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कुर्सी के चक्कर में फंस गई कांग्रेस? राजस्‍थान संकट के वे 5 अनसुलझे सवाल, जिनका अब तक नहीं मिला जवाब

राजस्थान में सीएम की कुर्सी से लिए छिड़ी जंग अब खुलकर सामने आ गई है. (अशोक गहलोत और सचिन पायलट फाइल फोटो)

राजस्थान में सीएम की कुर्सी से लिए छिड़ी जंग अब खुलकर सामने आ गई है. (अशोक गहलोत और सचिन पायलट फाइल फोटो)

rajasthan political crisis: अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बरकरार रहेंगे या सचिन पायलट उनकी जगह लेंगे, इस पर अब भी ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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हाइलाइट्स

राजस्थान कांग्रेस में कुर्सी के चक्कर में सियासी ड्रामा जारी है.
अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान जारी है.
कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से भी गहलोत बाहर हो सकते हैं.

जयपुर: कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव का बिगुल बजते ही राजस्थान में पार्टी सियासी संकट से जूझने लगी है. मुख्यमंत्री पद को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच जारी खींचतान को लेकर राजस्थान कांग्रेस के भीतर सियासी ड्रामा जारी है. अशोक गहलोत के अध्यक्ष पद के चुनाव लड़ने की स्थिति में सचिन पायलट मुख्यमंत्री की रेस में सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं, मगर अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने अचानक इस्तीफा सौंपकर कांग्रेस आलाकमान के सामने एक नया सियासी संकट खड़ा कर दिया है.

अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बरकरार रहेंगे या सचिन पायलट उनकी जगह लेंगे, इस पर अब भी सस्पेंस के बादल मंडरा रहे हैं. हालांकि, सियासी गलियारों में अब खबर यह भी है कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो सकते हैं. बहरहाल, राजस्थान में विधायक दल की बैठक बुलाने से लेकर गहलोत गुट के समर्थकों के विरोध के बीच ऐसे 5 सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है और वे अनसुलझे हैं.

पहला सवाल: विधायक दल की बैठक बुलाने के लिए कांग्रेस की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव खत्म होने का इंतजार क्यों नहीं किया गया? राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अध्यक्ष बनने के बाद भी बैठक बुलाई जा सकती थी.

दूसरा सवाल: क्या कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार को ये अंदेशा हो गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में जीत के बाद राजस्थान में अशोक गहलोत अपनी मनमानी कर सकते हैं यानी अपने किसी चहेते को मुख्यमंत्री बनवा सकते हैं? शायद इसलिए राजस्थान की स्थिति को चुनाव से पहले ही स्पष्ट करने का फैसला किया गया?

तीसरा सवाल: अशोक गहलोत कई बार अध्यक्ष बनने की स्थिति में राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर रहने की बात कर चुके थे. क्या इसलिए कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान की स्थिति को अध्यक्ष चुनाव से पहले ही सुलझाने का फैसला किया?

चौथा सवाल: क्या अशोक गहलोत को कांग्रेस आलाकमान के फैसले का थोड़ा भी अंदाजा था कि इतनी जल्दी बैठक बुलाने का फैसला पार्टी कर सकती है?

पांचवा सवाल: क्या अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते थे, इसलिए परदे के पीछे रहकर विरोध को पीछे से समर्थन दिया ताकि राजस्थान की गद्दी बची रहे?

रविवार की रात को अचानक क्या हो गया था?

गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल की बैठक रविवार रात को मुख्यमंत्री आवास पर होनी थी, लेकिन गहलोत के वफादार कई विधायक बैठक में नहीं आए. उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के बंगले पर बैठक की और फिर वहां से वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से मिलने चले गए. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि गहलोत के वफादार 82 विधायक अपनी अगली कार्रवाई के बारे में फैसला करने के लिए एक और बैठक कर सकते हैं. उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि जो 2020 में राजस्थान में राजनीतिक संकट के दौरान कांग्रेस सरकार के साथ खड़ा हुआ वही अगला मुख्यमंत्री हो. जुलाई 2020 में पायलट और पार्टी के 18 अन्य विधायकों ने गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी. राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 108 विधायक हैं.

Tags: Ashok gehlot, Congress, Rajasthan news, Sachin pilot

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