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'प्रभु' जी, किराया तो बढ़ाया, कल गिफ्ट क्या-क्या दोगे?

'प्रभु' जी, किराया तो बढ़ाया, कल गिफ्ट क्या-क्या दोगे?

मौसम बजट का है..ये वो मौसम है जब देश की आमदनी और खर्च, नीतियों में बदलाव, नए प्रोजेक्ट और योजनाओं के बारे में खूब चर्चा होती है। साथ ही ये भी बातें होती हैं कि सरकार की नई नीतियों से हम जैसे आम लोगों को क्या नफा-नुकसान होगा।

मौसम बजट का है..ये वो मौसम है जब देश की आमदनी और खर्च, नीतियों में बदलाव, नए प्रोजेक्ट और योजनाओं के बारे में खूब चर्चा होती है। साथ ही ये भी बातें होती हैं कि सरकार की नई नीतियों से हम जैसे आम लोगों को क्या नफा-नुकसान होगा।

मौसम बजट का है..ये वो मौसम है जब देश की आमदनी और खर्च, नीतियों में बदलाव, नए प्रोजेक्ट और योजनाओं के बारे में खूब चर्चा होती है। साथ ही ये भी बातें होती हैं कि सरकार की नई नीतियों से हम जैसे आम लोगों को क्या नफा-नुकसान होगा।

नई दिल्ली। मौसम बजट का है, ये वो मौसम है जब देश की आमदनी और खर्च, नीतियों में बदलाव, नए प्रोजेक्ट और योजनाओं के बारे में खूब चर्चा होती है। साथ ही ये भी बातें होती हैं कि सरकार की नई नीतियों से हम जैसे आम लोगों को क्या नफा-नुकसान होगा। ये सारा कुछ आम बजट में होता है लेकिन उससे पहले बारी आती है रेल बजट की।

25 फरवरी को रेल मंत्री सुरेश प्रभु 2016-17 का रेल बजट पेश करेंगे। वैसे रेलवे की हालत बहुत अच्छी नहीं है। 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो तब के रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के रेल बजट का पूरा फोकस अधूरे काम को पूरा करने पर ही था। सुरेश प्रभु ने पिछले साल के बजट में निवेश और टेक्नालॉजी के इस्तेमाल और सेवाओं को बेहतर करने पर जोर दिया। इस साल के रेल बजट से आम लोगों को उम्मीद है कि किराए कम होंगे और सेवाएं पहले से और बेहतर। लेकिन कुछ बातें हैं जिन्हें जानना-समझना जरूरी है-

मूलभूत ढांचे का विकास
माना जा रहा है कि 2016 के रेल बजट का मूल मंत्र आधुनिकीकरण होगा। क्षमता निर्माण यानी कपेसिटी बिल्डिंग और नए तौर-तरीके अपनाने के लिए निवेश 20 से 30 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। इससे आम लोगों को आधुनिक सुविधाएं तो मिलेंगी ही रेलवे की आर्थिक हालत बेहतर होने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा रेलवे की कोशिश होगी कि जो माल ढुलाई उसके पास से छिटक कर ट्रकों की तरफ चली गयी है उसे वापस लाया जाए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिरने से डीजल के खर्च में कमी आई है। इससे शायद माल भाड़े कम करने में सरकार को दिक्कत नहीं होगी।

2015 के रेल बजट में सुरेश प्रभु ने कहा था कि सरकार अगले 5 सालों में रेलवे का ढांचा मजबूत करने के लिए करीब 1000 अरब रुपए खर्च करेगी। इसमें से करीब 400 अरब रुपए 2015-16 में ही खर्च होने थे। इस साल के बजट में इस निवेश की दूसरी किस्त का ऐलान होने की संभावना है। नई पटरियां बिछाने, नए लेवल क्रासिंग पर चौकीदारों की नियुक्ति और दूसरे ढांचागत विकास पर फोकस के अलावा सरकार का ध्यान माल ढुलाई बढ़ाने पर भी होगा। 2015 में माल भाड़े में बढ़ोतरी की गयी थी लेकिन इस साल के बजट में कुछ राहत की उम्मीद है। इससे स्टील और सीमेंट सेक्टर को फायदा होगा। बीते साल में माल ढुलाई में महज एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है लेकिन ये लक्ष्य से बहुत दूर है। हालांकि बीते 5 सालों में डीजल के दामों में गिरावट आई है, लेकिन माल भाड़े में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जिसका असर आम लोगों पर पड़ता है। इस साल के बजट में इससे कुछ राहत की उम्मीद हम कर सकते हैं।

आधुनिकीरण पर जोर
रेल मंत्री की नीयत साफ नजर आती है, रेलवे का आधुनिकीकरण और यात्रा के लिए देश का सबसे पसंदीदा तरीक बने रेलवे। 2016 के रेल बजट में ऐसी कई योजनाओं के ऐलान की उम्मीद है जिससे रेलवे आधुनिक होगा और डिजिटल इंडिया के सपने से कदमताल करता नजर आएगा। वेटिंग रूम की ऑनलाइन बुकिंग से लेकर ऑटोमेटेड रिजर्वेशन और संचार आधारित ट्रेन कंट्रोल सिस्टम से रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम तक, कई आधुनिक और टेक्नालॉजी आधारित घोषणाएं सुनने को मिल सकती हैं। इतना ही नहीं उम्मीद ये भी है कि इस रेल बजट में भोपाल की वर्कशॉप में तैयार स्टेट-ऑफ-दि-आर्ट इको फ्रेंडली कोच के बारे में भी कुछ घोषणाएं होंगी। इन डिब्बों में बड़ी और आधुनिक इंटीरियर के साथ, बिना झटकों वाली सीटें, एलईडी लाइट्स और बायो-टायलेट जैसी सुविधाएं होगी जिससे रेल यात्रा एक आधुनिक और सुखद अनुभव कराएगी। उम्मीद है कि 14 लाख रुपए के आसपास लागत वाले देश में ही तैयार ये डिब्बे जल्द ही राजधानी, शताब्दी और अन्य प्रीमियर ट्रेनों में लगेंगे जो 160 से 200 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगे।

रफ्तार और सेवाएं
रेलमंत्री के बजट का एक अहम फोकस ट्रेनों की स्पीड बढ़ाना और सेवाओं के बेहतर करना है। इसके संकेत इस बात से मिलते हैं कि दिल्ली-आगरा के बीच इसी मार्च से हाई स्पीड ट्रेन चलाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। गतिमान एक्सप्रेस नाम की ये ट्रेन देश की पहली ट्रेन होगी जिसकी स्पीड 160 किमी प्रति घंटा होगी। बजट भाषण में सुरेश प्रभु इस ट्रेन में की किस्म की सेवाओं और सुविधाओं के बारे में बता सकते हैं। इस ट्रेन में स्लाइडिंग डोर्स के अलावा, हाई पॉवर इमरजेंसी ब्रेक, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और ऑटोमेटिक फायर अलार्म जैसी कई लग्जरी सेवाएं होंगी। रेल बजट में कई और रूटों पर गतिमान एक्सप्रेस ट्रेनों की घोषणा हो सकती है। इनमें दिल्ली-चंडीगढ़, कानपुर-दिल्ली, गोवा-मुंबई, हैदराबाद-चेन्नई और नागपुर-सिकंदराबाद शामिल हो सकते हैं। हालांकि बुलेट ट्रेन का सपना अभी दूर है लेकिन इन नई गतिमान एक्सप्रेस से रफ्तार में तेजी आएगी। इसके अलावा रेल बजट का फोकस जिन चीजों पर हो सकता है वो हैं। स्वच्छता, सुविधा और शिकायत निवारण। रेलमंत्री अपने ट्विटर के जरिए लोगों की शिकायतों और परेशानियों के दूर करने में खूब वाहवाही बटोर रहे हैं और प्रभु की चिड़िया कमाल कर रही है। साथ ही कई ट्रेनों में ई-केटरिंग शुरु हो चुकी है जो अन्य ट्रेनों में भी शुरु होने की संभावना है।

सबसे बड़ा सवाल–क्या बढ़ेंगे यात्री किराए?
ये एक ऐसा सवाल है जो हर रेल बजट से पहले दिमाग में आता है। इस साल हालांकि ध्यान अतिरिक्त जनरल कोच बढ़ाने और सुविधाएं बेहतर करने पर होगा, लेकिन संभावना है कि यात्री किराए में दस फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो सकती है। ढांचागत विकास, आधुनिकीकरण, बेहतर सेवाओं के साथ सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में आने वाले खर्च की भरपाई सरकार को कहीं से तो करनी ही है। यात्री किराए में बढ़ोतरी से रेलवे को आर्थिक लाभ तो होगा लेकिन एक आशंका भी है कि कहीं बढ़े हुए किराए की वजह से यात्री लो कॉस्ट एयरलाइन की तरफ तो रुख नहीं कर लेंगे। इस मोर्चे पर रेल मंत्री को फूंक कर कदम रखना होगा।

तो फिर क्या हो आम आदमी अहम उम्मीदें?
-बीते एक महीने में अलग-अलग माध्यमों में जारी चर्चाओं से नतीजा निकलता है कि लोग उपनगरीय यातायात के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जता रहे हैं, खासतौर से मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद और बंगलुरु जैसे शहरों में।

-डेली पसेंजर और कम्यूटर को टिकटिंग के झंझावत से मुक्ति की उम्मीद है तो ज्यादा उपनगरीय ट्रेनें चलने की।

-ट्रेनों में क्वालिटी फूड, बेहतर साफ-सफाई और हाईजीन, कॉकरोच और चूहों से मुक्ति की उम्मीद भी कर रहे हैं लोग। यानी ट्रेनों में ज्यादा डस्टबिन लगें, टायलेट का मेंटेनेंस बेहतर हो, साफ पीने का पानी मिले और चलती ट्रेनों में मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ मोबाइल चार्जिंग व्यवस्था भी हो।

-सुरक्षा और मेडिकल सुविधाएं हर स्टेशन पर बढ़ाई जाएं। फिलहाल ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर न तो रैंप हैं और न ही मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की सुविधाएं। विकलांगों के लिए भी सुविधाओं की बेहद कमी है। स्टेशनों पर एलीवेटर, एस्केलेटर और व्हील चेयर की व्यवस्था होनी जरूरी है। हर जगह फर्स्ट एड किट और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की भी जरूरत है। ज्यादा संख्या में आरपीएफ जवान और हेल्पलाइन नंबरों का होना भी लोगों की उम्मीदों में शामिल है।

-इसके अलावा मोबाइल इस्तेमाल करने के आदी यात्रियों के टेक्नालॉजी के और इस्तेमाल की उम्मीद है जैसे, तत्काल टिकट कैंसिल कराने पर कुछ तो वापस मिले, अपनी मर्जी की बर्थ चुनने की सुविधा हो, ट्रेनों के छूटने में देरी की सूचना एसएमएस से मिल जाए और पार्सल की बुकिंग भी ऑनलाइन ही हो जाए।

उम्मीद है रेल मंत्री इन अपेक्षाओं का ध्यान रखेंगे।

Tags: Indian railway, Suresh prabhu

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