ही कि इस पद पर पार्टी के किसी कद्दावर और प्रभावशाली सदस्य को ही नियुक्‍ति किया जाता है. अशोक गहलोत को मई 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी भी दी गई है इसकी भी अग्नि परीक्षा अगले साल होगी.

16वीं लोकसभा के सबसे वरिष्‍ठ सदस्‍य कमलनाथ ने मई 2018 में मध्‍य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष बनने के बाद से काफी मेहनत की. उन्होंने बहुत जल्‍द ही राज्य के 65 सरकारी यूनियन और विभिन्‍न सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक समूहों तक अपनी पैठ बना ली. कमनाथ ने भोपाल के हुजुर निर्वाचन क्षेत्र से एक सिंधी उम्‍मीदवार को उतारा. इसका परिणाम यह हुआ कि छोटे समुदाय भाजपा से हटकर कांग्रेस की तरह मुड़ गए. सोशल मीडिया में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए 500 लोगों की टीम तैयार की गई. यह टीम राज्‍य कांग्रेस ऑफिस में काम कर रही सोशल मीडिया टीम से अलग काम कर रही थी.
आरएसएस के स्‍वयंसेवकों से मुकाबला करने के लिए कमलनाथ ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को अपनी टीम में शामिल किया. ये महिलाएं अक्‍सर पड़ोसी जिलों में जाया करती थीं और कांग्रेस उम्‍मीदवारों और अन्‍य कार्यकर्ताओं पर नजर रखती थीं. ये महिलाएं लगातार फीडबैक दिया करती थीं कि कांग्रेस में सबकुछ सही चल रहा है या फिर उसमें सुधार की आवश्‍यकता है.



कांग्रेस की जीत ने महागठबंधन की संभावनों को बढ़ा दिया है. राहुल गांधी और चंद्रबाबू नायडू ने मई 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली एनडीए की खिलाफ राज्‍यवार महागठबंधन की कोशिशें तेज कर दी हैं. मध्‍यप्रदेश और राजस्‍थान में कांग्रेस की मजबूत स्‍थिति ने महागठबंधन के अंदर ध्रुव की स्‍थिति पैदा कर दी है. इस तरह के परिदृश्य में, बीएसपी अध्‍यक्ष मायावती को राहुल गांधी के सामने दूसरे पायदान पर खड़ा होना पड़ेगा. जो दलित वोटबैंक के लिए किसी खतरे से कम नहीं है. कांग्रेस की सफलता में भले ही महाबठबंधन को मजबूती मिले लेकिन मायावती इस परिणाम से खुद को अलग जरूर रख सकती हैं.



मोदी के खिलाफ महागठबंधन के लिए जरूरी है कि उत्‍तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, आंध्रप्रदेश आदि गैर एनडीए क्षेत्रों के बीच संतुलन बना रहे, लेकिन आम चुनावों में मोदी विरोधी दल काफी महत्‍वाकांक्षी हैं. साथ ही उनके पास गठजोड़ और जमीन पर ऐसी पुख्‍ता संख्‍या भी नहीं है जो मोदी सरकार को पीछे छोड़ सके.

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First published: December 11, 2018, 1:22 PM IST
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