मुंबई की बारिश: मीडिया के जाने के बाद हटा प्रशासन, 10 लाख लोगों की जान सांसत में

नालासोपारा ईस्ट में नमक के खेत थे जिनको भरकर बिल्डिंग बना दी गई. इतना ही पास की खाडी के हजारों मैंग्रोव जो अब तक पानी सोखते उनको काट के वहां कचरा भर दिया गया.

संदीप सोनवलकर | News18Hindi
Updated: July 12, 2018, 3:39 PM IST
मुंबई की बारिश: मीडिया के जाने के बाद हटा प्रशासन, 10 लाख लोगों की जान सांसत में
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संदीप सोनवलकर | News18Hindi
Updated: July 12, 2018, 3:39 PM IST
मुंबई से सटे नालासोपारा और वसई विरार इलाके में पिछले तीन दिन से 10 लाख से ज्यादा लोग पानी से परेशान है. तीन दिन पहले करीब 350 मिलीमीटर जोरदार बारिश हुई और पूरा इलाका पानी में डूब गया . उसके बाद पहले रेलवे ने सारी लोकल और बाहरी ट्रेन रोक दी. फिर बिजली विभाग ने बिजली काट दी और पानी भरने के कारण पेयजल की सप्लाई बंद है. मगर पानी निकलने का नाम नही ले रहा.

मीडिया ने खबरें दिखाई तो मंगलवार और बुधवार को प्रशासन ने ट्रेन मे फंसे करीब 1500 लोगों और घरों में फंसे करीब 500 लोगों को निकाल दिया लेकिन उन दस लाख लोगो के लिए कुछ नही किया जा रहा है जो पिछले तीन दिन से यातना झेल रहे हैं और पानी निकलने का इंतजार कर रहे है. मीडिया के हटने के साथ ही प्रशासन भी हट गया और लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया.

वसई विरार और नालासोपारा दरअसल मुंबई के मध्यवर्ग का नया ठिकाना है. सस्ता मकान और ट्रेन में चढ़ पाने की सुविधा के चलते मुंबई शहर से करीब दस लाख लोग इन इलाको में जाकर बसे. बिल्डरो ने खूब सुंदर सपना दिखाकर मकान बेचा लेकिन महानगरपालिका होने के बाद भी यहां कोई सुविधा नहीं बनी.

ज्यादातर कालोनियां आदिवासी या ग्रामीणों की जमीन पर बनी है. कभी ग्रामीण इलाका होने के कारण बिना कागज पूरे किये ही कई कोलानिया बस गई जिनको अब तक नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं सो पेयजल बस टैंकर से आता है. बिजली चोरी से या मिलीभगत से आती है. इस इलाके में ज्यादातर बिहार और यूपी से आये उत्तर भारतीय और कुछ मराठी लोग रहते हैं. अब रहा सवाल पानी भरने का तो उसकी दो बड़ी वजह है . वसई विरार वेस्ट इलाका समंदर से लगता है और खाड़ी भरकर इसे बनाया है कंक्रीट के कारण पानी अब खाड़ी में नही जाता.

नालासोपारा ईस्ट में नमक के खेत थे जिनको भरकर बिल्डिंग बना दी गई. इतना ही पास की खाडी के हजारों मैंग्रोव जो अब तक पानी सोखते उनको काट के वहां कचरा भर दिया गया. साथ ही रेलवे लाईन सालों से खेत की बराबरी में चल रही है उसके दोनों तरफ नाला बनाने का प्रोजेक्ट सालों से चल रहा है लेकिन पूरा नही हुआ.

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ऊपर से पास के सूर्या डैम में जब पानी ज्यादा हो गया तो छोड दिया गया जो यहां भर गया. अब पानी निकलने का नाम नही ले रहा. चूंकि जमीन दलदली है इसलिए गीली तो हो गई लेकिन उससे अंदर पानी परकोलेट नहीं हो रहा . विकास के पहले इन सब सवालो पर ध्यान ही नही दिया गया.

अब रही राजनीति की बात तो इन तीनों इलाको में दबंग और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हितेंद्र यानी भाई ठाकुर का राज चलता है. तीनों विधानसभा और वसई विरार महानगरपालिका सब उनके कब्जे में है. बीजेपी ने पिछले महीने किसी तरह लोकसभा उपचुनाव जीता भी तो भाई ठाकुर की मदद से. भाई जानते है यहां ज्यादातर गरीब और कामकाजी वर्ग रहता है जो उनके खिलाफ आवाज नही उठा सकता, इसलिए शहर पता नही कब तक डूबा है.

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