कमला हैरिस के विचारों को आकार देने वाले उनके प्रगतिशील नाना में थीं कई खासियतें

कमला हैरिस के विचारों को आकार देने वाले उनके प्रगतिशील नाना में थीं कई खासियतें
1972 की एक तस्वीर में सामने केंद्र में सीनेटर कमला हैरिस, बाएं से, उनके नाना, बहन, मां और नानी (फोटो साभार- Twitter/ @mayaharris_)

अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद की डेमेक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस (Kamala Harris) के नाना स्वर्गीय पीवी गोपालन का जन्म 1911 में तंजावुर (Thanjavur) के एक गांव में हुआ था. उनकी शिक्षा (education) के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. उन दिनों के कई पारंपरिक तमिल ब्राह्मणों की तरह, वह नौकरी की तलाश में देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) चले गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 17, 2020, 5:25 PM IST
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(आरके राघवन)

नई दिल्ली. कमला हैरिस (Kamala Harris) को संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद (United States presidency) के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार (Democratic candidate) जो बाइडेन की साथी उम्मीदवार चुने जाने पर दक्षिण भारत (southern India) से बुलंद आवाज में प्रतिक्रिया आई है. कमला की मां श्यामला गोपालन, जिनका कुछ वर्ष पहले निधन हो गया, तमिलनाडु (Tamil Nadu) राज्य से संबंध रखती थीं. वैसे 'कमला' भी अगर पूरी तरह से नहीं तो अनिवार्य रूप से एक दक्षिण भारतीय नाम (south Indian name) है, जो दिखावटी तमिल गर्व की गूंज रखता है. कई लोगों को इससे प्रसिद्ध भरतनाट्यम (दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली) की कलाकार कमला लक्ष्मण (Kamala Lakshman) की याद आ सकती है, जिनका 1950 और 60 के दशक में इस क्षेत्र में दबदबा था और जो अपने नृत्य की उम्र पूरी करने के बाद न्यूजर्सी (New Jersey) में बस गई थीं. तब से हैरिस ही पहली कमला हैं जिन पर इतनी चर्चा हो रही हैं. कई ब्राह्मण उत्साह की तलाश में हैं. साथ ही कोविड-19 (Covid-19) की यातना और अवसाद (depression) से राहत के लिए उम्मीद में यह उत्साह थोड़े और दिनों तक जारी रह सकता है.

हैरिस के वंश के लोगों को चेन्नई (Chennai) के दक्षिण में तंजावुर के खेतिहर जिले के एक गांव में खोजा जा सकता है. कई ब्राह्मण, वह मुख्य समूह जिससे हिंदू पुजारी (hindu priest) आते हैं, इसी जिले से आते थे. हैरिस के नाना स्वर्गीय पीवी गोपालन का जन्म 1911 में तंजावुर (Thanjavur) के एक गांव में हुआ था. उनकी शिक्षा (education) के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. उन दिनों के कई पारंपरिक तमिल ब्राह्मणों की तरह, वह नौकरी की तलाश में देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) चले गए थे. उन दिनों कोई निजी क्षेत्र नहीं था जिसके बारे में बात की जा सके, और जो उस दौर में ऐसे युवा को रोजगार (employment) दे सके.



उद्यमशील थे नाना गोपालन
इसके विपरीत, दिल्ली में केंद्र सरकार हमेशा युवा स्नातकों, विशेषकर दक्षिण के लोगों को लेकर स्वागतपूर्ण मुद्रा में रहती थी, क्योंकि 'मद्रासी', जैसा कि इस क्षेत्र के लोगों को आमतौर पर कहा जाता था, उन्हें आधिकारिक भाषा अंग्रेजी के अच्छे जानकार के साथ सौम्य, आज्ञाकारी और वफादार माना जाता था. यह उनकी उद्यमशीलता थी जिसने गोपालन को दूर दिल्ली जाने के लिए राजी कर लिया था, जहां मद्रास (अब चेन्नई) से ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस के जरिए दो रातों की ट्रेन यात्रा के जरिए पहुंचा जाता था.

सचिवालय में संयुक्त सचिव बने, आखिरी पोस्टिंग पर जाम्बिया गये
उन दिनों लगभग हर युवा- जिनमें शायद ही कोई महिला रही हो- केंद्रीय सचिवालय सेवा, जो सरकार के कई विभागों में सहायक के रूप में शुरू किया गया था, में भर्ती हुआ था. मैं इस विषय पर कुछ अधिकार के साथ बोल सकता हूं क्योंकि मेरी मामी- एक और कमला, लेकिन हैरिस से कोई संबंध नहीं रखने वाली ने- रंगास्वामी नाम के एक सहायक से शादी की थी, जो एक ऐसे ही अभिजात्य वर्ग से आते थे. प्रत्येक सहायक, जब तक कि वह बहुत औसत दर्जे का या अनुशासनहीन नहीं रहा हो, उसने सीढ़ियां चढ़ीं और संयुक्त सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए.

यह एक ऐसा पद था, जो सचिव को रिपोर्ट करता था. सचिव सर्वोच्च रैंक वाले सिविल सर्वेंट होते थे, जो हमेशा एक अंग्रेज होता था और जो भारतीय सिविल सेवा(ICS) से जुड़ा होता था. यह वर्तमान भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की पूर्ववर्ती थी. कुछ प्रमोशन, जैसा गोपालन को अपने करियर के अंत में एक विदेशी पोस्टिंग के उपहार के तौर पर मिला. इस तरह गोपालन जाम्बिया में राहत उपायों और शरणार्थियों के निदेशक के रूप में गये. सभी विशिष्ट दक्षिण भारतीय नौकरशाहों की तरह, उन्होंने भी अपने ध्यान को कहीं भटकने नहीं दिया और अपनी नौकरी पर ध्यान केंद्रित किया, साथ ही कुछ पैसे और प्रतिष्ठा भी अर्जित की.

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(लेखक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो- CBI के पूर्व निदेशक रहे हैं, और पिछले साल तक भारत की ओर से साइप्रस में उच्चायुक्त थे. जो टेम्पल यूनिवर्सिटी, फिलॉसफी से आपराधिक न्याय में स्नातक करने के बाद हार्वर्ड लॉ स्कूल और रटगर्स में विजिटिंग फेलो रहे. यहां व्यक्त विचार निजी हैं.)
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