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railways and iit madras to work on indigenous hyperloop transport technology after ashwini vaishnav approval

'स्वदेशी' हाइपरलूप तकनीक पर काम करेंगे रेलवे और IIT मद्रास, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी मंजूरी

आईआईटी मद्रास में हाइपरलूप तकनीक पर आधारित ट्रांसपोर्टेशन मॉडल का निरीक्षण करने के बाद छात्रों को शाबाशी देते केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव. (Koo Photo)

आईआईटी मद्रास में हाइपरलूप तकनीक पर आधारित ट्रांसपोर्टेशन मॉडल का निरीक्षण करने के बाद छात्रों को शाबाशी देते केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव. (Koo Photo)

हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट एक प्रकार की बहुत उच्च गति की ट्रेन है, जो वैक्यूम ट्यूब में चलती है. ट्यूब के अंदर हवा का दबाव बहुत कम होता है, जिससे कैप्सूल की आकृति वाले व्हीकल की गति 1000 किमी प्रति घंटा से भी ज्यादा जा सकती है.

चेन्नई: केंद्रीय रेलवे, दूर संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट तकनीक पर रिसर्च की मंजूरी दे दी है. यह तकनीक हाई स्पीड ट्रांसपोर्ट में मदद करती है. रेलवे मंत्री आईआईटी मद्रास के शोध प्रस्ताव को अनुमति देते हुए क​​हा कि भारतीय रेलवे के साथ मिलकर स्वदेशी स्तर पर हाइपरलूप तकनीक पर आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इसके सब सिस्टम को विकसित करने पर काम होगा.

इस साझेदारी के तहत आईआईटी मद्रास में हाइपरलूप तकनीक के लिए उत्कृष्ट केंद्र भी स्थापित किया जाएगा. इसकी अनुमानित लागत करीब 8.34 करोड़ रुपए होगी. आईआईटी मद्रास के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने यहां के छात्रों ने न्यू एकेडमी कॉम्प्लेक्स में विकसित किए गए हाइपरलूप पोड मॉडल का प्रदर्शन किया. हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट एक प्रकार की बहुत उच्च गति की ट्रेन है, जो वैक्यूम ट्यूब में चलती है. ट्यूब के अंदर हवा का दबाव बहुत कम होता है, जिससे कैप्सूल की आकृति वाले व्हीकल की गति 1000 किमी प्रति घंटा से भी ज्यादा जा सकती है.

आईआईटी मद्रास के छात्रों की एक टीम ‘अविष्कार हाइपरलूप’ पर काम कर रहा है, जिसका मकसद भविष्य में हाइपरलूप पर आधारित परिवहन प्रणाली तैयार करना है. यह तकनीक यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल कर रख देगी. भारतीय रेलवे का कहना है कि आईआईटी मद्रास की ‘अविष्कार हाइपरलूप’ टीम ने जो मॉडल प्रस्तुत किया है, वह 1200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर सकता है. यह पूरी तरह से सुरक्षित है. ‘अविष्कार हाइपरलूप’ टीम का मकसद आईआईटी मद्रास में दुनिया का सबसे बड़ा हाइपरलूम रिसर्च सेंटर बनाना है.

इसके अलावा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को देश में विकसित दूरसंचार उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए आईआईटी-मद्रास में स्थापित एक परीक्षण नेटवर्क से पहली 5जी कॉल की. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के पहले 5जी टेस्ट-बेड का उद्घाटन किया था, जिसे आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में कुल आठ संस्थानों द्वारा बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित किया गया है. अश्विनी वैष्णव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘आत्मनिर्भर 5जी. आईआईटी मद्रास में 5जी कॉल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. संपूर्ण नेटवर्क भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है.’ केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस साल अगस्त-सितंबर तक देश में 5जी सेवाएं शुरू हो जाएंगी.

Tags: 5G Technology, Ashwini Vaishnaw, IIT Madras

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